इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। आमतौर पर लेखक और पाठक दूर-दूर ही होते हैं। लेखक अपने पाठकों के लिए कहीं दूर बैठकर लिखता रहता है और वे अपनी जगह बैठकर उसे पढ़ते रहते हैं। इस फासले से कई बार इन दोनों के बीच एक ख़ास किस्म की दूरी बन जाती है। इसे वक्त-वक्त पर पाटने की कोशिश दोनों तरफ से होती रहनी चाहिए. इसी बात को ध्यान में रखकर खंडवा में एक आयोजन में लेखक और पाठकों को रूबरू कराया गया। यह प्रयोग दोनों के ही लिए बहुत अच्छा रहा।
दो लेखकों से पाठकों ने की बातचीत : खंडवा के शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के सभागार में मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन की खंडवा इकाई ने ख्यात कथाकार-उपन्यासकार पंकज सुबीर के ताज़ा उपन्यास ‘जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पर नाज़ था’ तथा शहरयार अमजद ख़ान की पुस्तक ‘कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, कारण और निवारण’ पर चर्चा के साथ दोनों लेखकों से बातचीत की।
पाठकों ने की सार्थक बातचीत : खंडवा के प्रबुद्ध श्रोताओं ने अपने लेखकों से बात की और रोचक सवाल भी पूछे। लेखकों को भी पाठकों का इस तरह सामने बैठकर सवाल पूछने तथा सहज बातचीत का यह अंदाज़ खूब पसंद आया। इस सार्थक चर्चा में रघुवीर शर्मा और शैलेन्द्र शरण ने शहरयार अमजद ख़ान की पुस्तक ‘कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, कारण और निवारण’ पर चर्चा की तथा पंकज सुबीर के ताज़ा उपन्यास ‘जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पर नाज़ था’ पर डॉ. प्रताप राव कदम, अशोक गीते तथा डॉ. रश्मि दुधे ने सुचिंतित वक्तव्य दिया।
लेखकों ने माना, यह बेहतर तरीका : पंकज सुबीर ने कहा कि प्रताव राव कदम ने इस किताब पर जिस तरह श्रोताओं के सामने अपनी बात रखी, उससे मुझे अपनी बात कहने के कई रास्ते मिल गए. वे खुद एक अच्छे रचनाकार हैं और एक पाठक के रूप में श्री कदम को बोलते हुए सुनने को भी एक अलग आनंद है। डॉ. रश्मि दुधे जी ने कई बातें ठीक उस प्रकार कहीं, जिस तरह उपन्यास को लेकर मैं सोचता हूँ। पुस्तक चर्चा को सुनकर लगा कि किस प्रकार अलग-अलग पाठक किसी कृति को अलग-अलग तरीक़े से देखते हैं। इससे कई सारी नई बातें लेखक को पता चलती हैं। इस अर्थ में मेरे लिए अपने उपन्यास पर इन वक्ताओं को सुनना एक अलग अनुभव है। उन्होंने कहा कि मैंने भी पहली बार किसी कार्यक्रम में इस उपन्यास पर खुल कर अपनी बात सामने रखी। श्रोताओं के चेहरे किसी भी वक्ता के लिए संकेत होते हैं। मैंने उन चेहरों पर नज़र आ रही उत्सुकता को देखकर ही अपनी बात को निर्धारित समय से कुछ समय अतिरिक्त लेते हुए पूरा किया। शहरयार ने पहली बार अपनी किताब पर किसी कार्यक्रम में चर्चा की। पीछे रह कर प्रकाशन की सारी ज़िम्मेदारी संभालते हुए लिखने वाले को पहली बार मंच पर आने का अवसर मिला। शहरयार ने बहुत अच्छे से अपनी बात रखी। पाठकों से बातें करते हुए कुछ भावुक क्षण भी आए.
भेंट किया अमृता प्रीतम का सुंदर पोट्रेट : साक्षी इनर सर्किल ने इस अवसर पर पंकज सुबीर को मशहूर लेखिका अमृता प्रीतम का सुंदर पोट्रेट भेंट किया। गोविंद शर्मा ने चर्चा का संचालन किया।

