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कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। इंदौर में रूह से बात करते नग़मों की बारात सजी। यादें रोशन हुईं मुहम्मद ज़हूर खय्याम साहब की बनाई धुनों की। इंदौर के जाल सभागृह में उनके संगीत से सजे पुरकशिश नग़मे गूँजे। उन्हें ‘स्वरदा’ के प्रतिभाशाली सिंगर्स ने याद किया।
खय्याम साहब की बनाई घुनें ऐसी हैं जो सीधे दिल से बात करती हैं। उनके चुनिंदा नगमों को एक के बाद एक गाकर सुनने वालों की भी ख़ूब दाद मिली। मोना ठाकुर ने इस पूरे कार्यक्रम को अपनी रवानगी से एक सूत्र में पिरोया और कार्यक्रम को सुनने वालों की याद में दर्ज कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सपना केकरे ने ‘दिल चीज़ क्या है’ और ‘तुम अपना रंजो-ग़म’ से की। इसके बाद नीता दास ने बहारों मेरा जीवन भी सँवारो प्रस्तुत किया। मेघा अकर्ते ने ‘ये क्या जगह है दोस्तों’ गाकर उमराव जान की याद ताज़ा कर दी।
अभिषेक वेद ने ‘करोगे याद तो हर बात सुनाया’ और सपना के साथ ‘चाँदनी रात में’ गाकर तालियाँ बटोरीं। डॉ. भरत बाजपेयी ने ‘आई ज़न्जीर की झंकार’ सुनाया और मेघा के साथ ‘तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती’ गाकर महफ़िल को आगे बढ़ाया। संजय गर्ग ने ‘ज़िन्दगी जब भी तेरी बज्म’ में से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। नीता के साथ उनका ‘गापुजी गापुजी गम गम’ भी खूब सराहा गया।
स्वरदा की इस पेशकश में जो गीत सुनाये गये, उनके बोल हैं –दिल चीज़ क्या है, तुम अपना रंजो-ग़म, बहारों मेरा जीवन, आई जंजीर की झंकार, ये क्या जगह है दोस्तों, ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में, करोगे याद तो हर बात याद आयेगी, चाँदनी रात में, आपकी महकी हुई, आजा रे, ए दिले नादान, जानेमन तुम कमाल करती हो, तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती, मैं पल दो पल का शायर हूँ, जीत ही लेंगे, आप यूं फ़ासलों से, आज बिछड़े हैं, न जाने क्या हुआ, आँखों में हमने आपके, चोरी चोरी कोई आए, ठहरिए होश में आ लूं, प्यार का दर्द है, मेरे घर आई, गापुजी गापुजी गम गम, अहले दिल यूं भी निभा, कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कभी कभी मेरे दिल में, मोहब्बत बड़े काम की चीज़ है, फिर छिड़ी बात, रात फूलों की।
इस कार्यक्रम को अपने मनमोहक अंदाज़ में मोना ठाकुर ने सूत्रबद्ध किया । संगीत से उनका भी स्वाभाविक जुड़ाव है और वे ऐसे कार्यक्रमों की ख़ास तैयारी भी करती हैं। मोना, स्वरदा के कार्यक्रमों में सूत्रधार की भूमिका निभाती रहीं हैं, आप देख सकते हैं स्वरदा के एक प्रोग्राम से जुड़ी उनकी ये तस्वीर। ये प्रोग्राम लताजी की याद में आयोजित हुआ था।
स्वरदा की लीड सिंगर, सपना केकरे ने इंदौर स्टूडियो से बातचीत में कहा, वे अपने साथियों के साथ आगे भी ऐसे ही कुछ विशिष्ट संगीत के प्रोग्राम करती रहेंगी। उन्होंने बताया, हमारे कार्यक्रमों के लिये प्रायोजक मिलते नहीं है लेकिन हम चार-पांच साथियों के साथ मिलकर प्रोग्राम का खर्च बांटकर संगीत की ये दुनिया सजाते रहते हैं। अच्छी बात ये है कि हमें सुनने वालों का हमेशा प्यार मिलता है। वे हमारा हौसला बढ़ाते हैं।
सपना ने कहा, मुझे लगता है, इंदौर का प्रीतमलाल दुआ सभागृह एक अच्छा विकल्प हो गया है, उसका किराया भी उचित है। मैं वहां ग़ज़लों का एक प्रोग्राम जल्द करना चाहती हूं। स्कूल और कॉलेज के ज़माने से ग़ज़ल गायिकी मेरा शौक रहा है और मैं उस दौर में ग़ज़ल गायिकी के लिये पहचानी जाती थी। चित्रा सिंह मेरी फेवरट सिंगर रहीं हैं। मैं जल्द ही उनकी गाई ग़ज़लों को प्रोग्राम करना चाहती हूँ। इंदौर स्टूडियो की रिपोर्ट। indorestudio.com Art and Artist of India.

