इंदौर में लताजी की प्रथम पुण्यतिथि पर 27 अनसुने गीतों की ‘स्वरांजलि’

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ललित भाटी,इंदौर स्टूडियो। इंदौर में लता मंगेशकर की प्रथम पुण्यतिथि पर उनके 27 अनसुने और विरल गीतों की शाम सजी। ‘लता दीनानाथ ग्रामोफोन रिकॉर्ड संग्रहालय’ और ‘स्वरदा’ संस्था ने यह आयोजन संयुक्त रूप से किया। इसमें सपना भाटे केकरे ने लताजी के अनसुने-अनुपम गीतों को आवाज़ दी। सहयोगी गायकों ने साथ दिया। दुर्लभ गीतों की प्रस्तुति का साहस: आपको बता दें, सपना केकरे इंदौर की लता मंगेशकर कही जाती हैं। वे एक ऐसी सिंगर भी हैं जो लताजी के दुर्लभ और अनसुने गीतों को प्रस्तुत करने का साहस करती हैं। सपना दिल से गाती हैं और सुनने वालों का भरपूर समर्थन और प्यार पाती हैं। ‘स्वरदा’ उन्हीं की संगीत संस्था भी है। जबकि सुमन चौरसिया जी,  ‘लता दीनानाथ ग्रामोफ़ोन रिकॉर्ड संग्रहालय’ के संस्थापक हैं। इंदौर के करीब राऊ में उनका यह विशिष्ट संग्रहालय है। इसके रख-रखाव और निमार्ण के लिये उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है। उनके पास साढ़े सात हज़ार से ज़्यादा ग्रामोफ़ोन रिकार्ड्स का संग्रह है। 27 अनसुने और अनुपम गीतों की प्रस्तुति: ‘सृष्टि का दिव्य स्वर’ शीर्षक से स्वराजंलि का यह कार्यक्रम स्थानीय दुआ सभागृह में 6 फरवरी को आयोजित हुआ। इसमें भारत रत्न लता मंगेशकर के 27 अनसुने और अनुपम गीत प्रस्तुति के लिये चुने गये थे। मुख्य तौर पर सपना केकरे ने ही इन गीतों को प्रस्तुत किया। कुछ गीतों में उनके साथ संजय मंडलोई, सुमित्रा जोशी, किरण सांखला और मोना ठाकुर ने भी स्वर दिया। सभी ने लता जी के गीतों में बखूबी साथ निभाया।अजातशत्रु ने की गीतों की रसपूर्ण समीक्षा:  हर गीत की प्रख्यात संगीत समीक्षक,गीतकार और लेखक अजातशत्रु ने समीक्षा की। उससे जुड़े संस्मरणों को सुनाया। गीतों की रसपूर्ण समीक्षा में वे हमेशा की तरह भाव विभोर हुए। सुनने वालों को गीत की विशेषताओं से अवगत कराया। एक तरह से वे उस गीत की नेपथ्य यात्रा पर ले गये। अपने शब्दों से गीतों को एक नया अर्थ संसार भी दिया। संजय मंडलोई के सुरों में स्व.मुकेश का स्वर: संजय मंडलोई ने स्वर्गीय मुकेश की आवाज ख़ूबसूरत ढंग से निभाया। अपने स्वर के आरोह-अवरोह में स्व. मुकेश की याद ताज़ा कर दी।  सुमित्रा जी की शहद घुली, कर्णप्रिय आवाज़ को, श्रोताओं का भरपूर प्रतिसाद मिला। उनकी उम्दा गायकी ने दर्शाया कि अब उन्हें मंच संचालन छोड़कर, गायकी में ही अपना स्थान बनाने का प्रयास करना चाहिए। किरण सांखला ने सहगान में स्वर देने की जिम्मेदारी को बड़ी ज़िम्मेदारी से निभाया। वहीं इंदौर में आज की एक व्यस्त सूत्रधार, मोना ठाकुर ने भी समवेत गान में बखूब साथ दिया। कार्यक्रमों के संचालन में उनका भाषा कौशल दिलचस्प होता है, उन्होंने अपने शब्दों के खज़ाने को बड़ा सम्मोहक और समृद्ध बना दिया है। उनके शब्द उच्चारण का भी कहना ही क्या!साज़ों ने बाँधा दिलकश समां: संगत कलाकारों में रवि सालके, विजय राठौर, कपिल राठौर को दर्शकों की खूब दाद मिली। राजा साउंड सिस्टम के धन्नू भैया ने भी ध्वनि प्रबंधन में कोई कमी नहीं रखी। इस आयोजन के लिये लताजी के रेकार्ड्स के संग्रहकर्ता सुमन चौरसिया के सरल, सहज व्यक्तित्व की भी जितनी तारीफ़ की जाये कम है। उनके व्यक्तित्व और व्यवहार का अपनापन प्रभावित करता है।याद आता रहेगा गीत-संगीत का यह आयोजन: लता जी की पहली पुण्यतिथि पर यह ऐसा कार्यक्रम रहा जिसकी याद श्रोताओं में बनी रहेगी। कार्यक्रम में पुस्तक प्रेमी के रूप में ख्यात,पुणे के हर्षवर्धन लाड़ और महिदपुर के सक्रिय पत्रकार जवाहर डोसी की मौजूदगी दिलचस्प रही। सुनने वालों में राष्ट्र कवि पंडित सत्यनारायण सत्तन और उनके साथी खुरासान पठान भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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