पुष्पेंद्र वैद्य, द टेलिप्रिंटर। 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की 150 वीं जयंति पर इंदौर में सीनियर टीवी जर्नलिस्ट और लेखक शकील अख्तर की किताब ‘मोनिया द ग्रेट’ का विमोचन किया गया। संस्था ‘सूत्रधार’ के मंच पर प्रीतमलाल दुआ सभागृह में आयोजित दो दिवसीय गांधी उत्सव में विमोचन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। नाट्य पुस्तक को शहर के चुनिंदा रंगकर्मियों की मौजूदगी में जारी किया गया। इनमें प्रमुख रूप से श्रीराम जोग, अभिजीत वाडेकर, डॉ. संजय जैन, अरूण खले,सतीश श्रोत्रिय, चेतन शाह, नीतेश उपाध्याय, प्राजंल श्रोत्रिय जैसे कलाकार मौजूद थे। इस मौके पर सूत्रधार संस्था से सदस्य, शहर के कलाकार और संस्कृतिकर्मी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन सूत्रधार संस्था के प्रमुख सत्य नारायण व्यास ने किया। कार्यक्रम का आरंभ गांधीवादी चिंतक संजय जैन के गांधी की प्रासंगिकता पर दिये गये महत्वपूर्ण व्याख्यान से हुआ। साथ ही गांधी से जुड़ी महत्वपूर्म फिल्में दिखाई गई। इसमें परेश रावल अभिनीत ‘रोड टू संगम’ जैसी चर्चित फिल्म भी शामिल रही।
कैसे लिखा गया ‘मोनिया दि ग्रेट’ : विमोचन के बाद शकील अख़्तर ने नाटक को किताब के रूप में लाने के लिये सीनियर जर्नलिस्ट और अपराध मामलों से जुड़ी कई किताबों के लेखक विवेक अग्रवाल के साथ ही चित्रकार गोपाल भारती के प्रति आभार जताया। उन्होंने नाटक के लेखन और मंचन की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा, नाटक ‘मोनिया द ग्रेट’ लेखन उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, दिल्ली में आयोजित बाल रंग शिविर 2019 के लिये किया। स्कूली बच्चों की यह कार्यशाला दो महीने के लिये नाट्य विद्यालय में लगाई गई थी। इसमें दिल्ली के 23 स्कूली बच्चों ने भाग लिया। नाटक के दो शोज़ एनएसडी में हो चुके हैं, पहले दो मंचनों का निर्देशन हफीज़ खान ने किया। कैलाश चौहान, आशीष देवचरण ने सह निर्देशन किया। संगीत कलीम जाफर का था। अब ग्वालियर और रायपुर में इस नाटक के मंचन की तैयारी जारी है। ग्वालियर के आर्टिस्ट कंबाइन ने इसके एक भाग का मंचन दृश्य परिकल्पना की ट्रेनिंग के लिये किया है। 
नाटक में गांधी जी के बचपन से जुड़े रोचक प्रसंग : शकील अख़्तर ने बताया नाटक में गांधी जी के 150 साल पुराने बचपन से जुड़े प्रसंग हैं जिनका उल्लेख महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा में किया है। साथ ही दिल्ली में राजघाट पर गांधी स्मृति दर्शन से प्राप्त शोध सामग्री का भी इसमें उपयोग किया गया है। उन्होंने कहा, बच्चों में जैसी मासूमियत और जिज्ञासा का भाव होता है, वही मोहन यानी बचपन में सबके प्रिय मोहन उर्फ मोनिया में भी था। बचपन में मोनिया पर उनके माता-पिता, परिवार, पोरबंदर और राजकोट के स्कूली शिक्षकों, सहपाठियों और मित्रों का गहरा असर पड़ा। इन्हीं प्रसंगों और सीख के बीच मोनिया को महात्मा गांधी बनने के संस्कार मिले। उन्होंने कहा महात्मा गांधी की 150 वी जंयति वर्ष में लिखा गया यह पहला ऐसा नाटक है जिसमें गांधी जी के बचपन को ही फोकस किया गया है। इसमें गांधी जी के 1876 से लेकर 1888 तक के महत्वपूर्ण प्रसंग शामिल है। करीब 18 साल की उम्र तक के प्रसंग हैं।
महात्मा गांधी के बचपन पर आधारित नाटक ‘मोनिया दि ग्रेट’ का इंदौर में विमोचन
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