इंदौर स्टूडियो डॉट कॉम। क्रिसमस और नए वर्ष के आगमन से पहले इंदौर में कवि और शायरों की एक महफ़िल सजाई गई। रविवार शाम को कार्यक्रम में कुमार देशबंधु और पोएट्री कॉर्नर इंडिया द्वारा पोएट्री परफॉर्मेंस दी गई। कार्यक्रम का आयोजन मध्य प्रदेश के स्टेज परफॉर्मेंस कुमार देशबंधु द्वारा किया गया। कार्यक्रम का प्रबंध और संचालन का जिम्मा भी कुमार देशबंधु ने ही लिया।
कार्यक्रम में कुमार देशबंधु ने अपनी प्रेमिका की वार्तालाप को कुछ इस तरह बताया कि “वह मॉम के सामने मुझे ब्रो, फ्रेंडस के बीच मुझे जस्त फ्रेंड और अकेले में मुझे हब्बी डबी कह कर बुला रही है।“ वहीँ लेखिका श्वेता पांडेय की पंक्तियों को भी कुमार देशबंधु ने कुछ इस तरह पढ़ा कि “मै नहीं अकेले रात में निकलूंगी बाहर, पर दिन में सुरक्षित हूँ, इसकी गारंटी दे दो” “मुझे नहीं चाहिए बराबरी का दर्जा, पीछे रह कर भी सुरक्षित हूँ, इसकी गारंटी दे दो।”
डॉक्टर अखिलेश तोमर ने पढ़ा कि, ” उम्र भर फक्त यही गुनाह किया गया, वक्त वक्त पर खुद को वक्त नहीं दिया गया।”
अला चौहान ने पढ़ा कि, “जिन्हें लगता है कि नगर में सवरने आए है लोग, वह जानते नहीं कि धुंए में मरने आए हैं लोग।”
दीपक मालवीय ने पढ़ा कि, “जुदा होते हुए हम तुम गले से लग रहे थे जब, कहानी को वहीं पर खत्म मैंने कर ही देना था।“
करिश्मा खान ने पढ़ा कि, “दो मजहब से हमारा ये वतन सजता है, कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर दिन एक ही उजाला फैलाता है।”
नितेश कुशवाह ने पढ़ा कि, “हटा दी यार की तस्वीर मैंने, तड़प कर रो पड़ा कमरा अकेला।”
इनके अलावा मनीष गंगा, नंदकिशोर महाजन, कुंदन पाटीदार, जीत राठौर, जस्प्रीत शर्मा और इत्यादि कवियों ने कविता पढ़ा। कुमार देशबंधु ने अंतिम में सभी का आभार माना।

