Saturday, May 9, 2026
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लात मारने वाला ‘लतमरबा’ बाबा, स्त्री शोषण का प्रतिरोधी नाटक

इंदौर स्टूडियो,कला डेस्क। सीधी में विश्व रंगमंच दिवस पर नाटक ‘लतमरबा’ का मंचन हुआ। यह नाटक इन्द्रवती नाट्य समिति द्वारा आयोजित 111 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के समापन के अवसर पर हुआ। कार्यशाला के कलाकारों ने यह विशिष्ट प्रस्तुति दी। यह नाटक मुश्किल हालात से गुज़र रही एक लड़की के शोषण की कहानी है। लोक नाट्य शैली में प्रस्तुत यह नाटक, स्त्री शोषण के विरूद्ध प्रतिरोध का स्वर बनकर उभरता है।आशीर्वाद स्वरूप लात की मार: लतमरबा का सामान्य रूप से अर्थ लात मारने वाले से हैं। परंतु नाटक में लात मारना आर्शीवाद स्वरूप था। परम्परागत बातों कुछ सच्ची घटनाओं को समेट कर इस नाटक की रचना की गई थी, लोक परंपराओं में कथानक है कि जिस व्यक्ति का जन्म पैर की ओर से होता है उसके पैरों में जादू यानि कि अद्भुत चमत्कार होता है। इसी आधार पर कथानक को आज के परिवेश से जोड़कर गढ़ा गया है। नाटक के मंचन में बघेली लोक गीतों और नृत्यों का सराहनीय उपयोग हुआ है। जियामन और दुअसिया की कहानी: लतमरबा दो प्रमुख पात्रों, जियामन और दुअसिया पर केंद्रित है। जियामन चूँकि पैर की तरफ़ से जन्म लेने वाला बालक रहा है, इसलिये धारणा है कि उसके पैर में चमत्कारी प्रभाव है। वही बाद में लतमरबा बाबा बनकर, मुसीबत में घिरे लोगों को लात मारकर आशीर्वाद देता और उनका कल्याण करता है। दुआसिया की माँ नहीं है, पिता गंभीर रूप से बीमार हैं। ऐसे में मानव तस्करी में लिप्त उसकी मौसी उसे राजा के पास पहुँचा देती है। राजा,मंत्री और दूसरे लोग उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर उसका शोषण करते हैं। शोषित दुअसिया समाज की पतिता: मगर जब उसका नाता जियामन से जुड़ता है, तब उसे चरित्रहीन कहकर बदनाम करते हैं। संयोग से जियामन के लात मारने से किसी चमत्कार की तरह रोग आदि के ठीक हो जाने की चर्चा ज़ोर पकड़ लेती है। अब वही राजा,मंत्री,मौसी अपने कल्याण के लिये लात पड़वाना चाहते हैं, मगर जियामन उन्हें लात नहीं मारता। और ऐसे लोग अब अपने बेबस हालात में भटकने और तड़पने को मजबूर हो जाते हैं।नाटक में मंच के अभिनेता कलाकार: अमन रॉय,हर्ष कुमार, तेजिंदर ठाकुर, सर्वेश कुंवर यादव,नीरज कुम्भारे, राज बहादुर साकेत,मनोज कुमार यादव,अभिषेक कुंदेर, अभिनय कुंदेर,अंकिता सोंधिया,प्रीती यादव,तनुजा सिंह बैस,अनुभूति कुंदेर।नाटक में नेपथ्य के कलाकार: प्रकाश परिकल्पना रजनीश जायसवाल,अभिनय परिकल्पना शिवनारायण कुंदेर,संगीत संयोजन प्रजीत साकेत,गायन एवं हरमोनियम वादन सृजन मिश्र,गायन ओमकार पाण्डेय,संगीत परिकल्पना रोशनी प्रसाद मिश्र,आलेख, परिकल्पना एवं निर्देशन नीरज कुंदेर एवं रोशनी प्रसाद मिश्र, प्रस्तुति इन्द्रवती नाट्य समिति।
अतिथियों ने की नाटक की प्रशंसा: बैजनाथ सभागार में हुए इस कार्यक्रम में बतौर अतिथि सर्वश्री इंद्रशरण सिंह,चंद्रमोहन गुप्ता, डॉ. रामगरीब विकल, राजेंद्र भदौरिया, रूपेश रॉय और प्रसन्न सोनी के साथ ही सुश्री रंजना मिश्रा भी शामिल हुईं। आरंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्जवलन की रस्म अदा की। बाद में उन्होंने कलाकारों को प्रमाण पत्र भेंट किये। साथ ही अपने विचार रखे। सभी ने नाटक की प्रशंसा की।शोषण के विरूद्ध प्रेरक नाटक: श्री इंद्रशरण ने कहा – ‘यह नाटक में महिलाओं के शोषण का विरोध करता है। इस तरह से यह एक प्रेरक नाटक है’। सुश्री रंजना मिश्रा ने नाटक ने कहा – ‘आज भी हमारे देश में जगह-जगह पर अलग-अलग कारणों से ‘दुअसिया’ जैसी लड़कियों का शोषण हो रहा है। नाटक में इसे बखूबी उजागर किया गया है’। डॉ.विकल ने कहा – ‘इन्द्रवती नाट्य समिति, बघेली लोकसंस्कृति और बोली को बढ़ावा दे रही है जो हमारे लिए गौरव का विषय है’। अंत में दिल्ली से साइकिल चलाकर आये, पर्यावरण संरक्षक रूपेश रॉय ने कहा – ‘आज भी समाज में लोगों को लतमरबा बाबा के आशीर्वाद की आवश्यकता है’।

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