Wednesday, May 20, 2026
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कबीर के गीतों ने बाँधा समां, थिरक उठे श्रोता

देवास। इंदौर स्टूडियो डॉट कॉम। तम तो आवो हमारा देस, बतय दां ओ थाने भाव नगरी…कि प्रेम नगरी… जैसे सुमधुर कबीर गीतों के साथ देश के नामचीन गायक कलाकारों ने एक ही मंच से कबीर गायन की अलग-अलग शैलियों, बोलियों और भाव से उम्दा अंदाज़ में प्रस्तुत किया। देर रात तक श्रोता मंत्रमुग्ध होते रहे। यहाँ सिंधी, गुजराती और राजस्थानी में भी गीत प्रस्तुत किए गए।

सभी घट नाम साधो एक है रे : कबीर गायक पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपाणिया ने इसका प्रारंभ करते हुए ‘सभी घट नाम साधो एक है रे…’ गीत प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि कबीर अंदर की चोंट करते हैं, जो इसे समझ जाता है, वह तर जाता है और जो नहीं समझ पाता, वह झूठे दंभ और ज्ञानी होने का ढ़ोंग करता रहता है।शबनम वीरमणी ने बांधा समां : बैंगलौर की फ़िल्म निर्माता और निर्देशक शबनम वीरमणी ने कबीर के प्रसिद्ध भजन ‘तम तो आवो हमारा देस, बतय दां ओ थाने भाव नगरी…कि प्रेम नगरी…’ से अपने गायन की शुरुआत करते हुए मालवा को अपनी भावनगरी निरुपित किया। उन्होंने गुजरात के प्रसिद्ध लेखक ध्रुव भट्ट के एक संस्मरण को याद करते हुए उनकी एक गुजराती रचना सुनाई। उनके साथ कबीर को युवाओं से जोड़ने का जतन कर रहे सुदूर दक्षिण के शोध छात्र स्वागत ने हिन्दी और राजस्थानी में गीतों की प्रस्तुति दी।शास्त्रीय संगीत : अवनि जैन की आवाज़ में शास्त्रीय संगीत में कबीर को सुनना एक अलग तरह का आस्वाद रहा। सुधि श्रोताओं से अवनि ने अपने गायन के लिए जनकर दाद बटोरी। उन्होंने कबीर के ‘यह तन ठाठ तंबूरा…’ के साथ एक मालवी बंदिश भी सुनाई। अवनि बीते दिनों फ़्रांस के पेरिस में अपनी प्रस्तुति देकर लौटी हैं। वे क्लासिकल में लगातार रियाज़ कर रही हैं। शीलनाथ धुनी संस्थान की नाथ परम्परा की सवा सौ साल पुरानी परम्परा का निर्वाह करने वाले जयसिंह ने भी गोरखनाथ तथा कबीर के भजनों की शानदार प्रस्तुति से समां बाँधा। इंदौर के ताराचंद डोडवे ने भी दो प्रस्तुतियाँ दीं।भाव विभोर हुए श्रोता : कालूराम बामनिया तथा दयाराम सारोलिया ने अपने चित परिचित अंदाज़ में मालवी लोक गायन शैली से कबीर गीतों की प्रस्तुति दी। ‘क्या बोलें, फिर क्या बोलें, मन मस्त हुआ, मन मगन हुआ फिर क्या बोलें…तथा’ धीरे-धीरे गाड़ी हाँको मेरे राम…’ जैसे गीतों से श्रोता इतने भाव विभोर हुए कि वे थिरक उठे। ढोलक पर देवदास बैरागी तथा हारमोनियम पर रामप्रसाद चौहान ने संगत की।सञ्चालन मनीष वैद्य तथा आभार नरेंद्र जैन ने माना। अतिथियों का स्वागत वरिष्ठ छायाकार कैलाश सोनी, प्रवीण रावत, किशोर जैन, किरण जैन, गरिमा सोनी, विशाल जैन, जीवनसिंह ठाकुर, अनु, अरविन्द भाई, शक्ति वैद्य, श्रीराम चौहान, ऋषभ जैन, ललिता जैन, राजकुमारी जैन, विक्रम सिंह गोहिल आदि ने शाल श्रीफल भेंटकर किया। इस अवसर पर कई कलाप्रेमी उपस्थित थे।

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