कला प्रतिनिधि,इंदौर स्टूडियो। जंगली, ज़हरीले जानवर से भी ख़तरनाक इंसान है। जंगली जानवर के काटने से तो इंसान फिर भी बच सकता है, इंसानी हमले से नहीं। नाटक ‘तिरिछ’ का यही सार है। इसका हाल ही में सीधी में मंचन हुआ। यह नाटक असल में उदय प्रकाश की कहानी पर आधारित है। शारीरिक रंगमंच इस एकल प्रस्तुति की विशेषता रही।
प्रभावशाली निर्देशन और अभिनय: नाटक का निर्देशन युवा रंग निर्देशक शिव नारायण कुंदेर ने किया। इसमें मनोज कुमार यादव ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को झकझोर के रख दिया। संगीत संचालन प्रजीत साकेत का रहा। कहानी,अभिनय,संगीत और प्रकाश संयोजन ने नाटक को यादगार बना दिया।
जंगल में ‘तिरिछ’ का हमला: कहानी मुख्य पात्र के पिता की है जो पेशे से शिक्षक रहते हैं उन्हें जंगल में ‘तिरिछ’ काट लेता है। वह उसे तुरंत मार भी देते हैं। इस घटना के दूसरे दिन वे पेशी की वजह से कोर्ट जाने के लिये चल देते हैं।
प्रभावशाली निर्देशन और अभिनय: नाटक का निर्देशन युवा रंग निर्देशक शिव नारायण कुंदेर ने किया। इसमें मनोज कुमार यादव ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों को झकझोर के रख दिया। संगीत संचालन प्रजीत साकेत का रहा। कहानी,अभिनय,संगीत और प्रकाश संयोजन ने नाटक को यादगार बना दिया।
जंगल में ‘तिरिछ’ का हमला: कहानी मुख्य पात्र के पिता की है जो पेशे से शिक्षक रहते हैं उन्हें जंगल में ‘तिरिछ’ काट लेता है। वह उसे तुरंत मार भी देते हैं। इस घटना के दूसरे दिन वे पेशी की वजह से कोर्ट जाने के लिये चल देते हैं।
भ्रांतियां बना देती है रोगी: यात्रा में साथ जाने वाले यात्री ‘तिरिछ’ के बारे ऐसी बातें करने लगते हैं कि वे चिंता में पड़ जाते हैं। इस तनाव का ज़हर उनके अंदर ज़हर की तरह फ़ैलने लगता है और फिर भ्रामक प्रभावों से गला सूखने लगता है। बोलना रूक जाता है। अब लोग उन्हें चोर और पागल कहने लगते हैं। कुछ उनपर हमला कर देते थे। इस कदर घायल कर देते हैं कि उन्हें पहचान पाना तक मुश्किल हो जाता है और फिर चंद घंटों में उनकी मौत हो जाती है।
ज़हरीलों से बढ़कर ज़हरीला: इससे यह बात हो जाती है कि उनकी मृत्यु तिरिछ के काटने से नहीं बल्कि इंसानों की वजह से हुई है। इस तरह यह भी साबित हो जाता है कि ज़हरीले जानवरों से ज़्यादा इंसान ज़हरीला है। इसके काटे से कोई नहीं बच सकता।
प्रस्तुति में खो गये दर्शक: नाटक की प्रस्तुति के बाद अतिथि आरबी. सिंह ने कहा, इस उत्कृष्ट प्रस्तुति को देखते हुए हम सब कुछ पल के लिए खो गए। ऐसा लग रहा था कि वास्तव में ये घटना घट रही है। नाटक का निर्देशन बहुत ही अच्छा रहा। मैं इसके लिए भाई शिवा को बहुत बधाई देता हूं। साथ ही इन्द्रवती नाट्य समिति के नीरज कुंदेर व रोशनी प्रसाद मिश्र को साधुवाद देता हूं कि इन लोगों ने रंगमंच की दुनिया में सीधी को एक अलग पहचान दिलाने का काम किया है।
शिवा ने जताया आभार: अन्त में शिवा ने सभी अतिथियों एवं दर्शकों का आभार जताया। उक्त कार्यक्रम में बाबूलाल कुंदेर, मानिन्द शेर अली खान, सुनील चौधरी, प्रकाश प्रजापति, हसनलाल कुन्देर , नीरज कुंदेर, रोशनी प्रसाद मिश्र, रोशन अवधिया सहित कई सुधी दर्शक भी मौजूद थे। आगे पढ़िये –
https://indorestudio.com/indore-me-jab-mile-natak-ke-kalakar-sabne-sunaya-rangkarm-ka-hal/
ज़हरीलों से बढ़कर ज़हरीला: इससे यह बात हो जाती है कि उनकी मृत्यु तिरिछ के काटने से नहीं बल्कि इंसानों की वजह से हुई है। इस तरह यह भी साबित हो जाता है कि ज़हरीले जानवरों से ज़्यादा इंसान ज़हरीला है। इसके काटे से कोई नहीं बच सकता।
प्रस्तुति में खो गये दर्शक: नाटक की प्रस्तुति के बाद अतिथि आरबी. सिंह ने कहा, इस उत्कृष्ट प्रस्तुति को देखते हुए हम सब कुछ पल के लिए खो गए। ऐसा लग रहा था कि वास्तव में ये घटना घट रही है। नाटक का निर्देशन बहुत ही अच्छा रहा। मैं इसके लिए भाई शिवा को बहुत बधाई देता हूं। साथ ही इन्द्रवती नाट्य समिति के नीरज कुंदेर व रोशनी प्रसाद मिश्र को साधुवाद देता हूं कि इन लोगों ने रंगमंच की दुनिया में सीधी को एक अलग पहचान दिलाने का काम किया है।
शिवा ने जताया आभार: अन्त में शिवा ने सभी अतिथियों एवं दर्शकों का आभार जताया। उक्त कार्यक्रम में बाबूलाल कुंदेर, मानिन्द शेर अली खान, सुनील चौधरी, प्रकाश प्रजापति, हसनलाल कुन्देर , नीरज कुंदेर, रोशनी प्रसाद मिश्र, रोशन अवधिया सहित कई सुधी दर्शक भी मौजूद थे। आगे पढ़िये –https://indorestudio.com/indore-me-jab-mile-natak-ke-kalakar-sabne-sunaya-rangkarm-ka-hal/

