Wednesday, May 20, 2026
Homeकला खबरेंकविता के लिए यह दौर जोखिम भरा

कविता के लिए यह दौर जोखिम भरा

जनवादी लेखक संघ लखनऊ ने कैफ़ी आज़मी एकेडमी में ‘लखनऊ में कविता’ कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवयित्री कात्यायनी ने की। उद्घाटन वक्तव्य जलेस के प्रदेश सचिव नलिन रंजन सिंह ने दिया। उन्होंने कविता के समकालीन संदर्भों को रेखांकित करते हुए इस काल को कविता के लिए जोखिम भरा समय बताया। कविता के फॉर्म को लेकर उन्होंने कई सुझाव दिए। उन्होंने यह भी कहा कि 1990 के बाद कविता में आक्रोश का स्वर बढ़ा है। यह भी कि बदलाव ने परम्परागत कविता में तोड़-फोड़ भी की है।

इसके बाद कविता पाठ का पहला सत्र आरम्भ हुआ जिसका संचालन युवा कवयित्री सीमा सिंह ने किया। इस सत्र में कविता पाठ करते हुए शिवम गर्ग ने ‘माँ’ पर कविता सुनाई। माधव महेश की कविता ‘बच्चे तो मरते ही हैं’ खूब सराही गई। नूर आलम ने 6 दिसंबर, 2018 को दिल्ली में हुए किसानों के प्रदर्शन पर केंद्रित कविता सुनाई। गोपाल नारायण श्रीवास्तव ने रचना धर्मिता को केन्द्र में रखकर व्याख्याओं से भरी कविता सुनाई। आभा खरे ने अपनी छोटी किन्तु महत्वपूर्ण कविता सुनाई। प्रीति चौधरी ने कंकड़ और दीमक का रूपक रखकर दीमकों द्वारा बहुत कुछ खत्म किये जाने की ओर संकेत किया। मउघ का अर्थ फेमिनिस्ट से जोड़ते हुए उन्होंने परंपरागत अर्थ को नया अर्थ दिया। सुशीला पुरी ने ‘आदमी और देवता’, ‘अँधेरा है कि बढ़ता ही जा रहा है’ और उपसर्ग की तरह कविताएँ सुनाईं। संध्या सिंह ने अपनी भावपूर्ण कविताओं से समाँ बाँध दिया। ज्ञानप्रकाश चौबे ने ‘प्रेम को बचाते हुए’, ‘रिक्शेवाला’ और ‘मतदान’ कविताओं का पाठ किया।
सीमा सिंह ने सृष्टि के पहले जब कुछ नहीं था तब के समय को ध्यान में रखकर ईश्वर पर और ‘इमामदस्ता’ पर कविताएँ सुनाईं। संजय मिश्र ने ‘महागुरु’, ‘कवि’ एक-दो और ‘एक अच्छे इंसान की दुख भरी कहानी’ कविताओं का पाठ किया। अनिल त्रिपाठी ने ‘बापू की याद’ और ‘राजन की जय हो’ जैसी महत्वपूर्ण कविताएँ सुनाईं। वीरेन्द्र सारंग ने ‘ईर्ष्या’ और एक भोजपुरी कविता का पाठ किया। कात्यायनी ने ‘कविता’ विधा को केंद्र में रखकर बात कही। आज सुनाई गई कविताओं को उन्होंने भविष्य की कविताएं कहा। उन्होंने ‘लौटने के बारे में’ कविता सुनाई।दूसरे सत्र में आमंत्रित कवियों का कविता पाठ हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि मदन कश्यप ने की। आज़मगढ़ से आई कवयित्री शिखा मौर्या ने ‘बुरी लड़की’ कविता सुनाकर स्त्री सशक्तिकरण की आवाज़ उठाई। चंडीगढ़ से आई मोनिका कुमार ने जंग लगे समाज में स्त्रियों को ‘स्त्रियों का प्रेम कम मिला’ सुनाकर स्त्रीविमर्श को पुनर्परिभाषित किया।मुम्बई से आई अनुराधा सिंह ने ‘ईश्वर नहीं नींद चाहिए’, ‘क्या सोचती होगी धरती’, ‘प्रेम का समाजवाद’ और ‘पाताल से प्रार्थना’ कविताओं का पाठ किया। हरियाणा की कवयित्री विपिन चौधरी ने ‘एहसान नमक का’ और ‘पसंद’ जैसी अपनी चर्चित कविताएँ सुनाईं। आज़मगढ़ से आये आर सी चौहान ने ‘नदियाँ’ और ‘ईश्वर की अनुपस्थिति में’ कविताएँ सुनाईं। संचालन कर रही शालिनी सिंह ने हँसी का रंग जैसी महत्वपूर्ण कविता सुनाई। विभा रानी ने ‘हम हैं रेपिस्तान’ और ‘गाजर का हलवा’ कविताओं का पाठ किया।

सिद्धेश्वर सिंह ने ‘प्रोफ़ाइल पिक्चर’, ‘एक स्त्री का दुख’, ‘किसान’ और ‘दिलदारनगर’ कविताएँ सुनाईं। अध्यक्ष मदन कश्यप ने पढ़ी गई कविताओं पर अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने ‘छोटे-छोटे ईश्वर’, ‘थोड़ा सा ईश्वर’ और ‘रुदन और गान’ कविताओं का पाठ किया। धन्यवाद ज्ञापन माधव महेश ने किया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

जावेद अहमद शाह ख़ान "अल-हिंदी" on रंगमंच की नई उड़ान…सौम्या व्यास