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शकील अख़्तर, इंदौर स्टू़डियो के संस्थापक संपादक हैं। वे भारत के सीनियर कल्चरल जर्नलिस्ट, क्रियेटर और क्यूरेटर हैं। थियेटर जर्नलिज़्म में वे अपनी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आप indorestudio.com के माध्यम से देश और विदेश के भारतीय कलाकारों और कला संस्थाओं के बीच अपने लेखन से, डिजिटल ब्रिजिंग का काम कर रहे हैं। बीते पैंतीस सालों से लगातार कलाकारों और कला गतिविधियों पर लिखते रहे हैं।
इंदौर स्टूडियो पर ही उनके द्वारा संपादित कोई डेढ़ हज़ार से ज़्यादा लेख हैं। उनमें से सैकड़ों रिपोर्ट्स उनके समीक्षित नाटकों या कला से जुड़े महोत्सवों और दूसरे प्रमुख कार्यक्रमों की है। रिपोर्ट्स के साथ ही उन्होंने 500 से अधिक वीडियो स्टोरीज़ का निर्माण और संपादन भी किया है। वे बिना किसी आर्थिक सहायता इस वेबसाइट को संचालित कर रहे हैं। आप भारत के अग्रणी न्यूज़ चैनल इंडिया टीवी के सीनियर एडिटर रहे। नईदुनिया, दैनिक भास्कर, फ्री प्रेस, चौथा संसार, नव प्रभात जैसे समाचार पत्रों में विभिन्न पदों पर सेवाएं दीं। जहां पर भी वे रहे, उनकी रिपोर्ट्स, ख़ास तरह का लेखन और कार्यक्रम की वजह से उन्हें हमेशा अलग पहचान मिली। उन्होंने प्रिंट मीडिया के साथ ही ऑडियो और विज़ुअल से जुड़े कई तरह के कार्यक्रमों के लिये स्क्रिप्ट्स लिखीं। वे जाने-पहचाने चिल्ड्रन ड्रामा राइटर भी हैं।
अब तक आठ नाटकों का लेखन कर चुके हैं। इनके नाम हैं- ब्लू व्हेल: एक ख़तरनाक खेल, मोनिया दि ग्रेट, हैलो शेक्सपियर, जंगल सिटी, दुर्गा भाभी: अंडरकवर पोस्ट, जयहिंद सुभाष और ये फिल्म है ज़रा हटके। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, दिल्ली से लेकर दूसरे शहरों में इन नाटकों के शोज़ हुए हैं। हाल ही में एआई और एजुकेशन को लेकर उन्होंने एक चिल्ड्रन प्ले – ‘रोबो टीचर: माई फ्रेंड‘ लिखा है। इसका पहला शो इंदौर के उत्कृष्ट बाल विनय मंदिर स्कूल के बच्चों ने किया है।
प्रख्यात शायर डॉ.राहत इंदौरी प्रेरित, उनका कविता संग्रह ‘दिल ही तो है’ ‘मुंबई मिरर’ ने प्रकाशित किया है। उनकी किताबें Amazon / Rekhta / Flipkart / anootha.com पर उपलब्ध हैं। शकील अख़्तर के कई गीत संगीतबद्ध भी हुए हैं। आप रंगमंच के साथ ही आकाशवाणी के ‘बी ग्रेड’ आर्टिस्ट रहे। इंदौर और ग्वालियर आकाशवाणी से प्रसारित पचास से अधिक नाटकों, धारावाहिकों और कार्यक्रमों के लिये आवाज़ दी। एक अभिनेता के रूप में कई नाटकों में काम किया। उनके अभिनीत नाटकों के कुछ प्रमुख नाम हैं- आषाढ़ का एक दिन, जो राम रचि राखा, बाँझ रात, सड़क गूँगी है, वुड बी जेंटलमैन, आख़िरी सवाल, बलदेव खटिक, थैंक यू मिस्टर ग्लाड, इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर, जाति ही पूछो साधु की। आपने कुछ लघु फिल्मों, टेलिविज़न के नाट्य रूपांतरणों और फिल्मों में अभिनय किया है। एक ऐसी ही फ़िल्म तेरह दिंसबर यू ट्यूब पर देखी जा सकती है। शकील अख़्तर इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया, बेंगलुरू इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल और जागरण फिल्म फेस्टिवल की प्रिव्यू कमेटी और जूरी में रहे हैं। आपको पत्रकारिता और रचनात्मक लेखन के लिये विभिन्न प्रशस्तियों और पुरस्कारों से नवाज़ा गया है।
रंगमंच से जुड़ी कला समीक्षाओं के लिये आपको अभिनव रंगमंडल द्वारा ‘राष्ट्रीय कला समीक्षक दो हज़ार पच्चीस’ का सम्मान प्रदान किया गया है। पत्रकारिता की खामियों और इसमें समय के अनुरूप बदलावों के उद्देश्य से आप स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश से जुड़े हुए हैं, इसके उपाध्यक्ष हैं। आपने पिछले साल स्टेट प्रेस क्लब के पहले एआई और मीडिया से जुड़े पत्रकारिता महोत्सव को डिज़ाइन करने में अपनी महति भूमिका निभाई। साथ ही प्रख्यात वाइस ओवर आर्टिस्ट हरीश भिमानी के साथ ‘वाइस एज़ ए करियर’ वर्कशॉप का संचालन किया। इस कोर्स को बनाने में भी आपने भूमिका अदा की। लेखन और कला के क्षेत्र से जुड़े कई अहम पड़ावों से गुज़रे शकील अख़्तर कहते हैं, मैं अभी भी सीख रहा हूं, ताकि मैं और भी बेहतर कर सकूँ’। शकील अख़्तर के बारे में आप उनकी “डिजिटल फ्लिप बुक” के इस लिंक पर क्लिक कीजिये और जानिये कि उनके बारे में, देश और दुनिया के जाने-पहचाने लेखकों, कलाकारों और आर्ट क्रिटिक ने क्या कहा है। उनके ई मेल का पता है- mshakeelakhter@gmail.com और indorestudio@gmail.com

