कला प्रतिनिधि,इंदौर स्टुडियो। रंगकर्म की समर्पित लेखिका,अभिनेत्री विभा रानी ने हाल ही में इंदौर के अनंत थियेटर में एक लोक-कथाकार (खिस्सा कहे खिसनी) का रूप धरा और मिथिला में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति ‘साध रोए के’ दी। टेरेस थियेटर के अंतरंग माहौल में उनका यह रूप दर्शकों को भा गया। उनका भावपूर्ण अभिनय एक यादगार अनुभव बन गया। वे अपनी इस प्रस्तुति के लिये मुंबई से यहां पहुँची थीं। बता दें कि मंच पर विभा जी की इस प्रस्तुति के ऑनलाइन शोज़ होते रहे हैं परंतु लॉकडाउन के बाद इंदौर में दर्शकों के समक्ष उनका यह पहला शो था।’
दर्शकों से बतकही के साथ अभिनय :
ढफली की थाप के साथ उन्होंने यह अनूठी प्रस्तुति दी। दर्शकों से बातें करते हुए अपनी मिथिला कथा सुनाई, उसे मंच पर अभिनीत किया। यह कथा दो सखियों फूल और पान की कहानी है। राजा की बेटी का नाम फूल है और महंत की बेटी का नाम पान है। इस लोक कथा में राजकुमारी फूल रोना चाहती है क्योंकि उसने अपने जीवन में कोई दु:ख नहीं देखा है। जबकि उसकी सहेली पान, जिसने अपने सभी सात बच्चों को खो दिया था, फूल को अपने ही बच्चों को मारने के लिए कई तरीके सुझाती है और इस तरह उसकी रोने की इच्छा पूरी करती है। आपको बता दें, खिसा कहे खिसनी, मिथिला की लोककथाओं की एक पारंपरिक शैली है। ‘साध रोये के’ (रोने का शौक-द डिज़ायर) मिथिला की लोक कथाओं के प्रदर्शन में से एक है।
दर्शकों ने की प्रस्तुति की प्रशंसा :
विभा जी की प्रस्तुति को देखने के लिये शहर के कई प्रतिष्ठित लेखक,पत्रकार,समाजसेवी पहुँचे। उन्होंने इस विदूषी लेखिका और रंगमंच अभिनेत्री के अभिनय की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। दर्शकों में प्रकाश हिन्दुस्तानी, सुश्री मीना राणा शाह, रवींद्र व्यास,सतीश श्रोत्री, अजय लागू, राकेश अष्ठाना सुलभा लागू,भवानी कौल, मुस्कान अष्ठाना,सुरेश उपाध्याय आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। प्रारंभ में विभाजी का पुष्प गुच्छ देकर श्रीमती सुषमा श्रोत्रिय ने स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन गौतम मालवीय ने किया। प्रकाश योजना प्रगल्भ श्रोत्रिय और मंच व्यवस्था अरविंद पोरवाल और धनवंत्री द्विवेदी की रही।
(अपनी प्रस्तुति से पहले विभा जी ने इंदौर के ख्यात लेखक और मालवी कवि श्री अनंत श्रोत्रिय से आर्शीवाद लिया)
रंगकर्म की सशक्त हस्ताक्षर :
विभा रानी एक पेशेवर अभिनेता, लोक कथाकार, लोक गायिका और रचनात्मक लेखिका हैं। उन्हें 25 साल का थिएटर और अभिनय का अनुभव है जिसमें उन्होंने 11 नाटक किए हैं और 20 से अधिक नाटक लिखे हैं। विभा ने लाल कप्तान, अनवांटेड, मानसून फुटबॉल, वाईआरएफ, एसके मीडिया के सीरियल और वेब सीरीज महारानी फिल्मों में काम किया है। साध रोए के प्रस्तुति पर चर्चा के दौरान विभा जी ने बताया कि वे अपनी रंग यात्रा और नाट्य लेखन पर भी एक पुस्तक लिख रही हैं। आशा है कि वह अगले साल तक पूरी हो जायेगी। उन्होंने कहा, उन्होंने जितने नाटक लिखे हैं, उसका संदर्भ तो होगा ही इसके अलावा उनकी रंगमंच यात्रा से जुड़ी कई अन्य महत्वपूर्ण बातें भी उस किताब का हिस्सा बनेंगी।
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