इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। प्रो. सतीश मेहता इन्दौर में रंगमंच की नई लहर के प्रतिनिधि निर्देशक थे । यह बात शहर के वरिष्ठ रंग निर्देशक और सिने-टीवी अभिनेता सुशील जौहरी ने कही। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा, ‘ 70 के दशक में सतीश मेहता सर के पास प्रतिभावान युवा कलाकारों की टीम थी। उस दौर में प्रोफेसर सतीश मेहता रंगकर्म का एक नया मुहावरा लिख रहे थे। बाद में वे भोपाल में रंगकर्म के क्षेत्र में अपना योगदान देते रहे। परन्तु इंदौर में उनकी प्रेरक भूमिका की वजह से रंगमंच की बहुत सी संस्थायें वजूद में आईं। कई बेहतरीन कलाकारों का जन्म हुआ।’
सुशील जौहरी ने बताया, 1976 में जब मेरे मन में रंगकर्म को जानने-समझने की इच्छा बलवती हुई तब इंदौर में प्रोफेसर मेहता साहब की नाट्य संस्था ‘प्रयोग’ नाट्य कर्म में उल्लेखनीय कार्य कर रही थी।मैं सौभाग्यशाली था कि मेहता साहब ने मुझे अपनी टीम में सम्मिलित कर रंगकर्म की बारहखड़ी सीखने का अवसर प्रदान किया। उस दौर में रंगकर्म को प्रचलित ड्राइंग रुम वाले बाक्स थियेटर से बाहर निकालने के कई प्रयोग देश भर में हो रहे थे। जैसे,न्युट्रल प्रोसिनियम मंच पर नाट्य मंचन या रंग दर्शकों के बीच ,किसी हाॅल में बिना किसी मंच और सेट के नाट्य प्रदर्शन या बगीचों के मुक्ताकाशी मैदानों में प्रेक्षक वृन्द के मध्य नाटक की प्रस्तुति या सड़कों पर नुक्कड नाटकों के स्वरूप में नाटिकाओं के प्रदर्शन।
तब इन्दौर में रंगमंच की इस नई लहर के प्रतिनिधि निर्देशक प्रोफेसर सतीश मेहता जी थे । यह उनकी कुशल संगठन क्षमता का परिणाम ही था कि उनके पास नई पीढ़ी के प्रतिभावान अभिनेताओं की एक सुगठित , बड़ी ,और प्रतिबद्ध टीम कार्यरत थी जो अपने प्रयोगधर्मी निर्देशक सतीश जी के कुशल नेतृत्व में , नगर में नये रंगकर्म को स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण कार्य कर रही थी। सत्तर के दशक में इन्दौर के हिंदी रंगमंच पर नव नाट्य कर्म की स्थापना एवं उसके प्रचार-प्रसार हेतु प्रोफेसर सतीश मेहता जी को हमेशा याद रखा जाएगा। मैं उस दौर के अपने सभी रंगस्नेही कलाकारों और प्रेक्षकों की ओर से मेरे आदरणीय गुरुदेव स्वर्गीय सतीश मेहता जी की प्रेरणादाई स्मृतियों को प्रणाम करता हूं। उनके प्रति इंदौर और भोपाल के रंगमंच कलाकारों की तरफ से अपनी विनम्र श्रद्धाजंलि व्यक्त करता हूं।

