महानाटक ‘जाणता राजा’ के शो में सचिन तेंदुलकर और ऊषा मंगेशकर

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इंदौर स्टूडियो, शकील अख़्तर। ऐतिहासिक और भव्य नाटक महानाटक ‘जाणता राजा’ के रोमांच का जादू बीते तीन दशकों से जारी है। मुंबई के शिवाजी पार्क में इसके छह दिन चले शोज़ ने एक बार फिर यह सिद्ध किया। महानाटक को इस बार भारत रत्न सचिन तेंदुलकर और प्रख्यात गायिका ऊषा मंगेशकर देखने पहुँचे। 2 घंटे के इस अनूठे नाटक के अब तक एक हज़ार बाइस (1022) शोज़ हो चुके हैं। बीते 3 दशकों में इसे 1 करोड़ से ज़्यादा दर्शक देख चुके हैं। मुंबई के हालिया शोज़ को लेकर हमने नाटक के निर्देशक प्रशांत चौहान से बातचीत की। यहाँ पढ़िये उसी बातचीत के अंश, कुछ विशेष जानकारियों के साथ। (‘जाणता राजा’ के मंचन से पहले मंच पर ऊषा ताई मंगेशकर) हर दिन 5 हज़ार से ज़्यादा दर्शक: प्रशांत चौहान ने बताया – ‘मुंबई में ‘जाणता राजा’ के हाल ही में, 14 से लेकर 19 मार्च 2023 तक छह दिन मंचन हुए। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस महानाटक की इस श्रंखला का शुभारंभ किया। नाटक के भव्य प्रदर्शन को देखकर दर्शक एक बार फिर रोमांचित हुए। हर दिन 5 हज़ार से ज़्यादा दर्शकों ने इस संगीतमय नाटक को देखा। सचिन तेंदुलकर और ऊषा मंगेशकर के साथ ही कई और हस्तियों ने इसकी प्रशंसा की’।
‘जाणता राजा’ का 1021 वां शो: प्रशांत ने कहा, ‘जिस दिन सचिन तेंदुलकर नाटक में शामिल हुए, उस दिन ‘जाणता राजा’ का 1021 वां शो हुआ’। उन्होंने बताया, ‘अब तक नाटक के 1022 मंचन हो चुके हैं। यह एक रेकॉर्ड है। हम जानते ही हैं कि यह एशिया का सबसे बड़ा नाटक है। प्रस्तुति शैली की वजह से इसे दुनिया में नंबर दो का सबसे बड़ा नाटक होने का गौरव हासिल है’।18 साल से निर्देशकीय सहयोग: प्रशांत चौहान ने कहा- ‘मेरा सौभाग्य है कि मैं इस नाटक के परिकल्पनाकार और लेखक स्व. बाबा साहेब पुरंदरे जी से वर्षों तक जुड़ा रहा। उनके सामने ही नाटक में विभिन्न स्तरों पर काम करते हुए, इसके निर्देशन तक पहुँचा। लगभग 18 वर्षों से मैं इस नाटक के निर्देशन की ज़िम्मेदारी भी निभा रहा हूँ। नाटक में 250 से 300 कलाकार काम करते हैं। ऊंट,हाथी,घोड़े कई बैलगाड़ियां का भी प्रयोग होता है। यद्दपि परिस्थिति के हिसाब इसमें बदलाव होता रहता है’।  यूरोप,अमेरिका में भी हुए प्रदर्शन: महानाट्य के युवा निर्देशक ने कहा, ‘इस नाटक देश के अधिकतम राज्यों में प्रदर्शन हुए हैं। इसके साथ ही लंदन के प्रसिद्ध वैम्बले स्टेडियम और अमेरिका के बोस्टन में भी इसका मंचन हो चुका है। मेरे लिये ख़ुशनसीबी की बात ये भी है कि वैम्बले में भी मुझे इस नाटक के लिये काम करने का अवसर मिला। 500 से ज़्यादा बार मैं इस नाटक के मंचन और उसकी पूर्व तैयारियों में शामिल रहा। नाटक के हर प्रदर्शन के समय हम स्व.बाबा साहब पुरंदरे को अपने साथ महसूस करते हैं। उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं’।शिवाजी के युग में ले जाता है नाटक: प्रशांत चौहान ने कहा-‘ यह नाटक हमें छत्रपति शिवाजी महाराज के युग में ले जाता है। यह नाटक एक बड़ा लाइट एंड साउंड शो है। इसमें गीत और संगीत, किसी ऑपेरा या गीति नाट्य की तरह ही है। नाटक के संचालन में लाइट, साउंड, मेकअप, मंच प्रबंधन आदि के लिये भी एक बड़ी तकनीकी टीम काम करती है। एक शहर से दूसरे शहर इस चलित नाटक को ले जाने का भी काम भी आसान नहीं होता। नाटक में कास्ट भी बदलती रही है। फिलहाल नाटक के मुख्य कलाकारों में डॉ. प्रसन्ना पराजंपे (शिवाजी महाराज) तेजस्विनी नांगरे (जीजा माता), सुनील बेहेरे (अफ़ज़ल ख़ान), बड़ी बेग़म (आदिति समुद्र), औरंगज़ेब और कविराज भूषण (अजीत आप्टे) महेश अंबेकर (शहीद) की भूमिका निभा रहे हैं। (निर्देशक प्रशांत नाटक में निर्देशन के साथ ज़रूरत पड़ने में अभिनय भी करते हैं।) 1974 में एक उत्सव से हुई शुरूआत: आपको बता दें,  इस नाटक की प्रारंभिक प्रस्तुति पुणे में 1974 में हुई थी। तब छत्रपति शिवाजीराजे भोसले (1630-1680 ई.) के राज्याभिषेक की 300 वीं वर्षगांठ मनाई गई थी। उस समय महाराजा शिव छत्रपति प्रतिष्ठान ने एक बड़े उत्सव की योजना बनाई। एक संगीत नाटक की तैयारी की गई। इसमें करीब 100 कलाकारों ने हिस्सा लिया। उन कलाकारों ने रिकॉर्डेड स्वर और संगीत पर अभिनय किया। मराठी रंगमंच में का यह पहला अनूठा प्रयोग था। इसका संगीत वसंत देसाई ने तैयार किया गया था। गीत, श्री अशोक परांजपे ने लिखे थे। बाबा साहेब पुरंदरे के लिखे इस शो का निर्देशन, दामू केनकारे ने किया था। दर्शकों ने बेहद पसंद किया। बाबा साहेब पुरंदरे इस बात से बहुत उत्साहित हुए। बाद में उन्होंने शिवाजी के जीवन पर  महानाटक लिखने का काम प्रारंभ किया। इस तरह देश में एक महान थियेटर शो ‘जाणता राजा’ का जन्म हुआ। (‘जाणता राजा’ को मुंबई के शिवाजी पार्क में 14 मार्च से 19 मार्च तक हर दिन 5 हज़ार से ज़्यादा दर्शकों ने देखा।) 1 करोड़ दर्शक देख चुके नाटक: 1985 से यह नाटक भव्य रूप से प्रारंभ हुआ। नाटक पुणे में मराठा साम्राज्य की राजधानी, शनिवारवाड़ा की एक प्रतिकृति का उपयोग हुआ। नाटक के लिये डिजिटल रूप से रिकॉर्ड 4 ट्रैक साउंड तैयार किया गया। नाटक दो भाषाओं, मराठी और हिन्दी में शुरू हुआ। इसके दोनों ही संस्करणों को पिछले 35 सालों में 1 करोड़ से ज़्यादा दर्शक देख चुके हैं। नाटक औरंगाबाद के देवगिरी किले से शुरू होता है और फिर पुणे के किले तक जाता है। नाटक छत्रपति शिवाजी के शासन सिद्धांतों, कामकाज की पारदर्शिता और उनके अनुशासन से जुड़े गुणों को प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित करता है। नाटक में घोड़ों, हाथी और ऊंटों का इस्तेमाल दर्शकों को ऐतिहासिकता का आभास कराता है। नाटक का जब भी मंचन होता है, दर्शक इसकी भव्यता को देखकर रोमांचित हुये बिना नहीं रहते।
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