इंदौर। बाजार की चकाचौंध मे दिये तले के अंधेरे से रूबरू कराती कहानी तथा अंधेरे के खिलाफ प्रतिरोध रचती मनुष्य व मनुष्यता के पक्ष की कविताओ का पाठ किया गया।
जनवादी लेखक संघ के मासिक रचनापाठ में कथाकार श्री कैलाश वानखेड़े ने अपनी कहानी हल्केराम और कवि श्री विनीत तिवारी ने दिसम्बर 2006 की एक तारीख, उलगुलान, मरने के लिए निकला हुआ आदमी, जब हम चिड़िया की बात करते है आदि सहित कुछ कविताओं का पाठ किया।

रचनाओ के कथानक, शिल्प, भाषा, उपादेयता, सरोकार आदि विभिन्न आयाम पर सर्वश्री राज नारायण बोहरे, डा.पद्मा सिंह, श्रीमती कविता वर्मा , सुरेश उपाध्याय , कीर्ति राणा , ब्रजेश कानूनगो , डा.जी डी अग्रवाल , चुन्नीलाल वाधवानी ,प्रदीप कान्त , राजकुमार कुंभज , श्रीमती सीमा व्यास, सुश्री सारिका श्रीवास्तव , विक्रम सिंह गोहिल, रविन्द्र व्यास , प्रदीप मिश्र , आनद व्यास, डा.्पुष्पारानी गर्ग, रामआसरे पांडे व रचनाकार द्वय ने अपने विचार रखे.
अर्थशास्त्री डा. जया मेहता, विचारक श्री सौरभ, श्रीमती तिवारी, श्री जावेद आलम , सुश्री शिरिन भावसार,श्री शरद पाठक सहित अनेक युवा व प्रबुद्ध श्रोता इस अवसर पर उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन श्री रजनी रमण शर्मा ने किया और आभार श्री देवेंद्र रिणवा ने व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत मे दिवंगत कवि श्री माणिक वर्मा को श्रद्धांजलि दी की गई।


