इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। सीधी की जिला जेल में नाटक बर्बरीक का मंचन हुआ तो कैदी भाव-विभोर हो उठे। नाटक के भावों के अनुरूप कभी कैदियों ने जमकर तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया तो कहीं कुछ कैदी भावुक होकर रो पड़े। नरेन्द्र बहादुर सिंह द्वारा लिखित नाटक ‘बर्बरीक’ का जेल में एक घंटे पांच मिनट का मंचन सफल रहा। नाटक की लेखन शैली, संगीत, नृत्य एवं सधे हुए अभिनय यह साबित कर दिया कि सीधी के रंगकर्मी भी काफी संभावनाशीलकलाकार हैं, जहाँ एक तरफ टेसू और झांझी के संवाद ने दर्शकों को रुलाया वहीं बर्बरीक और कृष्ण के तर्कपूर्ण संवादों ने श्रोताओं के रौंगटे खड़े कर दिए।
दुनिया ने भूला दिया बर्बरीक को : गौरतलब है कि बर्बरीक महाभारत का एक मात्र ऐसा योद्धा है जो पूरे भीषण नर संहार का चश्मदीद गवाह था। उसका सिर धड़ अलग होने के बाद भी वह महाभारत का पूरा युद्ध देखता रहा और कृष्ण के असली रूप को पहचान पाया। उसे दिति माता से अपराजिता विद्या प्राप्त थी। वह एक बाण से ही पूरा महाभारत समाप्त कर सकता था और शायद इसीलिए कृष्ण ने उसे मार दिया। इससे भी ज़्यादा दुर्भाग्य यह कि बर्बरीक के संघर्ष को दुनिया पूरी तरह से भुला चुकी है और कृष्ण रूपी सत्ता आज भी असली योद्धाओं को कुचलने में लगी हुई है। यह समाज भले ही उसके संघर्ष को भुला दे लेकिन लोक आज भी बर्बरीक के संघर्ष को याद करता है। यह नाटक स्थानीय युवा रंगकर्मी नीरज कुन्देर के निर्देशन में संपन्न हुआ।
नई दृष्टि देता है यह नाटक : इन्द्रवती नाट्य समिति सीधी रंगमंच की दिशा में लगातार सक्रिय है तथा अपने नए प्रयोगों के लिए चर्चित रही है। इसी तारतम्य में यह नाटक भी दर्शकों को नई दृष्टि देता है और सोचने के लिए मजबूर करता है। नाटक में मंच पर बर्बरीक की भूमिका नरेन्द्र बहादुर सिंह, झांझी करुणा सिंह, कृष्ण व सूत्रधार एक रोशनी प्रसाद मिश्र, मोर्वी भारती शुक्ला, भीष्म पितामह कुणाल गोस्वामी, सूत्रधार दो तथा भीम रूपेश कुमार मिश्र, युधिष्ठिर अंकुश सिंह, अर्जुन राबेद्र प्रजापति, दुर्योधन डेविड सोलंकी सूत्रधार तीन रजनीश जायसवाल व समूह में आसाना यादव के रूप में अपनी भूमिकाएँ निभाई. संगीत प्रजीत साकेत तथा नन्हे घासी, रूप सज्जा करुणा सिंह व सृष्टि वर्मा का था।
दर्शकों में प्रबुद्धजन भी हुए शामिल : दर्शकों में कुलवंत सिंह धुर्वे जेल अधीक्षक तथा संजीव गोंदले जेलर सहित इन्द्रवती नाट्य समिति संरक्षक अखिलेश पाण्डेय, डॉ. अजय सिंह गहरवार, आशीष पाण्डेय, उपेंद्र सिंह, पलक कुन्देर, सत्येंद्र सिंह, निर्भय द्विवेदी, सागर तिवारी, धीरज सिंह और अशोक सिंह सरपंच पनवार आदि प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।अखिलेश पाण्डेय, अजय सिंह और कुलवंत सिंह ने कलाकारों के काम को मुक्तकंठ से सराहा।

