प्रवीण कुमार खारीवाल, इंदौर स्टूडियो। इंदौर में स्टेट प्रेस क्लब के मंच पर, प्रख्यात गायक कैलाश खेर ने जयश्री महाकाल के एंथम सांग के टीजर को जारी कर दिया है। भारतीय नववर्ष के शुभ अवसर पर, बुधवार 22 मार्च को वे स्टेट प्रेस क्लब,मध्यप्रदेश के रुबरू कार्यक्रम में शामिल होने के लिये स्थानीय अभिनव कला समाज में पहुँचे। उन्होंने उज्जैन के महाकाल लोक के एंथम गीत ‘जय श्री महाकाल’ के टीजर का बटन दबाकर, सोशल मीडिया के सभी प्लेटफार्म के लिये रिलीज़ कर दिया।
एंथम में पाँच गायकों की आवाज़: आपको बता दें कि श्री खेर ने जय श्री महाकाल गीत को अपने बैंड के साथ महाकाल लोक के लोकार्पण के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मौजूदगी में प्रस्तुत किया था। तब उन्होंने इस गीत को अकेले ही गाया था। परंतु अब इसे एंथम के रूप में उन्होंने बॉलीवुड के चार और मशहूर गायक क्रमश: पद्मश्री शंकर महादेवन, पद्मश्री सोनू निगम, पद्मश्री कैलाश खेर, शान एवं अरिजीत सिंह के साथ इसे तैयार किया है। उन्होंने इस गीत की पत्रकारों और उपस्थित दर्शकों को गाकर भी सुनाया।
संस्कृति के संवाहक साधक हों तैयार: इस मौके पर कैलाश खेर ने अपने विचार भी रखे,भजन सुनाया और पत्रकारों के सवालों के जवाब भी दिये। उन्होंने कहा,सनातन संस्कृति के आगे बढऩे के लिए अब साधकों को तैयार किए जाने की जरूरत है। संगीत के माध्यम से साधक तैयार करने के लिए मैं कोशिश कर रहा हूं और सीनियर सिटीजन से लेकर साधु-संत तक संगीत सीखने में रुचि ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत अब पुन: विश्वगुरु बनने की राह पर है।
विधाता ने मुझे संगीत के लिये चुना: उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक धरोहर को संगीत के माध्यम से पूरी दुनिया के सामने लाने के लिए ईश्वर ने उन्हें चुना है। उनके भारतीय संस्कृति से जुड़े संगीत को पहले स्थापित लोगों ने नकारा, लेकिन आज पूरी दुनिया उस पर झूम रही है। यह सिर्फ भगवान भोलेनाथ की कृपा, साधु-संतों की संगति से मिले आशीर्वाद और मिट्टी की सुगंध का असर है।
आवाज़ में हृदय और आत्मा: श्री खेर ने कहा कि वे हर गीत में अपना हृदय और आत्मा को गाते हैं। भगवान भोलेनाथ के विशेष अनुग्रह से तैयार ज्योर्तिलिंग तीर्थों के गीत आज के युग के अनुरूप तैयार दृश्य-श्रृव्य आत्यात्मिक ग्रंथ हैं। पद्मश्री कैलाश खेर ने गीतों में स्लैंग भाषा के उपयोग के प्रश्न पर कहा कि अच्छाई के साथ बुराई आ ही जाती है, जिसे छोडक़र आगे बढ़ जाना उचित है। कैलाश खेर एकेडमी ऑफ लर्निंग आर्ट के साथ उन्होंने धाम जोड़ा है, क्योंकि वे प्रयास कर रहे हैं इसमें शुद्ध रूप से भारतीय धर्म और लोक की सुगंध पूरी दुनिया में पैलाने वाले साधक तैयार किए जाएं।
बेपरवाह मलंग अंदाज़ झलका: कैलाश खेर की हर बात में उनके जीवन का अनुभव, भारतीय संस्कृति का अध्ययन एवं बेपरवाह मलंग अंदाज झलकता है। स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश के आयोजन में भी इसी बात के दर्शन हुए और कैलाश खेर की हर बात पर दर्शक जमकर प्रभावित हुए और सभागार बार-बार तालियों से गूंजता रहा। श्री खेर ने अपने लोकप्रिय गीतों- पांच बरस की मीराबाई लाडली…, बगडबम बमलहरी…आदि गीतों की संक्षिप्त प्रस्तुति देकर उपस्थित पत्रकारों, संगीत प्रेमियों और गणमान्य नागरिकों का दिल जीतकर आयोजन को चिर स्मरणीय बना दिया।
शुभारंभ,स्वागत और आभार: पूर्व में श्री कैलाश खेर ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्टेट प्रेस क्लब की तरफ़ से श्री खेर का स्वागत, इस रिपोर्ट के संवाददाता के साथ ही, रवि चावला, सुदेश गुप्ता और आकाश चौकसे ने किया। कार्यक्रम का संचालन आलोक वाजपेयी ने किया, जबकि विशाल डबलानी ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार संजीव आचार्य, मनोहर लिम्बोदिया, सुनील अग्रवाल, रचना जौहरी और मीना राणा शाह भी मौजूद रहे। (प्रवीण खारीवाल वरिष्ठ पत्रकार एवं स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष हैं। इंदौर में अभिनव कला समाज के साथ पत्रकारिता,समाज और संस्कृति के अनेक मंचों आधार स्तंभ हैं।- संपादक। ) आगे पढ़िये –

