कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति द्वारा कालजयी साहित्यकार लाला भगवानदीन के 160वें पुण्यस्मरण और पोस्टर विमोचन का गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (दिल्ली) के प्रो. नरेश वत्स और मेरठ विश्वविद्यालय के प्रो. विकास शर्मा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान ‘समकालीन युगबोध और साहित्यकार का दायित्व’ विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। उपन्यासकार व कवि प्रो. विकास शर्मा ने कहा कि आज भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और वैदिक साहित्य के मूलभूत सिद्धांत विश्व साहित्य का मार्गदर्शन कर रहे हैं। साहित्यकार का मूल धर्म मानवीय सद्गुणों को उभारकर जीवन मूल्यों की स्थापना करना है। प्रो. नरेश वत्स ने इस तरह के आयोजनों की सराहना करते हुए श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद के चुनिंदा अंशों को उर्दू नज़्म शैली में प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस अवसर पर प्रो. अशोक सचदेवा ने भी अपने विचार साझा किए।
कविताओं की हुई शानदार प्रस्तुति: कार्यक्रम में भरत कुमार उपाध्याय, अनिल ओझा, प्रो. कविम् भारद्वाज, रवि खण्डेलवाल, अमित शर्मा और नन्दकिशोर वर्वे ने अपनी बेहतरीन रचनाओं का पाठ किया। इस अवसर पर किशोर यादव, ज्योति यादव, राम आसरे पाण्डे, मुकेश कबीरे, योगिता, डॉ. आरती दुबे, दिलीप नीमा, सुधीर लोखण्डे, अतुल देशमुख, कीर्तिश धमारीकर और अनिल धड़ईवाले सहित अनेक बुद्धिजीवी व साहित्यकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन साहित्य मंत्री डॉ. पद्मा सिंह ने किया और अंत में आभार सदाशिव कौतुक ने व्यक्त किया। आगे पढ़िये – संझा, समाज और सवाल..https://indorestudio.com/sanjha-vivah-shikhandi-ka-theatre-review-rajesh-tiwari/

