Saturday, May 9, 2026
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‘जश्न-ए-अज़हर’ 18 मार्च से, अरुण कुमार पांडेय का होगा सम्मान

शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। कोलकाता में लिटिल थेस्पियन की प्रमुख उमा झुनझुनवाला और उनका रंगमंडल एक बार फिर ‘जश्न-ए-अज़हर’ नाट्य समारोह के लिये तैयार है। समारोह में रंगकर्म के संस्थान विवेचना रंगमंडल, जबलपुर के प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय का सम्मान होगा। साथ में पाँच रंग हस्तियों का अभिनंदन भी। नाट्य समारोह में छह चर्चित नाटकों के मंचन होंगे और रंग संवाद के विशिष्ट आयोजन भी। नाटकों के मंचन के लिये कोलकाता में दिल्ली, जम्मू और जबलपुर के कलाकार भी पहुँच रहे हैं। (नाटक ‘दूजो कबीर’ का एक दृश्य। निर्देशक: संतोष राजपूत।)राष्ट्रीय नाट्य समारोह का 12 वाँ साल: लिटिल थेस्पियन का यह 12 वाँ राष्ट्रीय नाट्य समारोह है। भारत के संस्कृति मंत्रालय के आर्थिक सहयोग से यह आयोजन हो रहा है। छह दिवसीय यह समारोह 18 मार्च से 23 मार्च के बीच ज्ञान मंच, कोलकाता में होगा। कोलाब्रेशन नॉर्थ सेंट्रल ज़ोन कल्चरल सेंटर, प्रयागराज का है। जबकि वर्तमान पत्रिका के साथ एक्सिस बैंक सहयोगी की भूमिका निभा रहा है। समारोह में दिल्ली, जम्मू, जबलपुर के साथ ही कोलकाता के नाट्य दल अपनी प्रस्तुति देंगे। (नाटक ‘ऐ लड़की’ का एक दृश्य। निर्देशक: अयाज़ ख़ान।)रंगकर्म के ‘संस्थान’ का होगा सम्मान: समारोह में रंगकर्म के ख्यात हस्ताक्षर, निर्देशक, लेखक और पत्रकार अरूण कुमार पान्डेय का सम्मान होगा। उमा झुनझुनवाला के मुताबिक- ‘अरुण दादा को सम्मानित कर हम ख़ुद सम्मानित होंगे। यह हमारे लिये गौरव का पल होगा। दादा ने अपना पूरा जीवन रंगकर्म को समर्पित कर दिया। आज भी वे अपने रंगमंडल के साथ सक्रिय हैं। पिछले साल ही वे रंगकर्म के सफ़र में अपने 50 साल पूरे कर चुके हैं। वे विरले और अद्वितीय हैं’।
अरूण पाण्डेय का सीमा चिन्ह सफ़र: हम जानते ही हैं, अरुण कुमार पान्डेय,‘विवेचना रंग मंडल’ जबलपुर के प्रमुख हैं। 1981 से यह नाट्य संस्था निरंतर रंगकर्म के लिये समर्पित है। विवेचना, पूरे देश में अपने विशिष्ट नाट्य निर्माणों और आयोजनों के लिये प्रतिष्ठित है। संस्था ने कोई सौ नाटकों का मंचन किया है। सैकड़ों रंगकर्मियों को प्रशिक्षित किया है। अकेले अरूण जी ने करीब 50 नाटकों का निर्देशन किया है। उन्होंने 14 नाटक लिखे भी हैं, इनमें से पाँच नाटकों का प्रकाशन हो चुका है। अरुण जी के साथ ही बंसी कौल, अलखनंदन,आलोक चटर्जी, तपन बैनर्जी, गंगा मिश्रा आदि ने भी विवेचना के लिये नाटकों का निर्देशन किया है। देश के कई ख्यात नाट्य समारोहों में इसके प्रदर्शन हुए हैं। इसके अरूण जी ने टीवी धारावाहिकों का निर्माण भी किया है। एक पत्रकार के रूप में आपने हितवाद, नवीन दुनिया और दैनिक भास्कर जैसे समाचार पत्रों में 37 वर्षों तक सेवाएं दी हैं। रंग हस्ताक्षरों का भी अभिनंदन: ‘जश्न-ए-अज़हर’ का यह समारोह पं.बंगाल की के पाँच रंग व्यक्तित्वों के अभिनंदन के लिये भी यादगार बनने जा रहा है। लिटिल थेस्पियन के इस आयोजन में 18 से 23 मार्च तक क्रमश: सर्वश्री दिलीप मंडल, दिलीप दवे, अशोक सिंह, ज़मा हबीब जैसी ख्यात रंग हस्तियों के साथ ही सुश्री रुकैया रे का भी अभिनंदन होगा। जैसा कि आप जानते हैं, दिलीप मंडल कठपुतली रंगमंच, दिलीप दवे हिन्दी, गुजराती के अभिनेता, अशोक सिंह हिन्दी के सीनियर एक्टर, ज़मा हबीब जाने-पहचाने स्क्रिप्टर और रुकैया रे बांग्ला रंगमंच की अभिनेत्री हैं। विविध रंग विषयों पर होगा संवाद: बाहरवें राष्ट्रीय नाट्य आयोजन की एक और ख़ासियत इसमें विभिन्न नाट्य विषयों पर होने वाले रंग संवाद के कार्यक्रम होंगे। इसमें शामिल होने के लिये इस बार रजिस्ट्रेन ज़रूरी किया गया है। संवाद के इन सत्रों में प्रतिदिन चार विशिष्ट अतिथि सम्मिलित होंगे। संवाद के इन कार्यक्रमों में अपने-अपने क्षेत्रों की 24 हस्तियां विषय विशेष पर अपने विचार रखेंगी। नाट्य कर्मियों के लिये यह वैचारिक श्रंखला एक मंथन कार्यशाला की तरह होगी। नीचे दी गई तालिका में आप इनसे संबंधित विषयों पर नज़र डाल सकते हैं। (नाटक ‘रेत और इंद्रधनुष’ का एक दृश्य। निर्देशक: ऊमा झुनझुनवाला।)समारोह में होगा 6 नाटकों का मंचन: ‘जश्न-ए-अज़हर’ में दिल्ली,जम्मू,जबलपुर और कोलकाता के नाट्य दल अपने नाटक प्रस्तुत करने आ रही हैं। इसमें पहले दिन ‘दूजो कबीर’, दूसरे दिन ‘व्यक्तिगत’, तीसरे दिन ‘ऐ लड़की’,चौथे दिन ‘इडीपस संवाद’, पाँचवे दिन ‘लम्हों की मुलाक़ात’ और छठे दिन नाटक ‘रेत और इंद्रधनुष’ का मंचन होगा।ऊमा जी की जिजीविषा को सलाम: ‘जश्न-ए-अज़हर’ का बारहवाँ राष्ट्रीय नाट्य आयोजन ‘लिटिल थेस्पियन’ की प्रमुख उमा झुनझुनवाला की जिजीविषा का परिणाम हैं। अपने पति स्व. प्रो.एसएम अज़हर आलम के बिना उन्होंने जिस तरह से लिटिल थेस्पियन में नई जान फूँकी हैं, यह असंभव को संभव कर देने जैसी बात है। याद दिला दें कि कोरोना महामारी की दूसरी भीषण लहर में कोलकाता के बेमिसाल अभिनेता, लेखक, निर्देशक प्रो.अज़हर आलम की जान चली गईं थी। यह ऐसा वक्त भी था जब ऊमा जी के परिवार के एक के बाद एक कुल 7 लोग इस दुनिया ए फ़ानी से चले गये थे। आख़िरी वक्त तक उमा जी अज़हर के साथ कोलकाता के रंगमंच पर काम कर रही थी। मगर यकायक इस हादसे ने जैसे उनका सब कुछ छीन लिया था। परछाई की तरह हर वक्त का साथ अब अदृश्य था। विपरीत हालात में संभाला मोर्चा: इसके बावजूद उमा जी ने परिवार के साथ ही लिटिल थेस्पियन की रंग विरासत को फिर से संभालने का काम शुरू किया। सफ़र बेहद कठिन था, वे लगभग टूटकर फिर से जुड़ने की कोशिश कर रही थीं।  एक सशक्त नारी का परिचय देते हुए उन्होंने फिर से आयोजन शुरू किये। अपने बच्चों और परिवार का आधार बनीं। अपनी अधूरी किताबें मुक्कमल कीं और कई छोटे-बडे आयोजनों के बाद अब इस बाहरवें राष्ट्रीय नाट्य समारोह के लिये पूरी तरह तैयार है। वे कहती हैं- ‘जो कुछ अज़हर के साथ जिया और सीखा, वही सबकुछ मुझे राह दिखा रहा है। मैं उसी के सहारे आगे बढ़ रही हूँ। रच रही हूँ। मैं शुक्रगुज़ार हूँ अपने उन सभी दोस्तों, परिजनों और कलाकारों का, जिनका हर वक्त मुझे साथ मिला और जो मेरे साथ खड़े हैं’। ..रंगमंच की ऐसी प्रेरक और सशक्त नारी को सलाम कहना तो बनता है। आगे पढ़िये। वो घड़ी जिससे पार पाना उमा जी के लिये बहुत मुश्किल था –

लिटिल थेस्पियन और मेरी ज़िदंगी थे अज़हर: उमा झुनझुनवाला


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