(आचार्य रंजन मोड़क,इंदौर स्टूडियो)।
मैं इस ख़ौफ़ में जीता हूं कि सच कहूंगा तो मारा जाऊंगा
और इस कदर डरा हुआ हूं कि
सच न कहूंगा तो घुटन से मर जाऊंगा
ये पंक्तियां हैं जाने-माने कवि आईएएस अभिषेक सिंह की जो उनकी किताब ‘स्याही के रंग’ से से ली गई है। कवि अपने ही जीवन के आत्मकथ्य को प्रस्तुत करते हुए जीवन के विभिन्न पहलुओं को सम्यक दृष्टि से देखते हुए अपनी लेखनी को काव्य का रूप देते हैं। उनकी कविताओं पर आधारित कविता कोलाज का प्रभावशाली मंचन रायपुर के ‘जनमंच’ पर देखने को मिला। यह प्रस्तुति सीधी के इंद्रवती नाट्य समिति के कलाकारों की थी। रोशनी प्रसाद मिश्र और नीरज कुंदेर अपनी कलाकार टीम के साथ यहाँ पहुँचे थे। आयोजन छत्तीसगढ़ फ़िल्म एंड विज़ुअल आर्ट सोसायटी ने किया था।
‘जन मंच’ पर एक बेहतरीन प्रस्तुति: ‘जन मंच’ पर हुए इस कविता मंचन में सुमन, राजेश, पंकज, कमल, ऋषि, साहिल, विष्णु, आकाश, शुभम और बहुत से साथी जिनके नाम छूट रहे या ये कहना ठीक होगा की याद नहीं क्योंकि कोई ब्रोशर था नहीं और देखते-सुनते ये याद रह गये। परंतु ख़ास यह था कि ये सभी साथी एक्सट्रीम आर्ट एंड एजुकेशनल सोसायटी, सीधी मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित 51 दिवसीय कार्यशाला में अलग-अलग राज्यों से जुटे और एक बेहतरीन प्रस्तुति का हिस्सा बने। रोशनी और नीरज की जोड़ी लगातार अपनी रंग साधना की दिव्य अनुभूतियों के अलग-अलग रंगों से अपने दर्शकों को सराबोर करते आ रही है। दीपावली के दीप रंगों की रोशनी में वे सभी दर्शकों को ‘स्याही के रंग’ प्रस्तुति से रोशन कर गए । दोनों के साथ ही सुभाष मिश्रा और योगेन्द्र मिश्रा जी का आभार ।
धीरे-धीरे चलना है ज़िंदगी को
क्योंकि अब भी कई एहसान चुकाना बाक़ी है
कहीं दर्द है तो कुछ फर्ज निभाना बाक़ी है
अनवरत रंग साधना में रोशनी और नीरज: कवि अभिषेक सिंह IAS की इन्हीं पंक्तियों का संज्ञान लेते हुए रोशनी और नीरज अनवरत अपनी रंग साधना में जुटे हुए हैं। कविता मनुष्य को मनुष्य बने रहने की प्रेरणा देती है और जब मानव संवेदन शून्य होने लगता है। तब कवि की लेखनी मानव समाज को नई दिशा दिखाने का प्रयास करती है तो इस प्रयास को सार्थक बनाने का कार्य करते हैं रंग साधक रोशनी और नीरज। मंचन सिर्फ़ और सिर्फ़ मनोरंजन के लिए नहीं अपितु हमारे सोये समाज को जगाने, नई ऊर्जा से ऊर्जित करने का माध्यम है। कवि नीरज लिखते हैं – “आत्मा के सौंदर्य का शब्द रूप है काव्य।” कवि अभिषेक सिंह IAS ने अक्षरों से मैत्री की है तो रोशनी ने उनके काव्य से मैत्री की और तब ‘स्याही के रंग’ खुलकर, खिलकर दर्शकों को सोचने, विचारने पर मजबूर करते हैं।
कविता का मंचन, काव्य दृष्टि को समझने का माध्यम: किसी भी कविता का मंचन उस कवि की सोच, उसके कला, भाव पक्ष और उसकी काव्य दृष्टि को स्पष्ट समझने का सबसे सरल माध्यम है क्योंकि कविता का क्षेत्र अति व्यापक है और जब निर्देशक अपनी रचनात्मक ऊर्जा के द्वारा कविता के शब्द जाल को सुलझाता है तब कविता सारे बंधनों से मुक्त होकर किसी पक्षी की भांति उड़ने लगती है। ठीक ऐसे ही ‘स्याही के रंग’ कविता के कोलाज में भी हमें देखने मिला कवि अभिषेक सिंह IAS की कल्पना दर्शकों के मन के भीतर-बाहर, इस घर से उस घर तक उड़कर आती-जाती रही। रोशनी की निर्देशकीय क्षमता के क्या कहने, मानों नए-नए रंग, नए-नए भाव सौंदर्य को अपने साथियों के देह भाव से अभिव्यक्त करने में सफल हुए हैं। रोशनी – नीरज की टीम को बधाई और सीधी की पावन माटी को नमन जिसने ऐसे जीवट साथी रंग साधना के लिए उत्पन्न किए। (समीक्षक आचार्य रंजन मोड़क, महाराष्ट्र नाट्य मंडल,रायपुर से सम्बद्ध हैं।)

