Wednesday, August 19, 2026
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कला अकादमी में अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वहन मैं पूरी शिद्दत से करूंगा : जयंत भिसे

इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। ‘उस्ताद अल्लाउद्दीन खां संगीत व कला अकादमीं के निदेशक के रूप में मुझे शासन से जो जिम्मेदारी मिली है, उसका निर्वहन मैं पूरी शिद्दत से करने का प्रयास करूंगा’। इंदौर के विभिन्न कला समूहों की तरफ से आयोजित अपने सम्मान समारोह में यह बात जंयत भिसे ने कही। इस बेहद आत्मीय और ऊर्जा से भरे आयोजन में उन्होंने कहा-‘मैंने इंदौर में समाज और संस्कृति के लिये जो भी काम किये, उसमें अनेक लोगों का साथ और सहयोग मिला है। मैं उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूं’।शॉल-श्रीफल,पुष्पाहार से सत्कार-सम्मान: अकादमी का पदभार ग्रहण करने के पश्चात इंदौर के जाल सभागृह में इस वरिष्ठ संस्कृति कर्मी और कला प्रबंधक का सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रदेश की संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर और पद्मभूषण पं. गोकुलोत्सव महाराज थे। दोनों अतिथियों के साथ स्थानीय सांसद शंकर लालवानी ने शहर के कलाकारों की ओर से जयंत भिसे का फूलों का एक बड़ा हार पहना कर अभिनंदन किया। शॉल-श्रीफल के साथ सम्मान पत्र भेंट किया। पूर्व आईडीए अध्यक्ष मधु वर्मा, वरिष्ठ संगीतज्ञ पं. सुनील मसूरकर, गायिका शोभा चौधरी, कल्पना झोकरकर और संगीत कलाकार कमल कामले भी इस दौरान मंच पर मौजूद थे।अतिथियों ने की आत्मीय प्रशंसा: पदम् पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ गायक पण्डित गोकुलोत्सव महाराज ने इस मौके पर कहा कि समाजसेवी जयंत भिसे ने अपने कर्म को सांस्कृतिक धर्म बना लिया। ‘सानंद’ जैसे कला समूह का प्रबंधन जयंत भिसे के ही अथक प्रयासों की देन रही। सांसद शंकर लालवानी ने कहा, उस्ताद अल्लाउद्दीन खां संगीत व कला अकादमी के निदेशक पद पर श्री भिसे नियुक्ति से अकादमी की बागडौर सुयोग्य हाथों में आई है। इससे कला- संस्कृति को नए आयाम मिलेंगे। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि जयंत भिसे कुशल संगठन कर्ता हैं। सानंद जैसे अनुशासित कला समूह इसकी एक मिसाल है। उन्होंने उस्ताद अल्लाउद्दीन खां संगीत व कला अकादमीं के निदेशक के तौर पर उनका चयन सरकार का श्रेष्ठतम निर्णय है। उन्हें उम्मीद है कि अकादमी के ज़रिये कला-संस्कृति और राष्ट्रवाद को प्रतिष्ठित करने का काम भी हो सकेगा। कलाप्रेमियों ने किया अभिनंदन: कार्यक्रम में शहर के प्रमुख कला और संस्कृति से जुड़े लोग मौजूद थे। कलाकारों की अगुवाई में शहर की कला-संस्कृति से जुड़ी 30 से अधिक संस्थाओं के पदाधिकारियों,कलाकारों ने भी जयंत भिसे का पुष्पहार, गुलदस्ते, फूल, शॉल, श्रीफल आदि भेंटकर अभिनंदन किया। प्रारंभ में बाबा साहब तराणेकर, डॉ. माया इंगले, श्रीराम जोग और दूसरे कलाकार बंधुओं ने जयंत भिसे के साथ जुड़े अपने संस्मरणों को साझा किया। विभिन्न संगीत गुरूकुल के युवा कलाकारों ने सुरीली बंदिशें पेश कीं। कार्यक्रम का संचालन संस्कृतिकर्मी संजय पटेल ने किया। स्वागत भाषण तबला नवाज़ हितेंद्र दीक्षित ने दिया। कार्यक्रम में पद्मश्री भालू मोंढे, सुधाकर काले,दीपक खरे, भुवनेश कोमकली, प्रवीण कुमार खारीवाल,डॉ.पूर्वी निमगांवकर,आशुतोष निमगांवनकर, सोनाली यादव, बुन्दू खान, सुभाष देशपांडे, श्रीनिवास कुटुम्बले, अर्चना चितले, राजेन्द्र कौशिक,हरीश मोटवानी, विनय पिंगले, दीपक जैन ‘टीनू’, डॉ. किशोर विनायक काले,गौतम काले, शशिकान्त तांबे,अनुराग तागड़े आदि मौजूद रहे।

 

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