प्रकाश साहू, इंदौर स्टूडियो। जबलपुर आर्ट, लिटरेचर एवं म्यूजिक फेस्टिवल (जलम) 2025 की चौथी और आख़िरी शाम- सुवर्णा तिवारी के संगीत के नाम रही। उन्होंने अपने बैंड के साथ एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत किये। कार्यक्रम का शीर्षक था -“अनहर्ड दरबार गायकी”। उनकी प्रस्तुतियों के साथ ही जलम के दसवें संस्करण का समापन हो गया।
कला ऊर्जा से भरपूर वातावरण: 25 दिसंबर से प्रारंभ हुए इस चार दिवसीय उत्सव में कलाओं के विविध रुपों के प्रदर्शन के साथ उनपर संवाद हुआ। चारों दिन मुख्य कार्यक्रम स्थल ‘तरंग प्रेक्षा गृह’, रामपुर में ख़ासी रौनक रही। विभिन्न कला-रूपों के जाने-पहचाने कलाकारों और समीक्षकों का आना-जाना लगा रहा। कला ऊर्जा से भरपूर वातावरण बना रहा, जिसने इस सांस्कृतिक आयोजन को एक सार्थक दिशा दी। जलम के दसवें अध्याय का हिस्सा शासकीय माता शबरी नवीन कन्या महाविद्यालय की छात्राएं भी बनीं।
टैगोर का लगाया गया पोस्टर: उत्सव के चौथे और अंतिम दिन संगीत के साथ ही कविता, सिनेमा और वास्तुकला से संबंधित महत्वपूर्ण कार्यक्रम हुए। रविंद्र नाथ टैगोर के एक बड़े पोस्टर को परिसर में लगाया गया।
मंदिर कला और स्थापत्य पर संवाद: दोपहर सत्र में भारतीय मंदिर कला और स्थापत्य पर केंद्रित संवाद “Temple Art and Architecture in India” आयोजित हुआ। इस सत्र का संचालन इत्यादि आर्ट फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. हिमांशु श्रीवास्तव ने किया।
डॉ. शिवकांत बाजपेयी ने दिया वक्तव्य: वक्ता के रूप में प्रख्यात पुरातत्वविद् डॉ. शिवकांत बाजपेयी (सुप्रिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) और पुरातत्त्ववेत्ता शिवम दुबे उपस्थित रहे। संवाद में भारतीय मंदिर स्थापत्य की ऐतिहासिक संरचना, शिल्प परंपरा और उससे जुड़े मिथकों पर शोधपरक दृष्टि प्रस्तुत की गई।
कविता संग्रह विमोचन और कवि संवाद: जबलपुर के वरिष्ठ रंगकर्मी एवं कवि, तथा समागम रंग मंडल के संस्थापक आशीष पाठक के कविता संग्रह “अन्वेषण” का विमोचन किया गया। इसके बाद आयोजित कविता पाठ एवं संवाद सत्र में दिल्ली की कवयित्री शोभा अक्षर, भोपाल की श्रुति कुशवाहा और जबलपुर के आशीष पाठक ने कविताओं का पाठ किया।
रचनात्मक प्रक्रिया और लेखन पर चर्चा: इस सत्र की विशेषता यह रही कि कविता-पाठ के साथ कवियों ने अपनी रचनात्मक प्रक्रिया, लेखन की प्रेरणा और कविता के सामाजिक संदर्भों पर भी विस्तार से संवाद किया। कविताओं में समकालीन समाज, स्त्री विमर्श, प्रतिरोध, स्मृति, आत्म संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं की गहरी अभिव्यक्ति देखने को मिली। सत्र का संचालन बाबुषा कोहली ने किया।
समकालीन समय में फिल्म की भूमिका: सिनेमा पर केंद्रित संवाद सत्र “Cinema: The Ultimate Creative Expression” में पुणे के फिल्मकार रवि शेखर ने सिनेमा की रचनात्मक प्रक्रिया, सामाजिक जिम्मेदारी और समकालीन समय में फिल्म की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने सिनेमा को समय का सजीव दस्तावेज़ बताते हुए कहा कि फ़िल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के अंतर्विरोधों और संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। दर्शकों के प्रश्नों के माध्यम से उन्होंने फ़िल्म निर्माण की नैतिक जिम्मेदारियों और स्वतंत्र सृजन की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।
सम्मान और धन्यवाद समारोह: शाम को धन्यवाद ज्ञापन के साथ ही प्रमाण-पत्र वितरण समारोह आयोजित हुआ। इसमें जलम 2025 को सफल बनाने वाले कलाकारों, स्वयं सेवकों और सहभागियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सुबोध निगम (डायरेक्टर, मध्य प्रदेश पावर जेनरेशन कंपनी), केंद्रीय क्रीड़ा एवं कला परिषद के महासचिव राजीव गुप्ता, डॉ. शिव कांत बाजपेयी, इत्यादि आर्ट फाउंडेशन के संस्थापक विनय अम्बर, सचिव डॉ. सुप्रिया अम्बर तथा अध्यक्ष डॉ. हिमांशु श्रीवास्तव की गरिमामय उपस्थिति रही।
सुवर्णा के गायन की प्रभावशाली प्रस्तुति: जलम 2025 की अंतिम प्रस्तुति के रूप में फिल्म फेयर पुरस्कार विजेता गायिका सुवर्णा तिवारी और उनके बैंड ने दरबार गायकी, सूफी और लोकप्रिय गीतों की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। दर्शकों ने उनकी सुमधुर प्रस्तुतियों का जमकर आनंद लिया। सुवर्णा तिवारी जबलपुर, मध्य प्रदेश की प्रतिभाशाली शास्त्रीय और पार्श्व गायिका हैं, जिन्होंने स्थानीय मंचों से अपनी यात्रा शुरू कर बॉलीवुड और वेब सीरीज तक अपनी पहचान बनाई। संजय लीला भंसाली की चर्चित सीरीज हीरामंडी: द डायमंड बाजार (2024) में उनके गाए ठुमरी मोसे करो ना को विशेष सराहना मिली, जिसने उनकी शास्त्रीय पकड़ और गहरे स्वर को उजागर किया। इसके अलावा वे बवाल, थप्पड़, बंदिश बैंडिट्स और कई अन्य फिल्मों व सीरीज के गीतों में अपनी आवाज़ दे चुकी हैं।
विचारशील और रचनात्मक आयोजन: चार दिनों तक चले इस महोत्सव ने जबलपुर को राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्र पर एक जीवंत, विचारशील और रचनात्मक केंद्र के रूप में पुनः स्थापित किया। आगे पढ़िये – संगमरमर की चट्टानों के बीच सौ से ज़्यादा कलाकारों ने की पेटिंग – https://indorestudio.com/jalam-bhedaghat-jabalpur-live-painting/











