डॉ.ओमेन्द्र कुमार, इंदौर स्टूडियो। ‘अमर उजाला’ अख़बार की 75 वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर कानपुर के दर्शकों को एक विचारपूर्ण सौगात मिली। उन्हें स्थानीय राजेन्द्र स्वरुप सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स ऑडिटोरियम में जूही बब्बर सोनी अभिनीत संवेदनशील नाटक ‘विथ लव, आप की सैयारा’ देखने को मिला। नाटक में जूही में जूही का भाव प्रवण अभिनय दर्शकों के दिलों को छू जाता है। इस नाटक का लेखन और निर्देशन भी जूही ने ही किया है। यह नाटक समाज में स्त्री जीवन से जुड़े सच को बयान करता है। पुरूष मानसिकता के दोहरे मापदंडों को उजागर करता है।
जीवन का गतिमान तारा,सैयारा: नाटक, सैयारा अली नाम की उस लड़की की कहानी है जिसकी पहले लव मैरिज टूट जाती है और फिर अरेंज मैरिज भी। इन झटकों के बावजूद सैयारा, ज़िदंगी में फिर से उठ खड़े होने की जद्दोजहद करती है। एक ‘सैयारा’ यानी गतिमान तारे की तरह, एक सफल उद्यमी और राइटर बन जाती है। नाटक के ज़रिये जूही साबित करती हैं कि वे अपने प्रतिभाशाली माता-पिता, नादिरा जहीर और राज बब्बर की विरासत को बहुत आगे तक ले जायेंगी।
24 साल बड़े प्रोफ़ेसर से प्यार: सैयारा, एक अमीर माँ-बाप की इकलौती बेटी है, उसे पैरेन्टस बड़े लाड़-प्यार से पाला है। 20 साल की उम्र में सैयारा को, अपने से 24 साल बड़े एक शादीशुदा प्रोफ़ेसर से प्यार हो जाता है। सैयारा से शादी करने के लिये वह प्रोफ़ेसर, इस्लाम मज़हब तक अपना लेता है। लेकिन जल्द ही सैयारा को अपने प्रेमी प्रोफ़ेसर के साथ एक घुटन भरी ज़िदंगी से गुज़रना पड़ता है। साथ ही परिवार की बदसलूकी से भी। यह शादी इसलिये भी टूट जाती है क्योंकि जिस प्रोफ़ेसर के लिये सैयारा ने अपने घर और माता-पिता को छोड़ा, वही अब उसके साथ नहीं था।
डॉक्टर से शादी की दूसरी त्रासदी: तलाक के बाद सैयारा, अपने पिता से मिले प्रोत्साहन से एक सफल उद्यमी बन जाती है। समय बदलता है और फिर से उसकी एक डॉक्टर से शादी हो जाती है। ये डॉक्टर भी दकियानूसी है जिसे अपनी कारोबारी पत्नी की लाइफ़ स्टाइल और कारोबार के सिलसिले में उसके बाहर आने-जाने से एतराज़ है। वह पत्नी पर लगाम कसने की कोशिश करने लगता है। ये बात और है कि शादीशुदा रहते हुए भी उसे दूसरी महिलाओं से संबंध बनाने में कोई परहेज़ नहीं है। अब इस दोहरे चरित्र वाले इंसान के साथ भी सैयारा रह नहीं पाती और उसकी ये शादी भी टूट जाती है।
ज़िदंगी का नेटवर्क क्या फिर जुड़ेगा: जिंदगी के दोराहे पर सैयारा एक फिर अकेले खड़ी रह जाती है। उसे अपने बाबा (धर्मेन्द्र जी) की नसीहत याद आती है, “जिंदगी का नेटवर्क कभी-कभी चला जाता है लेकिन फिर कनेक्ट भी हो जाता है। उसे मां (जरीना वहाब) बाबा फिर अपना लेते हैं, वह और भी ज़्यादा निखर जाती है। बिज़नेस में टॉप टेन में होने के साथ ही वो अब एक बेस्ट सेलर राइटर भी बन जाती है। उनकी अपनी ज़िन्दगी की क़िताब पर एक वेब सिरीज़ बनने की तैयारी शुरू होती है मगर उसकी शर्तों के साथ। अब सैयारा की ज़िदंगी एक नई चमक के साथ ज़िदंगी के आकाश में आगे बढ़ने लगती है। (नाटक के साक्षी बने ‘अनुकृति रंगमंडल’, कानपुर के कलाकारों का जूही बब्बर के साथ एक यादगार पल। तस्वीर में जूही के साथ निशा वर्मा, संध्या सिंह, विजयभान सिंह, दीपक मीनाक्षी राही, महेन्द्र धुरिया, नरेन्द्र सिंह, विजय भास्कर, सुमित गुप्ता और इस रिपोर्ट के लेखक और ‘अनुकृति’ के प्रमुख डॉ. ओमेन्द्र कुमार।)

सिंगल औरत, मर्द का आसान शिकार: नाटक में एक और सच से परदा हटाया गया है। नाटक में बताया गया है कि एक तलाकशुदा औरत के रूप में भी सैयारा का जीना कम आसान नहीं है। सिंगल होने की वजह से बहुत से लम्पट उसे अपना आसान शिकार समझते हैं। इस तरह यह नाटक, विवाहिता और अविवाहिता, दोनों ही परिस्थितियों में एक स्त्री से जुड़े सच की बहुत सी परतों को उठाता है। नाटक में कहानी के हर उतार-चढ़ाव के अनुरूप जूही अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को प्रभावित करती हैं। नाटक में नेहा शेख़ और अंचित मारवाह सहयोगी कलाकारों की भूमिका निभाते हैं। साथ ही स्क्रीन उन लोगों की तस्वीरें दिखाई देती हैं जिनका नाटक में सैयारा ज़िक्र करती है। इनमें वो मर्द भी शामिल हैं, जो सिंगल सैयारा को अपना आसान शिकार समझते हैं। अपने जाल में फंसाना चाहते हैं। आगे पढ़िये –
स्टेट प्रेस क्लब के मंच पर तीन थियेटर ग्रुप्स के विशिष्ट प्रयोग

