योगेंद्र मिश्र,इंदौर स्टूडियो। 3 अप्रैल 2022 को हिंदी रंगमंच दिवस की 154 वीं जयंती है। हिंदी भाषा में जो सबसे पहला नाटक खेल गया था, वह शीतला प्रसाद त्रिपाठी कृत ‘जानकी मंगल’ था। यह नाटक बनारस में 3 अप्रैल 1868 को मंचित हुआ था। जिसमे भारतेंदु हरिश्चन्द्र ने लक्ष्मण की भूमिका निभाई थी। हिंदी के नाटकों में हिंदी रंगमंच में जयशंकर प्रसाद, धर्मवीर भारती, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, शंकर शेष, भीष्म साहनी, मन्नू भंडारी, कमलेश्वर, असगर वजाहत जैसे नाम अपने नाटकों के चलते मशहूर हुए हैं। इन साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं में शहरी परिवेश और उनकी समस्याओं को खास स्थान दिया है। देश की आजादी के बाद इनके नाटक अपने दौर में बेहद लोकप्रिय हुए थे। आज भी इन नाटकों को उतनी ही स्वीकार्यता प्राप्त है। अंधायुग, आषाढ़ का एक दिन, महाभोज, जिस लाहौर नई वेख्या, कबीरा खड़ा बाजार में आदि नाटक समाज को उसके अतीत की झलकियाँ दिखाकर आईना दिखाने का काम करते रहे हैं। रंगकर्मियों और रंगरसिकों को हिन्दी रंगमंच दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। (अभिनट-रंग / चित्र : 1974 में स्व. इब्राहिम अल्काज़ी द्वारा पुराना किला, दिल्ली में मंचित नाटक ‘अंधा युग’)

