शकील अख़्तर,इंदौर स्टूडियो। ‘मैं कहाँ रचती हूँ, असल में तो प्रकृति मुझे रच रही होती है, जी रही होती है’!…ये कहना है भारती दीक्षित का, वे इंदौर की एक चित्रकार, दास्तानगो और यू ट्यूबर हैं। दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में 15 जनवरी से उनकी तीन दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी जारी है। इसमें उनकी 60 कलाकृतियां उनके अलहदा काम को दर्शाने के लिये काफी हैं। राजधानी में चित्रकला के चाहने वाले उनके काम को बड़ी दिलचस्पी से देख रहे हैं।
खुद को कुदरत का हिस्सा मानकर ‘सर्ग सृजन’: भारती की ये प्रदर्शनी इंडिया हैबिटेट के ओपन पॉम कोर्ट में लगाई गई है। उनकी इस सोलो एक्जिबिशन का नाम है – ‘सर्ग सृजन’। सर्ग यानी प्रकृति। वे ख़ुद को प्रकृति का एक हिस्सा मानती हैं और इसे अपनी तरह से महसूस कर अपने सृजन की दुनिया को अपने भीतर जीती रहती हैं। जब दिल चाहता है, उसे वे अपनी कलाओं में अभिव्यक्त करती हैं। बेशक पेटिंग उनका एक महत्वपूर्ण कला आयाम है। इसमें वे विभिन्न माध्यमों में ख़ुद आज़माती रहती हैं।
लोक परंपराओं से प्रेरित चित्र कला: भारती की कलाकृतियां असल में मध्यप्रदेश और मालवा की लोक चित्रकला से प्रेरित हैं। इनमें गोंड से लेकर बिंदुओं को जोड़ने या गोदड़ी बनाने जैसे काम से प्रेरित कला का संसार हैं। प्रदर्शनी में उनके दो तरह के काम प्रमुखता से नुमाया हुये हैं। इनमें से एक है कपड़े पर कपड़े की लेयरिंग ..या लेयरिंग ऑफ फैब्रिक्स…उनके अलग-अलग रंगों से चित्रकला की रचना और उसका सृजन संसार। दूसरा, उनका बेहद विशिष्ट मिट्टी और धागे का काम हैं। मिट्टी और धागे से शिल्पकारी के प्रदर्शनी में 23 कलाकृतियां उन्होंने प्रदर्शित की हैं। इस कला के बारे में वे कहती हैं, – ‘मैं कहती हूँ मैं मिट्टी को गुनती नहीं हूँ, मैं अपनी कलाकृतियों को बनाने के लिये मिट्टी को बुनती हूँ’!’
डेढ़ दशक से जारी चित्रकला की यात्रा: भारती दीक्षित बीते डेढ़ दशक से चित्रकला में अपनी तरह से नफ़ासत भरा और महीन काम कर रही हैं। अब तक 40 से अधिक ग्रुप एक्ज़ीबिशन और करीब 7 एकल प्रदर्शनियां कर चुकी हैं। इनमें सिंगापुर और ओमान जैसे देश की चित्रकला प्रदर्शनियां भी शामिल हैं। हर जगह उनके काम को बेहद प्रेरक और संभावना से भरा माना गया। ओमान में तो वहाँ की जूरी ने एक्जीबिशन के बाद भी भारती के काम को अपने पास ही रखना उचित समझा। उन्हें कहा गया, हम आपकी चित्रकला आगामी प्रदर्शनी के लिये सहेज रहे हैं।
घर-संसार के बीच कला का संसार: भारती कहती हैं, ‘यह सब वे अपने परिवार की धुरी बने रहने के बीच करती रहती हैं। बेटी इंजीनियर है, बेटा पढ़ाई में बिज़ी रहता है। पति पकंज दीक्षित सीनियर जर्नलिस्ट हैं। शेष रिश्ते-नातों से भर घर- संसार है। इसमें इंदौर का माहौल भी शामिल है, जहाँ आना-जाना, मिलना-मिलाना चलता ही रहता है। इस भागदौड़ के बीच मैं अपने काम को करने की कोशिश करती रहती हूँ। जब पेटिंग करती हूँ, तब समय चुराकर बस उसी दुनिया से जुड़ी रहती हैं। जब मंच पर दास्तानगोई का परफॉरमेंस देना हो, तब पेटिंग छूटती है। मैं उसकी तैयारी में भिड़ जाती हूँ। और जब यह सब नहीं होता,तब अपने नाम वाले यू ट्यूब चैनल के लिये कहानियां रिकॉर्ड करती हूं। हाँ, आपाधापी के बीच कई बार रिकॉर्डिंग टूटती है, आवाज़ का स्तर गिरता है। मगर कला की ज़िद, वह काम किसी सूरत करा ही लेती है।
इंदौर की कलाकार को राजधानी में मान: दिल्ली में इंदौर की इस चित्रकार के काम को बड़ी दिलचस्पी से देखा जा रहा है। उनके काम को चित्रकला जगत और समीक्षकों में सम्मान मिल रहा है। वे कहती हैं, ‘मेरे लिये यहाँ से मिल रही उत्साहजनक प्रतिक्रियाएं बड़ी प्रेरक हैं’। चलते-चलते याद दिला दें, भारती की यह सोलो प्रदर्शनी 17 जनवरी की शाम तक जारी रहेगी। उनके काम में जिस तरह की नफ़ासत,बुनावट और कलाकारी है, उसका अंदाज़ा देखने से ही लग सकता है। इसके लिये वक्त निकालकर इंडिया हैबिटेट आना ज़रूरी है।
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