तस्वीरें और रिपोर्ट, निशिकांत मंडलोई, इंदौर स्टूडियो। मेले हमारी संस्कृति के प्रतीक और क्षेत्र विशेष की पहचान होते हैं। मेले ही हमारी बहुविध चेतना के संवाहक बने हुए हैं। इन्हीं विशेषताओं के साथ इंदौर के लालबाग परिसर में जनजातीय मेले का हाल ही में आयोजन हुआ। इसमें ग्रामीण जीवन और उनकी परंपराओं की अनूठी झलक दिखी जिसने आम इंदौरियों के दिलो-दिमाग पर अपनी गहरी छाप छोड़ी। मेले में आये लोगों ने न सिर्फ व्यंजनों का आनंद उठाया, जड़ी-बूटियों की जानकारियां भी प्राप्त की। स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों के व्याख्यान भी सुने। (मेले में ग्रामीण महिलाओं से चर्चा करते हुये इस रिपोर्ट के लेखक निशिकांत मंडलोई।)
फूड फेस्टिवल एवं जड़ी-बूटी मेला: इस मेले का संयोजन श्री नारायण मानव उत्थान समिति और भारतीय विपणन विकास केंद्र (सीबीएमडी) ने संस्कृति विभाग के सहयोग से किया। इसमें फूड फेस्टिवल और जड़ी-बूटी मेला लगाया गया। मेले में गुणकारी जड़ी-बूटियों और पौष्टिक व्यंजनों के साथ ही जनजातीय जीवन शैली को प्रदर्शित किया गया। मेले में ग्रामीणों द्वारा बनाई गई कलात्मक वस्तुएं भी प्रदर्शित की गईं।
जनजातीय परिवेश को दर्शाना मेले का उद्देश्य: जनजातीय मेला संयोजक पुष्पेंद्र चौहान और बलराम वर्मा ने बताया कि ग्रामीण जनजातीय परिवेश को दर्शाना ही इस मेले का मुख्य प्रयोजन था। मेले में फूड स्टॉल के क्षेत्र को बालिका साक्षी वहीडा ने मिट्टी और गोबर से लीपकर झोपड़ियां निर्मित की जिसमें दर्शक बैठकर जनजातीय व्यंजनों जैसे – टांडा के दाल-पानिए, ज्वार की रोटी, मक्का की रोटी, मटूरिया, देशी व पत्थर पर पिसी चटनी आदि का आनंद लेते रहे।
दुर्लभ जड़ी–बूटियों के स्टॉल: मेले में सुदूर अंचलों में पाई जाने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। यहां वैद्य मंदबुद्धि बच्चों, कैंसर रोग, जटिल वात रोग और बाल रोगों पर डाक्टरों द्वारा परामर्श देने के साथ उपचार और परामर्श भी देते रहे। मेले में लोगों ने ह्रदय रोग, स्त्री रोग, शिशु रोग और कुपोषण को लेकर विशेषज्ञों के व्याख्यान का लाभ भी उठाया।
गुमनाम नायकों की जानकारी: मेले में ऐसे स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे गुमनाम नायकों के नाम और चित्रों को भी प्रदर्शित किया गया जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में अंग्रेज़ों के खिलाफ़ अपनी भूमिका निभाई थी। यह जानकारी मानव उlत्थान समिति के रोशनी वर्मा और मेला संयोजक पुष्पेंद्र चौहान ने जुटाई। मेले में प्रतिदिन जनजातीय संस्कृति पर केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गये। जनजातीय आभूषण बनाने की विधि सिखाई गई। शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के तहत अखिल शर्मा और मलय वर्मा की शॉर्ट फिल्में प्रदर्शित की गईं।
इंदौर के जनजातीय मेले में दिखी पारंपरिक ग्रामीण जीवन की झलक
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