लता अलंकरण: SEL और सोनू निगम के सुरीले सफर का सम्मान

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शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रतिष्ठित राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान इस बार संगीत की ऐसी शक्तियों को दिया जा रहा है, जिन्होंने बॉलीवुड में संगीत का एक नया इतिहास रचा है। साल 2024 के लिए यह सम्मान मशहूर संगीतकार तिकड़ी शंकर-एहसान-लॉय यानी ‘SEL’ को और 2025 के लिए करोड़ों दिलों पर राज करने वाले गायक सोनू निगम को जा रहा है। 28 सितंबर को इंदौर में यह सम्मान समारोह परस्पर नगर में मौजूद लता मंगेशकर आडिटोरियम में होगा। सोनू निगम और शंकर महादेवन ऐसे कलाकार रहें हैं जिन्होंने अपने संगीत सफ़र के शुरूआती कार्यक्रम इंदौर में ही किये हैं। वो कौन से कार्यक्रम रहे हैं, इसी लेख में आगे आप जान सकेंगे। बॉलीवुड संगीत में नई क्रांति के अग्रदूत: शंकर महादेवन, एहसान नूरानी और लॉय मेंडोंसा की तिकड़ी ने भारतीय फिल्म संगीत को एक नई और आधुनिक दिशा दी। तीनों की संगीत की दुनिया अलग-अलग थीं। शंकर महादेवन की विशेषज्ञता हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत में, एहसान की पश्चिमी रॉक और ब्लूज़ में, और लॉय की जैज़ और की बोर्ड की दुनिया में। सन 2000 के आसपास जब यह त्रिवेणी एक साथ आई, तो इन्होंने मिलकर एक ऐसे साउंड को प्रोड्यूस किया जो पहले कभी सुना नहीं गया। मिसाल के लिये गीत…दिल चाहता है..।बॉलीवुड में आई संगीत की नई क्रांति: 2001 में आई फिल्म “दिल चाहता है” के संगीत के साथ इस तिकड़ी ने बॉलीवुड में क्रांति ला दी। उन्होंने भारतीय धुनों का पश्चिमी संगीत-शैली (अरेंजमेंट) के साथ एक ऐसा मिश्रण तैयार किया जो युवाओं की धड़कन बन गया। एक साक्षात्कार में इस तिकड़ी ने कहा था, “दिल चाहता है के साथ, हमने दिखाया कि बॉलीवुड संगीत ‘कूल’ हो सकता है।” “कल हो ना हो” के भावपूर्ण संगीत से लेकर “बंटी और बबली” के लोक-प्रभावित हिट्स तक और “तारे ज़मीन पर” की संवेदनशील धुनों से लेकर “रॉक ऑन!!” के ऊर्जावान रॉक एंथम तक, SEL की विविधता अद्वितीय है। काम इतना विविध और गहरा है कि जितनी चाहे चर्चा की जाये।एक से बढ़कर एक फिल्में: SEL की फिल्मोग्राफी में “मिशन कश्मीर,” “कभी अलविदा ना कहना,” “माई नेम इज़ ख़ान,” “ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा,” “भाग मिल्खा भाग,” और “राज़ी” जैसी कई सफल फिल्में शामिल हैं। इस तिकड़ी को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (“कल हो ना हो”) के अलावा फिल्मफेयर, IIFA और कई दूसरे पुरस्कार मिले हैं।सोनू निगम एक गायन संस्थान: सोनू निगम सिर्फ एक बेहतरीन गायक ही नहीं, बल्कि एक Singing Institute हैं। लगभग तीन दशकों से, उनकी आवाज़ हर तरह की भावनाओं को अभिव्यक्त कर रही है। वे स्व. मुहम्मद रफी को अपना भगवान मानते हैं और अपने गायन में रफी साहब को उन्होंने इस तरह से जज़्ब किया है कि दुनिया में उनके चाहने वाले उन्हें ‘मॉर्डन रफी’ ही सम्बोधित करते हैं। हालांकि वे महान गायक रफी साहब से किसी भी तरह की तुलना अर्थहीन मानते हैं। सोनू निगम कहते हैं, “रफी साहब की वजह से मैं हूं, मेरा वजूद है। वो मेरी प्रेरणा है।”  सोनू की सबसे बड़ी शक्ति उनकी रेंज: सोनू निगम की सबसे बड़ी शक्ति उनकी रेंज है। वे एक ओर “कल हो ना हो” और “अभी मुझ में कहीं” जैसे दर्द भरे गीत गाते हैं, तो दूसरी ओर “साथिया”, “सूरज हुआ मद्धम”, जैसे रोमांटिक गीतों में डूब जाते हैं। उनका मानना है कि “गायन केवल सुर में गाना नहीं है, बल्कि हर शैली में अपनी पहचान बनाना और आवाज़ में भाव और विविधता लाना है।”

पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद 28 मार्च, 2022 को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में सोनू निगम को पद्म श्री पुरस्कार प्रदान करते हुए।

32 से अधिक भाषाओं में गाये हज़ारो गीत: सोनू निगम ने हिंदी के अलावा 32 से अधिक भारतीय भाषाओं में हज़ारों गीत गाए हैं। “संदेशे आते हैं,” “ये दिल दीवाना,” “पंछी नदियाँ,” और “मैं अगर कहूँ” तुमसे मिलके दिल का जो हाल, “ऐसा दिवाना हुआ है दिल”, “मेरी दुनिया है तुझमे कहीं”, “मुझे रात दिन बस मुझे चाहती हो” जैसे अनगिनत हिट्स उनके नाम हैं। निजी तौर पर मुझे साजिद वाजिद के साथ उनका अलबम “दीवाना”, निखिल-विनय के साथ “जान” के गीत भी पसंद है। भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री (2022) से सम्मानित सोनू निगम को “कल हो ना हो” के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कई फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिल चुके हैं। इंदौर में संगीत की महाशक्तियों का मिलन: फिल्मी दुनिया में संगीत इन महाशक्तियों ने मिलकर काम किया, तो इतिहास बना है। इन कलाकारों ने हमें “बंटी और बबली” का देसी अंदाज़ दिया, तो “तारे ज़मीन पर” की मासूमियत भी दी। सोनू ने एक तरफ “संदेशे आते हैं” में एक फौजी का दर्द बयां किया, तो दूसरी तरफ “सूरज हुआ मद्धम” में रोमांस की नई परिभाषा लिखी। इंदौर में इन जैसे कलाकारों का सम्मान पाने के लिये एकसाथ एक यादगार मौका है। इंदौर संगीत का गुणी शहर है। बेशक शहर के लोग इन्हें सम्मान पाते हुए देखना और सुनना ज़रूर चाहेंगे। शंकर महादेवन का इंदौर में वह पहला कार्यक्रम: और अब इन कलाकारों के इंदौर आने जाने की। इस लेखक का शंकर महादेवन से इंदौर में ही पहली बार मिलना हुआ था। ‘शंकर महादेवन उस समय ‘ब्रेथलेस सांग’ (1998) के लिये सुर्खियों में थे। तब इस लेखक ने इंदौर में ‘नईदुनिया’ के लिये उनका इंटरव्यू लिया था। उन दिनों फिल्मी दुनिया में उनका सफर शुरू हो रहा था। सोनू निगम इंदौर में सारेगामा होस्ट करने आये थे: शंकर महादेवन से पहले नये-नये बने बॉस्केट बाल कॉम्पलेक्स में सोनू निगम चर्चित टीवी शो “सा रे गा मा” को होस्ट करने आये थे। उन्होंने 1995 से यह शो कंडक्ट करना शुरू किया था। बाद में सोनू निगम का अभय प्रशाल में भी संगीत का एक बड़ा शो हुआ। उसी दौर में उनके बारे में अपनी रिपोर्ट्स में इस लेखक ने लिखा था कि सोनू निगम आने वाले समय में फिल्मी दुनिया के सबसे बड़े सिंगर होंगे। हालांकि उस दौर में ये पता नहीं था कि आने वाले समय में शंकर महादेवन और सोनू निगम इंदौर में मध्यप्रदेश सरकार के विशिष्ट लता अलंकरण से भी सम्मानित होंगे। इंदौर को बधाई। लता मंगेशकर सम्मान की गौरवशाली परंपरा: राष्ट्रीय लता मंगेशकर पुरस्कार, संगीत जगत की उन हस्तियों को सम्मानित करने की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है जिन्होंने भारतीय संगीत पर एक अमिट छाप छोड़ी है। 1984 में नौशाद से शुरू हुई इस सम्मान यात्रा में किशोर कुमार, मन्ना डे, खय्याम, आशा भोसले, एसपी. बालासुब्रमण्यम, हरिहरन, आरडी बर्मन, एआर रहमान, उदित नारायण, कुमार सानू और आनंद-मिलिंद जैसे कई संगीत के दिग्गजों को सम्मानित किया जा चुका है। शंकर-एहसान-लॉय और सोनू निगम का नाम इस सूची में जुड़ना इनके असाधारण कलात्मक योगदान को प्रमाणित करता है। आगे पढ़िये – रंगों से राहत, चंडीगढ़ में बाढ़ राहत कला प्रदर्शनी 30 सितंबर तक https://indorestudio.com/rango-se-rahat-chandigarh/

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