Wednesday, May 13, 2026
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आदर्श की अग्नि में जब जले हाथ…तब पिता को मिला बेटी का सबक…शिवकांत की पहली प्रस्तुति में दिखा दम

भोपाल,6 नवंबर 2018 (इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम )। ‘विभा मिश्रा स्मृति नाट्य समारोह में 29 अक्टूबर की शाम का वक़्त था ‘कन्यादान’ के लिए। विजय तेंडुलकर के मूल रूप से मराठी में लिखे  नाटक ‘कन्यादान’ का हिंदी रूपांतरण वसंत देव ने किया है। शिवकांत वर्मा का ये पहला निर्देशन था।

नाटक की कहानी एक सुधारवादी और गाँधीवादी नेता के द्वारा अपनी बेटी का कन्यादान एक दलित युवक को करने पर आधारित थी । आदर्शों की यज्ञाग्नि में होम करते वक़्त जब नेता-पिता के हाथ जल जाते हैं तब अपने तार्किक अंधेपन का अहसास होता है, आदर्शवाद और अतिआदर्शवाद का भेद स्पष्ट होता है लेकिन बेटी अपने पिता को जीवन-भर की सीख देने के लिए अपने उसी नारकीय जीवन में ख़ुद को झोंकने का फैसला कर लेती है । गोया जिस शादी को पिता समाज के सामने सामाजिक सुधार का बहुमूल्य उदाहरण बनाना चाहते थे , बेटी उसी शादी को निभा सामाजिक सीख कि आदर्शों के अतिवाद का क्या परिणाम होता है का उदाहरण बना छोड़ती है। निर्देशक के पास इस तरह के विषय की गंभीरता को समझने की परिपक्वता अगर न हो तो नाटक ढह भी सकता है। अपने परिपक्व और कसे हुए निर्देशन से जहाँ निर्देशक ने अपनी पकड़ साबित की वहीं अभिनेताओं और अभिनेत्रियों ने अपने सशक्त अभिनय से इस प्रस्तुति को इसकी ऊँचाइयाँ प्रदान की। प्रस्तुति दर्शकों को इतना छूकर गई कि नाटक के दरमियान कुछ दर्शकों की आँखें भी नम हो चलीं थीं । नाटक की विशेष बात इसका सेट था जिसे देवेंद्र शर्मा (जोशी भैया )ने साकार रूप दिया था।  ( इनपुट : केजी त्रिवेदी ) #त्रिकर्षी # विभा स्मृति नाट्य समारोह #नाटक # भोपाल

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