इंदौर स्टूडियो,कला संवाददाता। गांधी जी की ‘बकरी’ के नाम पर नेताओं ने देश और जनता को बहुत लूट लिया, मगर अब लोग जाग चुके हैं और ऐसे तत्वों को मुँहतोड़ जवाब देने के लिये तैयार हैं। ‘अनुकृति रंगमंडल’ कानपुर के कलाकारों ने यह सन्देश नाटक ‘बकरी’ के माध्यम से दिया। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत इस नाटक का लखनऊ की वाल्मीकि रंगशाला में मंचन किया गया। लोक नाट्य शैली में अनुकृति के कलाकारों की यह दिलचस्प प्रस्तुति रही। समारोह का आयोजन संस्कृति निदेशालय ,उत्तर प्रदेश और ‘दर्पण’ लखनऊ ने किया।
बकरी को क्या पता था मशक बन के रहेगी: इस चर्चित नाटक का लेखन सर्वेश्वरदयाल सक्सेना ने किया है। नाटक में दिखाया गया कि लूटपाट करने, डकैती डालने वाले तीन शातिर अपराधियों दुर्जन सिंह (राजीव तिवारी), कर्मवीर (शैलेन्द्र अग्रवाल) और सत्यवीर (कुशल गुप्ता) को एक दिन भिश्ती का गीत ‘बकरी को क्या पता था मशक बन के रहेगी…’ सुनकर एक तरकीब सूझती है। तीनों आपस में मशवरा कर अपने साथी सिपाही (शुभम प्रजापति) से एक बकरी का इंतजाम करने को कहते हैं। दीवान जी गांव की एक गरीब महिला विपती (जौली घोष) की बकरी चुपके से ले आता है और फिर नट और नटी के नृत्य-गीत माध्यम से यह नाटक रोचक ढंग से गति पकड़ता है।
बकरी की माँ तो गाँधी जी के पास थी!: दुर्जन, कर्मवीर व सत्यवीर दीवान जी के साथ मिलकर गांव में प्रचारित कर देते है कि यह बकरी की ‘मां’ गांधी जी के पास थी। अब यह तीनों गांधी जी की बकरी के नाम पर आश्रम स्थापित कर गांव वालों को खूब बेवकूफ बनाते है। ग्रामीण अपना सब कुछ बकरी को अर्पित कर देते हैं। बाद में कर्मवीर चुनाव लड़ता और जीत जाता है। दीवान जी डीआईजी बन चुके हैं । इन सारी बातों का गांव का ही एक युवक (विजय भास्कर) विरोध करता है। मगर दुर्जन, कर्मवीर, सत्यवीर और डीआईजी उसे जेल भिजवा देते हैं। मगर जागरूक हो चुके ग्रामीणों की बगावत के साथ नाटक का पटाक्षेप होता है।
लोकनाट्य शैली में खेला गया नाटक: नाटक की विशेषता यह थी कि इसे उत्तरप्रदेश की लोक नाट्य शैली में तैयार किया गया था। इस तरह यह नाटक नौटंकी के लोक रंजक तत्वों के साथ मिलकर और भी रूचिप्रद बन गया। इस तरह दर्शकों को नाटक एक नये अंदाज़ में देखने को मिला। नाटक में सुरेश श्रीवास्तव (भिश्ती), जौली घोष (विपती), राजीव तिवारी, शैलेन्द्र अग्रवाल, कुशल गुप्ता, दीपक राही (नट),दीपिका सिंह (नटी) शुभम, महेश जायसवाल, शुभी मेहरोत्रा, संध्या सिंह, साहिल चक, अलख, हिमांशु वर्मा ने बेहतरीन अभिनय किया। प्रभुदयाल (नक्कारा), दीप (हारमोनियम) और विशाल (नाल) का संगीत दर्शकों को बांधने में सफल रहा। नाटक का निर्देशन डॉ.ओमेन्द्र कुमार ने किया। महेश, शिवेन्द्र (रूप सज्जा), दिलीप सिंह, राजू कश्यप (प्रकाश व्यवस्था) ने योगदान दिया।

