शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। ‘सर, मैं परसों नहीं आ पाऊँगी। मेरे घरवालों ने दूसरे शहर में शो करने के लिये मना कर दिया है’। उज्जैन अभिनव रंग मंडल के सीनियर थियेटर डायरेक्टर शरद शर्मा को फोन पर जैसे ही यह सूचना मिली-वे सकते में आ गये! एक दिन बाद ही गुजरात के आणंद में ‘माउस ट्रैप’ का शो होना था। नाटक में मुख्य किरदार निभाने वाली महिला कलाकार ने अचानक आणंद जाने से इनकार कर दिया था।
बहरहाल शो तो हुआ, इसकी तस्वीरें आप यहां देख ही रहे हैं, मगर ये शो कैसे हुआ, यह वाकया दिलचस्प है – और यह बहुत से ड्रामा डायरेक्टर्स की रोज़ की कहानी भी। श्री शरद शर्मा ने बताया- ‘महिला कलाकार की फोन पर मिली सूचना से मैं कुछ परेशान हुआ। मैंने उन्हें कहा कि रिहर्सल के वक्त आपसे इस विषय में चर्चा हुई थी। आपको हमने बताया था कि हमें शो देने के लिये हमें दो-चार दिन के लिये बाहर जाना पड़ सकता है, आप इस विषय में घर पर ज़रूर बता दें। तब आपने अपनी सहमति भी दे दी थी लेकिन अब अचानक?
शरद जी ने बताया- ‘चूंकि मेरे पास समय कम था। इसलिये मैंने उस आर्टिस्ट के कहने पर उसके परिजनों से बात कर लेना ठीक समझा। यह सोचकर कि शायद वे स्थिति की गंभीरता को समझ सकेंगे। ऐसा हुआ भी, उस लड़की की बुआ ने सहमति दे दी। लगा कि चलो शो अच्छे से हो जायेगा। मगर कुछ ही देर में मुझे महसूस हुआ कि अगर यही स्थिति फिर से बन गई तो क्या करेंगे? इसके बाद मैंने हमारे नाटकों से जुड़ी रही एक सीनियर आर्टिस्ट कामना भट्ट से संपर्क किया। वो वड़ोदरा में रहती हैं। वो सिर्फ एक दिन में ही रोल तैयार करने को तैयार हो गईं।
चूँकि रोल लंबा था, ख़ासा याद करना था, उन्होंने उसका एक हल निकाला, उन्हें जितना याद हो सका, वो उन्होंने याद कर लिया और बाकी संवादों की एक फाइल बनाकर रख ली। शो से पहले उसने एक रिहर्सल की और फिर जो संवाद याद नहीं थे, उसका फाइल सपोर्ट और प्रॉम्पटिंग से काम बन गया। शो सफलता से पूरा हुआ और मेरी जान में जान आई। शो के बाद मैंने दर्शकों को बकायदा यह बात बताई। उनके लिये भी यह हैरानी की बात थी।
शरद जी ने कहा, यह पहला मौका नहीं था, जब मुझे इस तरह की चुनौती का सामना करना पड़ा था। मेरे 40 साल के थियेटर के सफर में ऐसा कमसेकम चार-पांच बार हो चुका है। हर बार मैं एक नई चुनौती और संकट से गुज़रा हूँ और स्थिति को मैनेज करना पड़ा है। उन्होंने याद करते हुए बताया – ‘कालीदास नाट्य समारोह में हमारी एक अभिनेत्री ने फीस की वजह से अचानक परफॉर्म करने से मना कर दिया था। नाटक का नाम था “मालविकाग्निमित्रम्”। इसमें वे रानी धारिणी का रोल कर रही थीं – सकंट विकट था और शो सिर पर। नाटक में मालविका की भूमिका में कामना भट्ट थीं। मैंने उन्हें रानी धारिणी के रोल और एक सहयोगी नृत्य कलाकार मुनमुन कुशवाहा को मालविका की भूमिका दे दी’।
उन्होंने कहा – ‘नाटक में मैं अग्निमित्र की भूमिका में था। मैंने मालविका के रोल की नई एक्टर मुनमुन से कहा कि मंच पर तुम्हारा मूवमेंट मेरी आँखों के इशारे पर चलेगा और संवाद पीछे से बोले जायेंगे। मंच के पीछे से संवाद बोलने का काम कामना भट्ट को ही दे दिया। इस तरह दोनों महिला किरदारों की भूमिकाओं का नाटक में संतुलन बैठ गया। यह बात वर्ष 1999 की है। चूँकि कालिदास समारोह में मंच दर्शकों से काफी दूर होता है, इसलिये नाटक देखने वालों पर इस बात का कोई विशेष असर नहीं पड़ सका और नाटक सफलता से मंचित हो गया।
एक और घटना का ज़िक्र करते हुए श्री शर्मा ने कहा, एक बार रिहर्सल में नशा करने वाले 2 अभिनेताओं को मैंने अनुशासन तोड़ने की वजह से दो दिन पहले ही हटा दिया। उनकी जगह पर गिरिजेश व्यास और कैलाश चौहान जैसे दो कलाकारों को भूमिकाएं सौंप दी थी। यह श्रीनरेश मेहता जी का लिखा पौराणिक गीति नाट्य ‘संशय की एक रात’ था। यह नाटक श्रीनरेश जी को ज्ञानपीठ (1992 ) अवॉर्ड दिये जाने के अवसर पर दिल्ली के फिक्की ऑडिटोरियम में होना था’।
उन्होंने कहा- ‘यह एक बेहद महत्वपूर्ण शो था, इसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के अलावा सर्वश्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, बसंत साठे, सीताराम केसरी, जवाहर सरकार और अशोक वाजपेयी जैसी हस्तियां आईं थीं। दो दिन पहले लिया गया मेरा निर्णय कठिन था – लेकिन नये अभिनेताओं ने अच्छी तरह से अपनी भूमिकाएं निभाईं और शो सफलता से संपन्न हुआ। अपेक्षित सराहना भी मिली’। File: नरसिम्हा राव से पुरस्कार लेते श्रीनरेश मेहता।
शरद जी ने बताया- ‘एक बार हमारे एक और नाटक ‘संभ्रांत वेश्या’ (respected prostitute) में शो से एक दिन पहले सीनेटर का रोल करने वाले एक एक्टर का एक्सीडेंट हो गया, तब अचानक बदली परिस्थिति को देखते हुए मुझे ही सीनेटर का रोल करना पड़ा था’। यह घटनाएं बताती हैं कि लंबी रिहर्सल के बाद एक शो तैयार हो जाता है, लेकिन कभी-कभी तब भी चुनौतियां बनी ही रहती हैं। अनहोनी के बारे में तो कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन बहुत बार एक्टर अचानक मिले किसी वेब सिरीज़-फिल्म आदि के प्रस्ताव की वजह से भी शो को संकट में डाल देते हैं। इसका असर सिर्फ डायरेक्टर पर ही नहीं पूरी टीम पर पड़ता है। आगे पढ़िये -क्या है प्रसन्ना के थियेटर एक्टिंग में सफलता के सूत्र? https://indorestudio.com/prasanna-ke-theatre-sutra/











