Saturday, October 17, 2026
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जश्न-ए-क़लम यानी क़लम का जश्न, कहानी के ज़रिये ज़िदंगी को जोड़ने की कोशिश

शकील अख़्तर,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। ‘जश्न ए क़लम असल में क़लम का जश्न है। इसमें हम क़िस्सागोई या स्टोरी टेलिंग की वाचिक परंपरा के ज़रिये महान् कलमकारों की शॉर्ट स्टोरीज़ को प्रस्तुत और अभिनीत करते हैं। एक तरह से यह ज़िदंगी को ज़िदंगी से जोड़ने का एक माध्यम है ।‘ यह बात जश्न-ए-क़लम के संस्थापकों केसी शंकर और शाश्विता शर्मा ने कही। रंगमंच और सिनेमा के दोनों कलाकार दिल्ली के सफ़दर स्टुडियो अपनी कहानियों के मंचन के बाद इंदौर स्टुडियो से चर्चा कर रहे थे। ( देखें वीडियो )

मंटों की कहानियों से हुई शुरूआत : केसी शंकर और शाश्विता ने बताया, चार साल पहले हमने मुंबई में इस संस्था की शुरूआत की थी। पहली बार हमने सआदत हसन मंटों की कहानियों की प्रस्तुतियां दी थीं। इसके बाद हमारा कारवां आगे बढ़ता चला गया। अब तक हम हिंदी साहित्य और उर्दू अदब के 15 कलमकारों की शॉर्ट स्टोरीज़ पर काम कर चुके हैं। इनमें राजेंद्र सिंह बेदी,कमलेश्वर,इस्तम चुग़तई,कुर्तलून हैदर,पतरस बुखारी,मोहन राकेश,निर्मल वर्मा,राजेंद्र यादव,असद मुहम्मद खान,अमृता प्रीतम जैसे राइटर शामिल हैं। ( नीचे तस्वीर में, जश्न-ए-क़लम के अभिनेता राजेश कुमार,केसी शंकर,लेखक शकील अख़्तर और शाश्विता शर्मा ) 

30 कहानियों पर 9 अभिनेताओं की प्रस्तुति : इन कहानियों की प्रस्तुति पर जश्न-ए-क़लम के 9 अभिनताओं ने अपनी प्रस्तुतियां तैयार की हैं। हम सभी ने इस तरह से करीब 30 कहानियां मंच पर वाचिक परंपरा और अभिनय के साथ तैयार की हैं। देश भर में इसके शोज़ चल रहे हैं। फिलहाल हमारा दिल्ली में 10 दिन का साहित्य उत्सव का टूर जारी है। हम यहां के छोटे-बड़े थिएटर और स्कूल-कॉलेज में प्रस्तुतियों के लिये जाना पसंद करते हैं। मंच के इन दोनों ही सशक्त अभिताओं ने कहा,हम यह काम एक अभियान की तरह कर रहे हैं। एक ज़माने में जिस तरह से कहानी एक मुहिम थी। समाज में सवाल खड़े करती थी। सजग रचनाकार थे। आज यह ज़िम्मेदारी बदल रही है। अब बहुत सी चीजें कर्मिशियल हो गई हैं। हम फिर से इन कहानियों की पेशकश के ज़रिये आपसी बातचीत और अपने सरोकारों से नाता जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी कहानियों को चुन रहे हैं जो आज भी मौजूं हैं। इंसानी फितरत, जद्दोजहद और अहसास को सामने रख रही हैं । केसी शंकर ने कहा, मंच पर हम कलाकारों का ये अंदाज़ हमारी वाचिक परंपरा का ही हिस्सा है। हां इसके लिये हमारे दर्शकों का शो में रहना ज़रूरी है। यहां पर कोई पॉज़ या स्टॉप वाला रिमोट नहीं है। यहां सबकुछ पहले से फीड विजुअल का डिजिटल माइंड नहीं होगा। यहां पर आपको अपनी कल्पना से काम लेना होगा। तो हमारे शोज़ देखते रहिये और हमारे फेसबुक पर JASHN-E-QALAM  से जुड़े रहिये।

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