शकील अख़्तर,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। ‘हारूस-मारूस नाटक चूहों के माध्यम से इंसानों की कहानी है। नाटक बताता है कि इंसान चूहों से भी गये गुज़रे हैं। इसके ज़रिये हम इंसानी हक़ीक़त का पर्दाफाश करते हैं।‘ यह बात हारूस-मारूस की निर्देशिका रसिका अगाशे ने कही। भारत रंग महोत्सव में नाटक के प्रदर्शन के बाद वे इंदौर स्टुडियो से चर्चा कर रही थीं।देखिये बातचीत का वीडियो। नाटक बीइंग एसोसिएशन, मुंबई की प्रस्तुति है, जिसका राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के बीसवें भारत रंग महोत्सव के तहत दिल्ली के एलटीजी ऑडिटोरियम में प्रदर्शन हुआ था।
दिल्ली में दूसरी बार शो : रसिका ने कहा, इस नाटक के हम जबलपुर,चंडीगढ़,अमृतसर,मुंबई में प्रदर्शन कर चुके हैं, दिल्ली में हम दूसरी बार आए हैं लेकिन भारत रंग महोत्सव में मंचन का अलग ही मज़ा है। मुझे खुशी है कि यहां पर लोगों ने इस नाटक को बेहद पसंद किया। उन्होंने बताया, ‘असल में हारूस-मारूस संहिता मंच,मुंबई का एक विजेता नाटक है। हर साल हम नए लेखकों से उनके नाटक इस प्रतिस्पर्धा के लिये मंगवाते हैं। एक विशेषज्ञ समिति उन नाटकों में से बेस्ट स्क्रिप्ट का चयन करती है। यह नाटक इसी तरह से मेरे हाथ लगा। नाटक को इंदौर के लेखक मुकेश नेमा ने लिखा है। उनके साथ काम कर वे बेहद खुश हैं।‘
नये लेखकों से जुड़ना ज़रूरी : रसिका ने कहा, नए लेखकों से मिलना,उनसे जुड़ना एक अलग ही अनुभव होता है। नये लेखकों के काम पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है। आज क्या लिखा जा रहा है और निर्देशक इसके ज़रिये क्या कहना चाहते है, यह दोनों ही बातों के लिये लेखक-निर्देशक के बीच संवाद का होना बेहद ज़रूरी है। मेरी कोशिश यह भी होती है कि मेरा पोलिटिकल स्टैंड भी क्लिअर रहे। मैं स्क्रिप्ट भी पॉलिटिकली करेक्ट ढूंढती हूं। ताकि मैं अपनी बात को सही तरीके से कह सकूं। नाटक में आमोद भट्ट का संगीत है। रसिका ने कहा, संगीत इस नाटक की जान है। हमें खुशी है कि आमोद जैसे वरिष्ठ संगीतकार हमारे इस नाटक के साथ जुड़े हैं। नाटक में सब मिलाकर करीब बीस कलाकार हैं। हमारी कोशिश है कि हम हिंदुस्तान भर में इस नाटक के प्रदर्शन कर सकें।

