|
Getting your Trinity Audio player ready...
|
सिने डेस्क, इंदौर स्टूडियो। 54वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में आईसीएफटी-यूनेस्को गांधी मेडल के लिए इस बार 10 फिल्मों की बीच प्रतिस्पर्धा है। गोवा के फ़िल्म महोत्सव में इनकी स्क्रीनिंग जारी है। इस श्रेणी में महात्मा गांधी के आदर्शों को दर्शाने वाली फिल्में मुकाबला करती हैं। शॉर्टलिस्ट की गई ये सिनेमाई कृतियां आज के संघर्ष भरे हालात में शांति, सहिष्णुता, अहिंसा और करुणा के प्रति हमारी चेतना जगाती हैं। आइये जानते हैं इस साल महोत्सव में दिखाईं जा रहीं ऐसी ही 10 फ़िल्मों के बारे में।
1.मुयाद अलायन (फिलिस्तीन,ब्रिटेन, जर्मनी, नीदरलैंड, कतर, 2022) की फिल्म ‘ए हाउस इन यरूशलेम’
यह फिल्म यरूशलेम में परस्पर विरोधी संस्कृतियों और मान्यताओं की पृष्ठभूमि में मानव संबंधों की जटिलताओं की पड़ताल करती है। फिल्म शहर के ऐतिहासिक और राजनीतिक तनाव के बीच लोगों के संघर्षों और आकांक्षाओं पर आधारित है।
2. टिनातिन कजिशविली (जॉर्जिया, 2023) की फिल्म ‘सिटीज़न सेंट’
यह फिल्म जॉर्जिया में सामाजिक चुनौतियों के बीच नैतिकता को बचाने की कोशिश करते एक व्यक्ति के जीवन की कहानी है। इसमें व्यक्तिगत बलिदान और धार्मिकता की खोज का मार्मिक चित्रण किया गया है।
3. एंथनी चेन (यूके, फ्रांस, ग्रीस, 2023) की फिल्म ‘ड्रिफ्ट’
यह फिल्म विभिन्न देशों में जीवन को जोड़ने वाली कथा है जो पहचान, अपनेपन और लोगों से लोगों के जुड़ाव की तलाश के बारे में है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे अनिश्चितताओं के बीच आप किसी से अप्रत्याशित रूप से जुड़ सकते हैं।
4.एपोलिन ट्राओरे (फ्रांस,जर्मनी, सेनेगल, 2023) की फिल्म “इट्स सिरा”
एक बहु-सांस्कृतिक नज़रिए से, यह फिल्म सहनशीलता की एक कहानी है जो भौगोलिक और सांस्कृतिक सीमाओं से परे साझे मानव अनुभवों को रेखांकित करती है।
5. ओवे मस्टिंग (एस्टोनिया, 2022) की फिल्म ‘कालेव’
एस्टोनिया की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म देश के सांस्कृतिक सार में डूबी एक जटिल कहानी है। इस फिल्म में राष्ट्रीय इतिहास के साथ जुड़ी व्यक्तिगत यात्राओं को दिखाया गया है, जो व्यक्तिगत और सामूहिक पहचान के अंतर्निहित ताने-बाने को दर्शाता है।
6.पॉल फौजान अगस्ता (इंडोनेशिया, 2022)की फिल्म ‘द प्राइज़’
इंडोनेशिया से आई यह फिल्म महत्वाकांक्षा की जटिलताओं और सफलता की खोज में गोता लगाती है। यह फिल्म उन नैतिक दुविधाओं की पड़ताल करती है जिनसे लोगों को पहचान बनाने और उपलब्धि की तलाश में सामना होता है।
7.जॉन टॉर्नब्लैड (स्वीडन, 2022) की फिल्म ‘द शुगर एक्सपेरिमेंट’
स्वीडन में बनी यह फिल्म सामाजिक मानदंडों और व्यक्तिगत विकल्पों पर प्रकाश डालती है। यह फिल्म इस बात की पड़ताल करती है कि सामाजिक संरचनाओं के साथ व्यक्तिगत प्रयोग स्थापित प्रतिमानों को कैसे चुनौती दे सकते हैं।
8.राकेश चतुर्वदी ओम (भारत, 2023) की फिल्म ‘मंडली’
भारत में बनी यह फिल्म दोस्ती, वफादारी और व्यक्तिगत विकास के हालात से परे जाने की कहानी है। इसमें रिश्तों की परिवर्तनकारी शक्ति और जीवन की वो यात्राएं शामिल हैं जो उत्प्रेरित करती हैं।
9. विष्णु शशि शंकर (भारत, 2022) की फिल्म ‘मलिकापुरम’
भारत में केरल के सांस्कृतिक परिवेश में बनी यह फिल्म सामाजिक अपेक्षाओं के बीच रिश्तों की पेचिदगियों को दर्शाती है। यह मानवीय रिश्तों के भावनात्मक पक्ष और उनके भीतर चलने वाले संघर्षों की कहानी है।
10. सायंतन घोशाल (भारत, 2023) की फिल्म ‘रबीन्द्र काब्य रहस्य’
बंगाल की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म रवींद्रनाथ टैगोर की कविता के सार को समाहित करती है, जो मानवीय भावनाओं और रिश्तों में निहित रहस्यों को उजागर करती है। ये बेहतरीन फिल्में एक बेहतर दुनिया को बनाने और मानवता के सार पर ज़ोर देती हैं। महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि स्वरूप गांधी पदक की स्थापना 1994 में आईसीएफटी पेरिस और यूनेस्को ने की है। यह पदक फिल्म महोत्सव में ऐसी फिल्म को दी जाती है जो महात्मा गांधी के विचारों सबसे अच्छी तरह से प्रतिबिंबित करती है। आगे पढ़िये –

