Wednesday, May 13, 2026
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क्या फिर सजेगा जीवंत प्रस्तुतियों से मंच ?

शकील अख़्तर,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। देश भर में थियेटर से जुड़े ऐसे बहुत से कलाकार मित्र हैं जो पिछले डेढ़ साल से अपने कला संबंधी कार्यक्रमों या शोज़ को रोककर बैठे हैं। दूसरी वेव से पहले हालात कुछ साज़गर होना शुरू हुए थे। परंतु मार्च से हालात ऐसे बिगड़े कि जून का महीना आ गया। अब हालात कुछ ठीक होना शुरू हुए हैं। ऐसे में कलाकार साथियों में फिर आशा बंधी है कि जल्द सब ठीक होगा, अगर तीसरी लहर का बड़ा हमला ना हुआ तो वे मंच पर अपनी प्रस्तुतियां देने की स्थिति में आ सकते हैं। इसमें भी शक नहीं कि कोरोना संकट ने कलाकारों को बहुत कुछ सिखाया है। उन्हें डिजिटली मज़बूत बनाया है। ऑनलाइन काम की नई समझ पैदा की है। मगर जीवंत परफॉरमेंस की बात ही अलग होती है। इसलिये आस भी उसी की है।

भोपाल के सीनियर थियेटर डायरेक्टर #केजी_त्रिवेदी ने कहा, बीते डेढ़ साल में सबसे बड़ा नुकसान उन नये कलाकारों का हुआ है जिन्हें हम ट्रेन्ड करते आये हैं। अब तक हम करीब 150 युवाओं को रंगमंच का प्रशिक्षण दे देते। मगर 2020 के मार्च महीने से अब तक मुश्किल से कुछ गतिविधियां हो सकी हैं। अब लगता है, इस महीने के अंत तक हालात फिर ठीक हों। तब बात बनेगी। इंदौर के वरिष्ठ रंगकर्मी #प्रांजल_श्रोत्रिय ने अपने टेरेस थियेटर की क्लासेस में फिर से नये कलाकारों को प्रशिक्षण देना शुरू किया था। उनके साथ उनका बेटा #प्रगल्भ भी शामिल था। इस साल के शुरू में कुछ दिन काम शुरू हुआ लेकिन मार्च के महीने में इस पर ब्रेक लग गया। अब उन्हें उम्मीद है जुलाई से फिर उनकी थियेटर क्लासेस शुरू हों सकेंगी लाइव परफॉरमेंस तो उसके बहुत बाद की बात है। ग्वालियर में #गीतांजलि_गीत ने कोरोना की पहली लहर के खत्म होने के बाद रंगमंच पर सक्रियता बढ़ाई थी। उन्होंने दिल्ली के रंग प्रशिक्षक राजेश तिवारी के नेतृत्व में एक रंग शिविर भी आयोजित किया। उन्होंने नाट्य प्रस्तुति भी तैयार की। मगर मार्च में आई दूसरी वेव की दस्तक ने सारे किये कराये पर पानी फेर दिया। उनके साथ जुड़े कलाकार अब तब ही कुछ कर सकेंगे जब हालात ऐसे हों कि वे परफॉर्म कर सकें । गीताजंलि पिछले साल ‘मेरा मंच’ के ज़रिये रंगकर्म पर चर्चा वाले आयोजनों से सुर्खियों में आईं थीं। अब वे अपनी टीम के साथ उन ज़रूरत मंदों की मदद में जुटी हैं जो कोविड वायरस का शिकार बने हैं।

ग्वालियर में वरिष्ठ अभिनेता और निर्देशक #अरूण_काटे ने इसी साल मास्क मैजिक की एक नई अकादमी की शुरूआत की थी। उन्होंने सामाजिक दूरी के साथ कुछ आयोजन भी किये, मगर जब तक कुछ हो पाता, कोरोना की दूसरी लहर की उनके काम पर मार पड़ी। उनकी अकादमी पर बंद का बोर्ड लटक गया। वे कहते हैं, अब जैसे ही स्थितियां ठीक होंगी। कोई सरकारी या ग़ैर सरकारी मदद मिलेगी, वे काम शुरू करेंगे। अरूण टीवी,विज्ञापन और फिल्म से जुड़े कलाकार भी हैं। परंतु बीते डेढ़ साल में हज़ारों कलाकारों की तरह उन्हें भी ना के बराबर ही काम मिल सका है। वे इससे हुए आर्थिक संकट से भी संघर्ष कर रहे हैं।

मुंबई की #शाश्विता_शर्मा फिल्म,वेव सिरीज़ और टीवी की जानी-पहचानी अभिनेत्री हैं। मगर जिस गति से वे इंडस्ट्री के कामों में मसरूफ थी, उसपर पिछले साल से ब्रेक तो लगा ही, उनकी थियेटर गतिविधियां भी लॉक डॉउन और हालात के जाम में फंसी हुई हैं। वे प्रसिद्ध साहित्यकारों की कहानियों के परफॉरमेंस ‘जश्ने क़लम’ लिये मशहूर हैं। उन्होंने बताया, रंगमंच और इंडस्ट्री के बंद कामों के बीच उन्होंने एक साहित्यिक पत्रिका ‘हंस’ के ऑडियो वर्शन का काम ज़रूर किया है। चूंकि वो स्टुडियो बेस्ड था। इसलिये उतनी दिक्कतें नहीं हुईं। मगर उन्हें इंतज़ार है कि जल्द सब ठीक हो। तब स्थितियां मंच के लायक बन सकेंगी।

दिल्ली में #हिम्मत_सिंह_नेगी यह तो मानते हैं कि जीवंत मंचनों की बात अलग होती है। परंतु उनका मत है कि वे इस जल्दी में नहीं है कि तुरंत ही मंच के लिये कुछ किया जाये। अलबत्ता वे होम और टेरेस थियेटर के कॉन्सेप्ट पर ही फिलहाल ज़्यादा ध्यान देने के पक्ष में हैं। उन्होंने कहा, मेरे लिये तो लॉकडाउन का वक्त भी बेहद क्रियेटिव और नये तरीके से खुद प्रेजेंट करने का रहा है। मैंने अप्रैल 2020 से ही बच्चों और बड़ों की ऑनलाइन वर्कशॉप की, निर्देशन दिया, कई अहम सबजेक्ट पर वेबिनार किये। खुद भी क्लासेस अटेंट कर अपने क्राफ्ट को बढ़ाया। बहुत कुछ सीखा। अपना खर्च भी मैनेज किया। कुछ न कुछ करने और सीखने के उपक्रम में मैंने लाला की दुकान नाम से एक कैरेक्टर की कल्पना की और उसको लेकर भी कुछ काम किया।

भोपाल में एमपी ड्रामा स्कूल के डायरेक्टर #आलोक_चटर्जी ने यथा संभव नाट्य प्रशिक्षण,शिक्षण और परफॉरमेंस को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रखी। उन्होंने इस साल शुरू में राज्य के पांच ज़िलों में भी बाल रंग शिविर का आयोजन किया। परंतु बीच में ही बहुत सी गतिविधियां थम गईं। अब हालात फिर ठीक होते हैं तो एमपी के नाट्य स्कूल की ऑनलाइन के अलावा ज़मीनी गतिविधियां भी रफ्तार पकड़ सकेंगी। उर्दू रंगमंच के दिग्गज दिल्ली के #डॉ_सईद_आलम भी चाहते हैं कि हालात ठीक हों तो वे अपने हिट नाटकों के मंचनों का फिर सिलसिला शुरू करें। वे एक ऐसे सदाबहार परफॉरमर हैं जो हर बाधा को पीछे छोड़कर दिल्ली- एनसीआर में लगातार शोज़ करते रहते हैं। देश-विदेश के चक्कर लगाते रहते हैं। इतना ही नहीं वे भी नये अभिनेता,अभिनेत्रियों को अपने वर्कशॉप के ज़रिये मंच की तालीम देते हैं। मगर फिलहाल ऑनलाइन गतिविधियों को छोड़कर सभी पर ब्रेक है।

मुंबई के सीनियर थियेटर डायरेक्टर #इकबाल_नियाज़ी एक ऐसे कलाकार हैं जो अपने ग्रुप किरदार अकादमी के ज़रिये लगातार सक्रिय रहते हैं। उनके शोज़ के रूकने का भी सिलसिला कभी थमता नहीं। मगर ट्वेंटी-ट्वेंटी से ट्वेंटी वन तक वे जीवंत रूप से न के बराबर ही कुछ कर सके हैं। बीते साल उन्होंने मंटों के जीवन पर वेब सिरीज़ की तैयारी शुरू की। एक बार उन्होंने ऑनलाइन मोनोलॉग प्रतियोगिता का आयोजन किया। मगर वैसी गति नहीं आ सकी जैसी सामान्य दिनों में होती है। उन्हें भी इंतज़ार है, कब सबकुछ एकदम ठीक हो और वे मंच पर नये-पुराने शोज़ के साथ उतरें।

लॉक डाउन या कोरोना की मार ने एनएसडी के दिल्ली और बनारस कॆ केंद्रों को भी वेबिनार या डिजिटल ऑफिशियल या शिक्षा संबंधी गतिविधियों तक ही सीमित रखा। हाल ही में कैम्पस के अंदर ही एक चिल्ड्रन ड्रामा की रिहर्सल शुरू होने की ख़बर है। परंतु दूसरी वेव ने यहां के भी बहुत से कामकाम को झटका भी दिया। नाट्य संगीतकर #आमोद_भट्ट मार्च के महीने में वाराणसी में क्लासेस लेने के बाद एनएसडी दिल्ली पहुंचे थे। मगर जब दूसरी वेव में हालात गंभीर हुए तो उनकी दिल्ली में होने वाली क्लासेस पर ब्रेक लग गया।इसी तरह मुंबई में हेमा मालिनी के एक नृत्य शो से लेकर उनके अन्य नाटकों की रिहर्सल और शोज़ का काम रुक गया। वे बताते हैं, भई डेढ़ साल से काम मुश्किल से चल रहा है। सिर्फ ऑनलाइन संगीत क्लासेस ही चल पा रही हैं।

उज्जैन में श्री #हफीज_ख़ान और #कैलाश_चौहान, जयपुर में मेरे मित्र विजय कुलश्रेष्ठ,नोएडा में बड़ोदरा में पीएस चारी,गोवा में अफ़सर हुसैन,प्रमोद महाडेश्वर,पुणे में जया सरकार,जबलपुर में विवेक पांडे, रायपुर में सुभाष मिश्र,#योग_मिश्र जैसे कितने ही संस्था प्रमुखों और कलाकारों को मंच पर लाइव परफॉरमेंस का इंतज़ार है। सीनियर जर्नलिस्ट और संस्कृतिकर्मी #सुभाष_मिश्र बकायदा टेरेसे थियेटर के ज़रिये अपने काम को गति देना चाहते हैं। नये सुधरते माहौल में इस काम को वे फिर शुरू करने का इरादा कर चुके हैं। रायपुर में योग मिश्र भी अरसे से नया नाटक निर्देशित करने के इंतज़ार में हैं। उधर सीधी में #नीरज_कुंदेर ज़रूर ऑनलाइन आयोजन से किसी तरह कला गतिविधियों की कमान थामे हुए हैं। इसमें शक नहीं के बीते डेढ़ साल की अवधि में ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा,वेबिनार,शोज़ और शॉर्ट फिल्मों से बहुत से कलाकारों को अभिव्यक्ति का अवसर मिला है। #सूत्रधार,#आर्टिस्ट_कंबाइन,#किरदार_अकादमी जैसी कई संस्थाओं ने यथा संभव अपनी नाट्य गतिविधियां आगे बढ़ाई हैं। सूत्रधार के आदरणीय सत्य नारायण व्यास नाट्य स्पर्धा तो वहीं आर्टिस्ट कम्बाइन के संजय लघाटे लगातार ऑन लाइन शोज़ ला रहे हैं। ट्रेनिंग दे रहे हैं । वरिष्ठ अभनेत्री,लेखिका और निर्देशक #विभा_रानी के साथ ही प्रतीक्षा जैन नैयर,राजीव नेमा,सुदीप्ता सक्सेना,दिलीप लोकरे,शैलेंद्र काका जैसे कलाकार अपने-अपने स्तर पर काम से चर्चा के केंद्र में रहे हैं। परंतु बात तो दर्शकों के सामने परफॉर्म करने की है। फिलहाल इसका सभी को इंतज़ार है। बहरहाल परफॉरमेंस को ध्यान में रखकर ग्वालियर में #एमजी_सचिन ने अपने घर के गार्डन को करीब तीन सौ दर्शकों वाला एक मिनी थियेटर बना दिया है। उन्होंने कहा, कलाकार का धर्म है सृजन करते रहना। नई परिस्थितियों के अनुरूप ढलते रहना। गार्डन थियेटर उनका ऐसा ही काम है। लाइफ़ पूरी तरह से नार्मल होने दीजिये यहां शो भी करेंगे।

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