इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। शकील अख़्तर लिखित नाटक #जंगल_सिटी (#junglecity) को शहर से जुड़े संस्कृतिकर्मियों और कलाकारों को भेंट की गई। भेंट कार्यक्रमों की इस श्रंखला को मुख्य रूप से शहर के कला समीक्षक जावेद ख़ान ने संयोजित किया। मार्च के पहले हफ़्ते से दूसरे हफ्ते तक यह सिलसिला चलता रहा। इस दौरान #इंदौरी_भियाव के नाम से ख्यात अभिनेता #राजीव_नेमा और #मालवी_भाभी के नाम से मशहूर अभिनेत्री #प्रतीक्षा_जैन_नैयर से लेखक शकील अख़्तर की मुलाकातें भी विशेष रही। राजीव नेमा वस्तुत: अमेरिका में निवास करते हैं। एक शूटिंग के सिलसिले में मार्च 2020 के दौरान अपने गृहनगर इंदौर आये थे।
इसके साथ ही शकील अख़्तर ने शहर के जाने-पहचाने संस्कृतिकर्मी और सूत्रधार संस्था के संचालक श्री सत्य नारायण व्यास से भी उनके निवास पर मुलाक़ात की। इस मुलाक़ात के दौरान जावेद ख़ान भी मौजूद रहे। उन्होंने बाद में ‘जंगल सिटी’ की प्रतियां शहर की वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी संजय पटेल और प्रेस क्लब इंदौर के अध्यक्ष अरविंद तिवारी को भी भेंट की।
शकील अख़्तर ने #क्रिश्चियन_कॉलेज_इंदौर के प्राचार्य मित्र अमित डेविड से भी हमेशा की तरह मुलाक़ात की। इस मुलाक़ात में फेसबुक समूह #इंदौरवाले और शहर की विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के संचालक समीर शर्मा भी मौजूद रहे। उन्हें भी लेखक ने जंगल सिटी किताब की प्रतियां और साथ में महात्मा गांधी के बचपन पर लिखी ड्रामा बुक #मोनियादिग्रेट भी भेंट की। उन्होंने इंदौर की वयोवृद्ध साहित्यकार डॉ.अरूणा शास्त्री से भी मुलाक़ात कर अपनी किताब भेंट की। उनसे हमेशा की तरह अपने लेखन और बेहतर काम के लिये आर्शीवाद लिया। परम मित्र और सीनियर एक्टर डायरेक्टर प्रांजल श्रोत्रिय से भी इस सिलसिले में मिले। 
कला समीक्षक जावेद ख़ान के मुताबिक, शकील अख़्तर इंदौर रंग जगत और पत्रकारिता की देन हैं। वे कहते हैं, इंदौर मेरी संस्कार शाला है। यही मैंने पत्रकारिता का ककहरा सीखा और रंगकर्म, साहित्य और संगीत के बारे में जाना। यही सीख मेरी जीवन की पूंजी है। इसीलिये शकील इंदौर और यहां के कलाकारों का बड़ा मान रखते हैं। अक्सर उनसे मुलाक़ात करते हैं। शकील इंदौर नईदुनिया,चौथा संसार,फ्री प्रेस जैसे अख़बारों में 1988 से 2004 तक सेवारत रहे। उसके बाद वे दैनिक भास्कर जयपुर और दिल्ली से जुड़े और फिर इंडिया टीवी में बतौर सीनियर एडिटर सेवारत रहे। 

आपको बता दें, जंगल सिटी प्राणियों के प्रति संवेदना जगाता नाटक है। इसमें बहुत से किरदार प्राणियों के हैं। इनमें स्ट्रीट डॉग्ज़ से लेकर बाज़ जैसे पक्षी और तेंदुआ और शेर जैसे जानवर हैं। यह एक तरह से जीव जंतुओं की आवाज़ बनकर सामने आता है। नाटक लॉक डाउन के हालात से शुरू होता है। अपनी समीक्षा में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के शैक्षणिक प्रमुख प्रो. अभिलाष पिल्लई ने प्रशंसा की है। प्रसिद्ध सिने अभिनेता और थियेटर डायरेक्टर राजेंद्र गुप्त, फिल्म मेकर मंदाकिनी माथुर और कहानीकार डॉ.अरूणा शास्त्री, लेखिका और कवियित्री जया सरकार आदि ने भी इसकी प्रशंसा की है। नाटक पुष्पम इंटरप्राइज़ेस के प्रकाशन से छपी है। रूपांकन और संपादन सहयोग ख्यात पत्रकार विवेक अग्रवाल का है। कवर चित्र जंगल फोटोग्राफर आकाश नागर का है। यह क़िताब अमेजॉन amazon और अनूठा डॉट कॉम anootha.com पर उपलब्ध है।

