मनोज शर्मा, इंदौर स्टूडियो। ‘चक्रव्यूह’ नाम से हमें महाभारत युद्ध की वीर अभिमन्यु की कथा याद आती है। कथा बताती है कि किस तरह 7 सशस्त्र योद्धाओं ने बालक अभिमन्यु को युद्ध के नियमों से विपरीत जाकर मार गिराया था। युद्धभूमि में अभिमन्यु के लिए चक्रव्यूह रचा गया था। इस व्यूह रचना में शामिल था उसके पिता वीर अर्जुन को युद्ध भूमि से दूर ले जाना। असल में अभिमन्यु को चक्रव्यूह में प्रवेश करना तो आता था लेकिन उसे बाहर निकलने का रास्ता मालूम नहीं था। परंतु यह चक्रव्यूह सिर्फ युद्धकथा का हिस्सा नहीं है दरअसल जीवन एक चक्रव्यूह है और हम सब हैं अभिमन्यु!
नाटक ‘चक्रव्यूह’ का प्रभावशाली मंचन: जीवन के इसी सार को दर्शाते नाटक ‘चक्रव्यूह’ का दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में प्रभावशाली मंचन हुआ। इस ख्यात नाटक का लेखन और निर्देशन अतुल सत्य कौशिक ने किया है। नाटक के मंचन के बाद दर्शकों ने जमकर तालियां बजाई। खड़े होकर कलाकारों का स्वागत किया।
नीतिश भारद्वाज रहे आकर्षण का केंद्र: नाटक में मुख्य भूमिका नीतीश भारद्वाज निभाते हैं। कहने की ज़रूरत नहीं कि नाटक में उनका होना सबसे बड़ा आकर्षण है। नीतिश वही अभिनेता हैं जिन्होंने दूरदर्शन पर प्रसारित बीआर चौपड़ा के धारावाहिक ‘महाभारत’ में श्रीकृष्ण की भूमिका निभाई थी। ‘महाभारत’ में नीतिश की सम्मोहक मुस्कान वाली अदाकारी को आज भी दर्शक भूले नहीं हैं। उनका यही आकर्षण दर्शकों को नाटक में खींच लाने में कामयाब रहा।
महाभारत के कृष्ण की मंच पर याद: नाटक में नीतिश भारद्वाज के जीवंत अभिनय के साथ ही बाकी कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय किया। अपनी भावपूर्ण अभिव्यक्ति से दर्शकों का दिल जीत लिया। नाटक की मंच परिकल्पना प्रस्तुति के अनुकूल रही। वेशभूषा, प्रकाश संयोजन और पार्श्वसंगीत नाटक की सफ़लता के मजबूत स्तंभ बने।
नाटक की सफलता के दस साल: इस नाटक ने मंच पर सफलता का एक नया इतिहास ही रच दिया है। यह नाटक जुलाई 2024 यानी अगले महीने में दस साल पूरे करने जा रहा है। बीते साल इस नाटक ने सौ से ज़्यादा मंचन पूरे कर लिये थे। नाटक के लेखक और निर्देशक अतुल सत्य कौशिक के अनुसार, ‘इतने सालों में हमने नाटक में कई बदलाव किये हैं। नाटक के हर दस-बीस शोज़ के बाद हम इसकी रूप रेखा, सैट, डिज़ाइन, प्रस्तुति या कॉस्ट्यूम में बदलाव करते हैं। नई तकनीक का सदुपयोग करते हैं और यह बदलाव हमारे दर्शकों की वजह से ही हम कर पाते हैं। उन्होंने देश भर में नाटक के मंचनों में अपना भरपूर प्यार दिया है’।
मंचन में अभिनेता चंद्रचूड़सिंह रहे मौजूद: नाटक के मंचन के दौरान सिने अभिनेता चंद्रचूड़सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। मंचन उपरांत नीतीश भारद्वाज ने दर्शकों से ना सिर्फ रूबरू हुए बल्कि उन्होंने दर्शक दीर्घा में बैठी एक बुजुर्ग महिला का सम्मान भी किया। बुजुर्ग ही हैं जिन्होंने रामायण और महाभारत जैसी जीवन मूल्यों की गाथाओं को संस्कारों को पीढी दर पीढी आगे बढ़ाने का काम किया है और इसी के चलते रंगकर्मी ऐसे नाटकों का मंचन करते रहे हैं करते रहेंगे। आगे पढ़िये – https://indorestudio.com/all-we-imagine-as-light/
जीवन एक ‘चक्रव्यूह’ है और हम सब हैं अभिमन्यु!
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