चंडीगढ़ से सुभाष अरोरा की सचित्र रिपोर्ट, इंदौर स्टूडियो: कला और संस्कृति के केंद्र चंडीगढ़ के सेक्टर-10 स्थित राजकीय संग्रहालय की प्रतिष्ठित कला दीर्घा इन दिनों देश भर की विविध कलाकृतियों से गुलज़ार है। यहाँ ‘कलानिधि’ संस्था द्वारा आयोजित ‘द्वितीय राष्ट्रीय वार्षिक कला प्रदर्शनी’ का गरिमामय शुभारंभ किया गया।
प्रदर्शनी में कला जगत के 13 चित्रकारों और एक मूर्तिकार को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। प्रदर्शनी में देश भर के 79 प्रतिभाशाली कलाकारों की 98 बेमिसाल कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।इस कला उत्सव का विधिवत शुभारंभ प्रतिष्ठित समाजसेवी श्रीमती अंजना रानी और चंडीगढ़ फाइन आर्ट कॉलेज के पूर्व प्राचार्य श्री डी.एस. कपूर ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया।
समारोह की गरिमा बढ़ाते हुए चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के अध्यक्ष श्री भीम मल्होत्रा, पंजाब ललित कला अकादमी के अध्यक्ष श्री गुरदीप धीमान और वयोवृद्ध कलाकार डॉ. सरोज रानी उपस्थित रहीं। इस दौरान नगर के गणमान्य कलाकार, कला प्रेमी और प्रदर्शनी में भाग ले रहे कलाकारों की मौजूदगी ने पूरे परिवेश को एक उत्सव के रूप में तब्दील कर दिया।
समारोह के प्रारंभ में ‘कलानिधि’ की संस्थापक द्वय श्रीमती वंदना भारती और श्रीमती गुरमीत गोल्डी ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने संस्था की उन गतिविधियों पर प्रकाश डाला जो निरंतर कला और कलाकारों के प्रोत्साहन के लिए समर्पित हैं। उन्होंने इस यात्रा में मिल रहे सहयोग और स्नेह के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।
मुख्य अतिथि श्रीमती अंजना रानी और श्री डी.एस. कपूर ने संस्था के प्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन कला के भविष्य को उज्ज्वल बनाते हैं। प्रदर्शनी में छात्र कलाकारों और वरिष्ठ रचनाकारों के बीच का कलात्मक संवाद स्पष्ट रूप से झलकता रहा। 
यहाँ स्थापित की गई कलाकृतियों और मूर्ति शिल्पों की विविधता दर्शकों को सम्मोहित कर रही थी। विशेष रूप से वाक्-श्रवण बाधित कलाकार सुबोध कुमार गिरी की कृति ‘इको ऑफ साइलेंस’ और यशस्वी की रचना ‘दि हुडेड सेज’ आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी रहीं।
इनके साथ ही श्रीमती राजबाला अरोड़ा की ‘रिंकिल्स ऑफ जॉय’, अभिजीत दास की ‘फोर्स’, पुनीत मदान की कॉफी से निर्मित अनोखी कलाकृति ‘शक्ति’, मुकेश मिंज की ‘ब्यूटी ऑफ ट्रेडिशनल विलेज’, सोनम गुप्ता की ‘रेनबो रिफ्लेक्शन’, शाइला फैयाज की ‘विदिन मी- मैनी विमन्स’, सुषमा पाठक की ‘बनारस घाट’, इन्गा सिजोडिन की ‘साइलेंट इरेस्केंडो’, गुरलीन कौर की ‘साइलेंट कन्वर्सेशन’ और एलफी कुमार की ‘रिदम इन नेचर’ जैसी कृतियों ने अमिट छाप छोड़ी।
प्रदर्शनी में संस्था की संस्थापकों के रचनात्मक कौशल की भी झलक मिली। श्रीमती गुरमीत गोल्डी द्वारा निर्मित काष्ठ प्रतिमा ‘एम्ब्रेस’ अपनी श्रेष्ठ आलिंगन मुद्रा के लिए सराही गई, वहीं श्रीमती वंदना भारती की पेंटिंग ‘दी आफ्टरनून’ चंडीगढ़ की दोपहर की ताज़गी को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती प्रतीत हुई। इस भव्य प्रदर्शनी के सफल संयोजन के लिए पूरी टीम की सराहना की जा रही है। (लेखक सुभाष अरोरा एक प्रतिष्ठित मूर्तिकार और कला समीक्षक हैं। इंदौर स्टूडियो के लिये विशेष तौर पर लिखते हैं।) आगे पढ़िये – https://indorestudio.com/piyush-rang-mahotsav-delhi-rama-pandey-tribute-ad-guru/

