कला प्रतिनिधि,इंदौर स्टूडियो। वर्ल्ड डांस एलाइंस और खजुराहो नृत्य समारोह के संयुक्त तत्वावधान में कोरियो लैब – लय प्रवाह कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। कार्यशाला में 6 देशों के नृत्यकारों ने नृत्यों में नए आयामों पर गहन चर्चा की। साथ ही अपनी प्रस्तुतियों के साथ अभ्यास के कार्यक्रमों को भी वर्कशॉप का हिस्सा बनाया।
नृत्य के अभ्यास के साथ विमर्श: इस दौरान कैनेडा से आई टीम के प्रतिनिधि, साशर ज़रीफ़ ने दूसरे दिन नृत्य अभ्यास संपन्न करवाया। ईरान से संबंध रखने वाले साशर ने बताया कि नृत्य एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को जोड़ने का और भावनाओं के अतिरेक को संप्रेषित करने का एक सशक्त माध्यम है। नृत्य एक अनवरत यात्रा है, गंतव्य नहीं। नृत्य के माध्यम से हम ‘स्व’ की तलाश करते हैं। कार्यशाला में विभिन्न देशों से पधारे प्रतिनिधियों ने सहभागिता की और रचनात्मक आदान-प्रदान हुआ।
शतरंज के खेल से घोड़ों का नृत्य: इसके साथ ही मुंबई से पधारी सुविख्यात कत्थक नृत्यांगना सुश्री सोनिया परचुरे की शिष्यों के द्वारा नृत्य में समकालीन अभिव्यक्ति को समझाने हेतु शतरंज के खेल से घोड़ों का नृत्य द्वारा मंचन किया गया। सिंगापुर से पधारे नृत्य समूह किरीशिमा डांस कॉर्प्स ने विभिन्न देशों के कलाकारों से नृत्य अभ्यास करवाया। मलेशिया से पधारे समूह एएसके डांस कंपनी ने मलेशिया में नृत्य परिदृश्य को समझाया। तत्पश्चात अंतिम सत्र में कैनेडा और भारत के कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं। नृत्य में प्राणायाम एवं अन्य योग क्रियाओं के महत्व की चर्चा भी हुई।
म्यूट डांस ने कराया नृत्य अभ्यास: चौथे दिन की दक्षिण कोरिया से आई नृत्य कंपनी म्यूट डांस ने नृत्य अभ्यास का संचालन किया। बाद में मैड थियेटर ताईवान के साथ इस कार्यशाला में मौजूद सभी सहभागियों ने नृत्य अभ्यास किया। रोमांचक नृत्य की कुछ झलकियां प्रस्तुत कीं। विमर्श सत्र में विभिन्न देशों से आए कलाकारों ने समकालीन नृत्य की परिभाषा पर चर्चा की। पांचवे दिन की शुरुआत सुमेधा भट्टाचार्य द्वारा नृत्य पर आधारित फिल्म बनाने पर चर्चा से शुरू हुई। इस चर्चा में उन्होंने बताया कि मंच और कैमरे के सामने प्रदर्शन में किस तरह का अंतर होता है, कैमरा शुरू होने के पहले कैमरा शुरू होने पर और कैमरा बंद होने के बाद क्या होता है?
उदय शंकर स्कूल से जुड़ी अहम यादें: दोपहर के सत्र में सुप्रसिद्ध समकालीन कलाकार भरत शर्मा ने उदय शंकर स्कूल के बारे में अपनी स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कहा, कला को किसी एक स्थूल आधार के दायरे में रखने या एक ही तरह से परिभाषित करने में वह बंध जाती है। अगले सत्र में ताईवान से आए समूह मैड थिएटर ने नृत्य अभ्यास पर कार्यशाला आयोजित की। इसमें मौजूद कलाकारों ने उत्साह से हिस्सा लिया। नृत्य अभ्यास के दौरान उन्होंने शारीरिक सौम्यता, भावों की अभिव्यक्ति और लचक के महत्व के बारे में बतलाया। साथ ही उन्होंने नृत्यों पर आधारित कुछ प्रयोगात्मक फिल्मों का प्रदर्शन भी किया। अंतिम सत्र में ताईवान, दक्षिण कोरिया और भारत के नृत्य समूहों द्वारा प्रस्तुतियां दी गई, जिसकी दर्शकों ने सराहना की। आगे पढ़े –

