कलाओं और संस्कृति के शहर भोपाल के पहले अंतर्राष्ट्रीय साहित्य और कला महोत्सव का आगाज़ आगामी 4 से 10 नवंबर 2019 तक होने जा रहा है। रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय की पहल पर टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केंद्र और वनमाली सृजन पीठ सहित आइसेक्ट समूह के विश्वविद्यालयों के संयोजन में ‘विश्व रंग’ की आहट पिछले दो महीनों से जारी है। टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव के रूप में देश और दुनिया में अपनी तरह का यह अनूठा समागम किसी भी विश्वविद्यालय की पहल पर होने वाला संभवतः पहला समारोह है जिसमें हिन्दी सहित देश की प्रमुख भाषाओं के साहित्य और कलाओं का समावेश होगा।
भोपाल के मिंटो हॉल, भारत भवन और रवीन्द्र भवन में लगभग 60 सत्रों में होने वाले इस आयोजन में पाँच सौ से भी अधिक रचनाकार, कलाकार शामिल होंगे। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, चीन, जर्मनी, न्यूजीलैंड, बांग्लादेश, श्रीलंका, बर्मा, नेपाल सहित कई देशों के विश्वविद्यालयों में हिन्दी भाषी व्याख्याता, रचनाकार, प्रवासी भारतीय साहित्यकार, नोबल-ज्ञानपीठ-साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ और युवा रचनाकार इस आयोजन का हिस्सा होंगे। इसके साथ ही विश्व कविता, सिनेमा, चित्रकला, लोक कला व साहित्य, थर्ड जेंडर के कवियों का कविता पाठ सहित कुल 60 सत्रों में यह आयोजन होगा। आरंभ, मध्य और समाहार के रूप में 4 नवंबर को विश्वरंग कला उत्सव, 7 नवंबर विश्वरंग साहित्य उत्सव और 10 नवंबर को अलंकरण और वनमाली कथा सम्मान के आयोजन ‘विश्वरंग’ की विराट परिकल्पना को समेटे हुए हैं।
4 नवंबर को रवीन्द्र भवन में मध्य प्रदेश के माननीय राज्यपाल श्री लालजी टंडन, रंगकर्मी और कला विदुषी उषा गांगुली, टैगोर अंतर्राष्ट्रीय कला व साहित्य महोत्सव के निदेशक संतोष चौबे, समारोह के सह-निदेशक सिद्धार्थ चतुर्वेदी एवं लीलाधर मंडलोई और कथादेश के संपादक मुकेश वर्मा ‘विश्वरंग’ का शुभारंभ करेंगे। ‘टैगोर की विरासत का पुनरावलोकन’ नाम से आरंभ का यह तीन दिनी आयोजन 4-6 नवंबर तक भारत भवन और रवीन्द्र भवन परिसर में होगा जहाँ सुबह और शाम के सत्रों में क्रमशः विचार और कला आयोजन होंगे। 7 नवंबर को मिंटो हॉल के परिसर में विश्वरंग साहित्य समारोह का शुभारंभ होगा। विभिन्न भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों की उपस्थिति में होने वाले इस समारोह में हिन्दी कहानी के दस्तावेज़ी संग्रह ‘कथादेश’ का लोकार्पण, रवीन्द्र कैटलॉग तथा विश्व रंग कैटलॉग का विमोचन किया जाएगा। इस अवसर पर ख्यात सुंदरीवादक भीमन्ना जादव एवं समूह का सुंदरीवादन, आर्मी बैंड का वृंद संगीत तथा ध्रुपद गायक गुंदेचा बंधुओं द्वारा स्वस्तिगान की प्रस्तुति होगी।
इसके साथ ही अगले तीन दिनों तक अंतर्राष्ट्रीय मुशायरा, विश्व कविता, युवा कविता, सोशल मीडिया, प्रवासी भारतीय रचनाकार, लोक कला, सिनेमा, लेखक से मिलिये, संगीत, बैंड सहित लगभग 60 सत्रों के आयोजनों का सिलसिला शुरू होगा। सिनेमा से इरशाद कामिल, आशुतोष राणा, स्वानन्द किरकिरे, ज्योति कपूर, राजेन्द्र गुप्ता; वसीम बरेलवी, शीन काफ निज़ाम, राहत इंदौरी, राजेश रेड्डी जैसे नामचीन शायर; डॉ धनंजय वर्मा, चित्रा मुद्गल, ममता कालिया, पुरुषोत्तम अग्रवाल, नरेश सक्सेना, रमेशचन्द्र शाह आदि साहित्यकार; दुनिया के विश्वविद्यालयों के व्याख्याता आदि से मिलने-बतियाने-सुनने का यह अवसर होगा। 10 नवंबर को समाहार के रूप में अलंकरण और वनमाली कथा सम्मान में पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी और उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमति आनंदीबेन पटेल की विशेष उपस्थिति में चयनित रचनाकारों को वनमाली सम्मानों से विभूषित किया जाएगा। विश्वरंग की वेबसाइट www.tagorelitfest.com पर रजिस्ट्रेशन के बाद समारोह में नि:शुल्क प्रवेश की व्यवस्था रहेगी।

