Saturday, May 9, 2026
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‘लागी तुमसे लगन’ में आई भारत रत्न स्व. लता मंगेशकर की याद

जावेद अहमद शाह ख़ान, इंदौर स्टूडियो। इंदौर में इस बार स्व.लता मंगेशकर जी के जन्म पर ‘लागी तुमसे लगन’ नाम से संगीत की महफ़िल सजी। इस सुरीली संध्या का आयोजन लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड संग्रहालय ने स्थानीय प्रेस क्लब सभागार में किया। कार्यक्रम में अजातशत्रु के चुनिंदा गीतों को प्रस्तुत किया गया। इंदौर में लताजी की आवाज़ का पर्याय कहलाने वाली सपना केकरे ने – ‘घिर घिर आयी कारी बदरिया’ और ‘तुम कहाँ हो, तुम कहां, जैसे गीतों से कार्यक्रम की शुरूआत की। विरह और दर्द में डूबी उनकी सुरीली आवाज़ ने सुनने वालों को सम्मोहित कर दिया। उन्होंने अपने ख़ास अंदाज़ में ‘लो जी हमें तो हिचकी आयी….’सजना रे तेरी कौन डगरिया…. और ‘कब बीत गयी जीवन की सुबह….’वो मुझसे दूर में मजबूर…. जैसे गीत भी सुनाये। सुनने वाले इन गीतों को सुनकर पुराने फ़िल्मी दौर की यादों में खो गये। यह ऐसे नग़मे भी थे जो अब सिर्फ यादों में ही ज़िंदा रह गये हैं। नई पीढ़ी ने उस दौर के ऐसे गीत सुने तक नहीं हैं। सपना के साथ युगल गीतों में में संजय मंडलोई ने साथ दिया। दोनों ने ‘नज़र-नज़र में हो रही है बात….’वो चाँद चमका वो नूर छलका….’नी बलिये ऋत है बहार की और ‘मिल के भी हम मिल न सके…. जैसे गीतों में बख़ूब साथ निभाया। आपको बता दें, अजात शत्रु प्रख्यात गीत मीमांसाकार हैं, उनके गीतों की टिप्पणी पाठकों के दिलो-दिमाग पर नक्श है। एक ज़माने में नई दुनिया में फिल्मों के सुपरहिट गीतों पर उनका स्तंभ प्रकाशित हुआ करता था।  लता जी का पर्याय सपना केकरे: कोरोना संकट के चलते दो साल से लता जी को समर्पित यह आयोजन बाधित हो रहा था। इस साल 27 सितंबर को यह आयोजन हुआ। लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफ़ोन रेकॉर्ड संग्रहालय, इंदौर में कई वर्षों से लता मंगेशकर के जन्म पर यह आयोजन करता रहा है। लता जी भी यह बात जानती थीं, वे हर साल जन्मदिन की बधाई स्वीकार किया करती थीं। साथ ही शहर के संगीत रसिकों को बड़ी आत्मीयता के साथ धन्यवाद कहा करती थीं। वे इंदौर आने का वादा भी करतीं थीं। परंतु इस बार ऐसा नहीं हो सका। इस बार ना तो उनकी आवाज़ आई , ना वो ख़ुद।ऐसा होता भी कैसे ? ‘भारत रत्‍न’ से सम्‍मानित लता जी 92 साल की उम्र में इस संसार को अलविदा कह चुकी थीं। 6 फरवरी को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्‍पताल में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया था। हज़ारों गीतों से हर संगीत प्रेमी के दिल में बसी सुर साम्राज्ञी की इस कार्यक्रम में बस यादें थीं। और यह संगीतमयी कार्यक्रम उनके जन्म पर उनकी याद की रस्म निभा रहा था।

सहयोगी स्वर माला स्टीफ़न का रहा: अतिथि कार्यक्रम में मेहमान गायिकों के रूप में माला स्टीफ़न भी मौजूद थीं। उन्होंने भी इस महफ़िल में ‘ऐ री मैं तो प्रेम दीवानी मेरा दर्द….’वो परदेसी छोरा छैला मोरा…. जैसे गीत सुनाकर दाद हासिल की। कुछ जगहों पर कार्यक्रम की सूत्रधार सुमित्रा जोशी ने भी साथ दिया। संगत कलाकारों में रवि सालके (की-बोर्ड),अमोल कारखानिस(तबला),अनूप कुलपारे (ऑक्टोपैड),और योगेश्वर कान्हेरे (गिटार) ने सधी साजिदंगी की। कार्यक्रम में हुआ लता स्मारिका का विमोचन: सुमित्रा जोशी संचालित इस कार्यक्रम में संग्रहालय की स्मारिका ‘ लय-ताल और लता ‘ का विमोचन हुआ। इस अवसर पर संस्कृति मंत्री सुश्री उषा ठाकुर, सांसद श्री शंकर लालवानी,महापौर इंदौर श्री पुष्यमित्र भार्गव वरिष्ठ भाजपा नेता और राष्ट्रकवि श्री सत्यनारायण सत्तन ,भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष श्री जीतू जिराती, इंदौर जिला अध्यक्ष डॉ.राजेश सोनकर , वरिष्ठ लेखक श्री अजातशत्रु और गुलाम कुरैशी मुंबई मौजूद रहे। संग्रहालय के अध्यक्ष विजय गावड़े ने अतिथियों का स्वागत किया। आभार सुमन चौरसिया ने माना। देखें कार्यक्रम में प्रस्तुत गीतों के वीडियो, इंदौर स्टुडियो के यू ट्यूब चैनल पर। https://indorestudio.com/latest-video/

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