Wednesday, May 13, 2026
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इंदौर में ‘ऑल द बेस्ट’ के बूस्टर डोज़ ने दर्शकों को जमकर हँसाया

कला प्रतिनिधि,इंदौर स्टूडियो। इंदौर में नाटक ‘ऑल दि बेस्ट’ का दर्शकों को बूस्टर डोज़ लगा। इस हास्य नाटक का इंदौर के रविंद्र नाट्य गृह में मंचन हुआ। नाटक की सिचुशनल कॉमेडी ने दर्शकों को जमकर हँसाया। ‘पथिक’ रंग समूह द्वारा यह नाटक मध्यप्रदेश विद्युत मंडल पेशंसनर्स एसोसिएशन के सहयोग से हुआ। मार्गदर्शन अविनाश मोतीवाले का था।
चाचा और भतीजे की मज़ेदार कहानी: नाटक की कहानी एक चाचा और भतीजे विक्की की केंद्रीय भूमिकाओं पर आधारित हैं। विक्की के पिता इस दुनिया में नहीं है। वे अपनी वसीयत विक्की के चाचा को दे गये हैं जिसके अनुसार चाचा तय कर सकते हैं कि विक्की को संपत्ति में से कितना हिस्सा दिया जाये। चाचा बिज़नेस के सिलसिले में अक्सर फॉरेन टूर पर रहते हैं। वे विक्की को हर महीने 25 हज़ार रूपये देने की बात कहते हैं। वादा करते हैं कि शादी के बाद 50 हज़ार, पहली संतान होने पर 75 हज़ार और दूसरी संतान होने पर 1 लाख रूपया महीना जीवन यापन के लिये देंगे। विक्की अपने पैसे बढ़ाने के लिये चाचा को ख़त लिखकर कहता है कि उसने शादी कर ली है। इसी बीच विक्की का एक सदानंद अपनी पत्नी अंजू के साथ उसके घर पर रहने आ जाता है। उधर ख़त पढ़कर चाचा भी घर पर लौटने का फ़ैसला करते हैं। यह बात सुनकर विक्की का दोस्त सदानंद घर की नौकरानी पुष्पा को पत्नी बताने की सलाह देता है।घर पर अचानक लौटे जब चाचा: मगर इसी बीच चाचा आ जाते हैं। वे सदानंद की पत्नी अंजू को ही अपनी बहू समझ लेते हैं। अंजू कुछ कह नहीं पाती। मगर इस झूठ से परदा तब हटता है जब विक्की की प्रेमिका श्रद्धा घर पर आ जाती है। वह चाचा के सामने सारी सचाई बयान कर देती है। तब चाचा कहते हैं कि जैसे अंजू विक्की की पत्नी नहीं है, ऐसे ही घर की नौकरानी पुष्पा भी नौकरानी नहीं है। वह मेरी प्रेमिका है। उसे विक्की पर नज़र रखने के लिये ही घर में भेजा गया था। चूँकि भाई ने वादा लिया था कि जब तक विक्की की शादी ना हो, तब तक मैं भी शादी ना करूँ। इसके बाद चाचा विक्की को अंजू से शादी करने की मंज़ूरी दे देते हैं। खुद भी पुष्पा से शादी करने का फ़ैसला करते हैं। हनीमून मनाने के लिये दार्जिलिंग जाने के लिये कहते हैं ऑल दि बेस्ट। बढ़िया निर्देशन,प्रभावी अभिनय: सतीश श्रोती के निर्देशन में मंचित यह एक बेहतरीन नाटक रहा। राहुल प्रजापति ने विक्की और चाचा की भूमिका में नंदकिशोर बर्वे ने प्रभावी अभिनय किया। नाटक के बाकी कलाकारों ने भी अपने किरदार के अनुरूप भूमिका निभाई। इनमें संजीव दिघे, अभिजीत बडनेरे, रोशनी दीपके, शुभदा केकरे, रूपेश आपटे और सारिका आपटे थीं। प्रकाश योजना अभिजीत वडनेरे,ध्वनि संयोजन नितिन नानेरिया,वेश भूषा स्वाति श्रोती की रही।

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