Saturday, May 9, 2026
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केवड़िया में ‘ज्वाइंट रेपर्टरी’ बनाने पर होगी चर्चा: प्रो.रमेश चंद्र गौड़

कला प्रतिनिधि,इंदौर स्टूडियो। ‘केवड़िया में हम एक ज्वाइंट रेपर्टरी कम्पनी बनाने पर विचार कर रहे हैं। इस विषय को लेकर हम जल्द गुजरात सरकार से चर्चा करेंगे। ऐसा होने पर यहाँ नियमित रूप से नाटकों के मंचन का हो सकेंगे’। इसके साथ ही हम एक ‘ट्राइबल फेस्टिवल’ की भी योजना पर भी विचार कर रहे हैं’। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक प्रो. (डॉ.) रमेश चन्द्र गौड़ ने यह कहा है। वे 22 वें भारत रंग महोत्सव के ‘केवड़िया चैप्टर’ के समापन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। समापन से पहले उन्होंने केवड़िया में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। नाटक ‘चाणक्य’ रही अंतिम प्रस्तुति: समारोह में अंतिम प्रस्तुति के रूप में पद्मश्री मनोज जोशी निर्देशित और अभिनीत नाटक ‘चाणक्य’ का मंचन किया गया जिसकी दर्शकों ने जमकर प्रशंसा की। देश भर में इस नाटक के शोज़ हो चुके हैं। चाणक्य के संवाद और रोचक प्रस्तुति दर्शकों को बाँधकर रख देती है। श्री जोशी नाटक को बेहद प्रासंगिक भी मानते हैं। आपको बता दें, मनोज जोशी मराठी, गुजराती और हिन्दी रंगमंच तीनों के लिये ही काम कर चुके हैं। 60 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। रंगमंच को टूरिज़्म से जोड़ने की ज़रूरत: प्रो. गौड़ ने अपने सम्बोधन में कहा – ‘केवड़िया को देखकर लगता है कि अब रंगमंच को टूरिज़्म के साथ जोड़ने का समय भी आ गया है। उन्होंने कहा, 22 वें भारत रंग महोत्सव की सबसे खास बात ये भी रही कि हमने इस बार यह आयोजन दस शहरों में विभिन्न राज्यों में आपसी सहयोग से किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब हमें राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की कई शाखाओं को बनाने के बारे में भी सुझाव मिल रहे हैं। इस पर भी हम विचार कर रहे हैं। प्रो. गौड़ ने कहा, मीडिया ने भी इस महोत्सव के प्रसारण में अपना विशिष्ट सहयोग दिया है।केवड़िया चैप्टर के सदस्यों का आभार: कार्यक्रम में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से प्राध्यापक दीपांकर पॉल ने भारंगम केवड़िया चैप्टर से जुड़े सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। मंच पर बतौर अतिथि मौजूद श्री भार्गव ठक्कड़ ने इस बार आयोजन के लिये केवड़िया को चुने जाने को लेकर रानावि निदेशक को साधुवाद दिया।भारंगम की क्या रही विशेषताएं: 22 वें भारत रंग महोत्सव की इस बार की कुछ अलग विशेषताएं रही हैं। इस बार यह आयोजन 13 दिनों तक हुआ। इसमें 16 भाषाओं में 18 राज्यों के 80 नाटकों का मंचन 10 शहरों में हुआ। बीआरएम के इतिहास में पहली बार 10 शहरों में एक साथ आयोजन हुआ। आयोजन से इस बार करीब 5 हज़ार रंगकर्मी जुड़े। इस दौरान तीन पुस्तकों का लोकापर्ण,4 इंटरफ़ेस और मीट दि डायकेक्टर के 10 कार्यक्रम आयोजित हुए। 9 राज्य सरकारें तथा 6 सांस्कृतिक एवं शिक्षण संस्थाएँ सहभागी के रूप में शामिल हुईं। 6 शहरों में भारत रंग महोत्सव पहली बार हुआ। आज़ादी सेगमेंट को शामिल करें तो ये रंग महोत्सव इस बार 16 शहरों में हुआ। 100 से ज़्यादा नाटक तथा नाटककारों तथा महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों एलजी, सचिव, निदेशकों, मंत्रियों, संसद सदस्यों आदि को अतिथि के रूप में अमिंत्रित किया गया। 100 से ज्यादा एनएसडी के पूर्व छात्र और 200 से ज़्यादा वॉलंटियर्स इस कार्य में शामिल हुए। अनुमान के अनुसार क़रीब 2 लाख लोगों ने विभिन्न कार्यक्रमों को देखा। एनएसडी फैकल्टी, स्टाफ़ तथा सोसाइटी अध्यक्ष एवं सदस्य एवं ऐकडेमिक काउंसिल मेंबर्स का महोत्सव में भरपूर सहयोग मिला। आगे पढ़िये: 22 वें भारंगम के तहत ‘दिल्ली चैप्टर’ का समापन

22वें भारत रंग महोत्सव के तहत आयोजित ‘दिल्ली चैप्टर’ का समापन

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