भोपाल। विश्व रंग के अंतर्गत दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय में आज कविता त्रिवेणी का आयोजन किया गया जिसमें वरिष्ठ कवि लक्ष्मी नारायण पयोधि, कुमार सुरेश और श्रीमती ममता तिवारी ने काव्य पाठ किया। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि ओम भारती ने की।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में ओम भारती ने कहा कि तीनों ही कवियों ने कविता के नए मुहावरे गढ़ने का काम किया है । तीनों ही कवियों ने अपनी कविताओं को सूक्ष्म से लेकर विराट तक फैलाने का काम किया है । माननीय संवेदना से लेकर जातीय चेतना तक जिस तरह से कविताओं के रंग बिखेरे हैं तीनों कभी बधाई के पात्र हैं।
श्रीमती ममता तिवारी ने कविता पढ़ी- कांटों की सेज पर बदलता रहा करवटें सदा /बंदे चढ़ जा फूलों की शैया अब तो मनमाफिक बिछोना है। वहीं कुमार सुरेश की कविता -किसी अनजान और अशुभ वजह से लोगों को काले शब्दों से भी पुकारा जाता है /यह बात और है कि काफिर और मलेच्छ वगैरह हमेशा दूसरों के घरों में होते हैं हमारे अपने घरों में नहीं।
लक्ष्मी नारायण पयोधि ने अपनी कविता में इन पंक्तियों का विशेष रूप से उल्लेख किया- कब से सूंघा नहीं तुमने किसी फूल को/सुनी नहीं उसके मन की बात /या नहीं किया इसकी आत्मा के संगीत से साक्षात्कार/सुनो फूल को सूंघने का अर्थ अपने सुगंध को पहचानना है।
कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संग्रहालय के अध्यक्ष अशोक निर्मल ने दिया। कृतज्ञता ज्ञापन निदेशक राजूरकर राज ने किया। कार्यक्रम का संचालन घनश्याम अमृत ने किया समारोह में विश्व रंग के बारे में बलराम गुमास्ता और हीरालाल नागर ने जानकारी दी।

