मैं जानता हूँ, प्यार क्या होता है: करण जौहर

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जेद्दा (सऊदी अरब) से अजित राय की विशेष रिपोर्ट। ‘मैं जानता हूँ कि प्यार क्या होता है, मुझे उन लोगों से डर लगता है जो प्रेम के लिये समय नहीं निकाल सकते। यह सच है कि मेरे जीवन में कभी कोई प्रेम कहानी नहीं रही लेकिन मैंने अपनी अधिकांश फिल्मों में दर्शकों को प्रेम कहानियां ही सुनाई हैं’। तीसरे रेड सी अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह (Red Sea International Film Festival 2023) में यह बात हिन्दी सिनेमा के मशहूर निर्माता-निर्देशक करण जौहर (मूल नाम राहुल कुमार जौहर, 51वर्ष) ने कही। उन्हें सुनने के लिए जेद्दा के रेड सी माल के वोक्स सिनेमा में बड़ी संख्या में बॉलीवुड से बेइंतहा प्यार करने वाले दर्शक मौजूद थे। इनमें सबसे ज्यादा पाकिस्तानी महिलाएं थी। उन्होंने करण जौहर की सभी फिल्में देख रखी थी।दो जुड़वां बच्चों के पिता करण जौहर: करण जौहर ने कहा कि वे दो जुड़वां बच्चों के पिता हैं और अपनी 81 वर्षीय मां के साथ मिलकर उनका पालन-पोषण कर रहें हैं। याद रहे कि करण जौहर ने फरवरी 2017 में सरोगेसी (उधार के गर्भ) से दो जुड़वां बच्चों के पिता बने थे। उन्होंने बेटे का नाम अपने पिता (यश जौहर) के नाम पर यश रखा। बेटी का नाम अपनी मां (हीरू) के नाम को उलटा करके रूही रखा। उनके पिता यश जौहर पंजाबी और मां हीरू जौहर सिंधी हिंदू हैं।सोते वक्त कहानियों के बारे में सोचता हूँ: ‘कुछ-कुछ होता है ‘(1998) जैसी ब्लॉक बस्टर फिल्म से अपना करियर शुरू करने वाले करण जौहर ने कहा कि ‘ऐ दिल है मुश्किल’ (2016) के सात साल बाद मैंने ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी'(2023) बनाई है। इसी मई में मैं 51 साल (25 मई 1972) का हुआ हूं। जब मैं सोने जाता हूं तो अपनी फिल्मों की कहानियों के बारे में सोचता हूं, टॉक शो के बारे में नहीं। सिने इतिहास की सबसे हिंसक फ़िल्म किल: अपनी नई फिल्म ‘किल’ के बारे में कहा कि यह हिंदी सिनेमा के इतिहास में संभवतः सबसे हिंसक फिल्म है जिसे देखने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हूं। इसे खाली पेट मत देखिएगा नहीं तो फिल्म देखने के बाद खाना नहीं खा पाएंगे। इसी साल टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह में इस फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर हुआ था और कहा जाता है कि वहां इसे बहुत पसंद किया गया। याद रहे कि करण जौहर ने गुनीत मोंगा के साथ इसे प्रोड्यूस किया है और निर्देशक हैं निखिल नागेश भट्ट। ‘किल’ में रांची से दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन पर एक लूटेरों का गैंग आधी रात को हमला करता है। नेशनल सेक्यूरिटी गार्ड्स के दो कमांडो उनका मुकाबला करते हैं। फिर पूरी ट्रेन में जो हिंसा का तांडव होता है। यह भयानक ही नहीं हृदय विदारक है।नेपोटिज़्म से बड़ा झूठ कुछ नहीं: करण जौहर ने हिंदी सिनेमा में नेपोटिज़्म (परिवारवाद) के सवाल पर हिंदी में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इससे बड़ा झूठ कुछ हो हीं नहीं सकता। उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए उनकी नई फिल्म ‘राकी और रानी की प्रेम कहानी’ में जब उन्होंने आलिया भट्ट का ऑडिशन देखा तो पाया कि रानी की भूमिका के लिए वे सबसे बेस्ट थीं। उनके लिए यह बात मायने नहीं रखती कि वे किसकी बेटी (महेश भट्ट) हैं और किस परिवार से आई है। उन्होंने कहा कि अब तक वे करीब तीस से भी अधिक लोगों को फिल्मों में मौका दे चुके हैं। यह किस्मत की बात है कि किसी को चांस मिल जाता है और कोई इंतजार करता रहता है। करण जौहर ने कहा – ‘सिनेमा में कास्टिंग के समय आप अपनी अंतरात्मा की आवाज़ (इंस्टिंक्ट) को ही सुनते हैं। हॉलीवुड मेरे वश की बात नहीं: हॉलीवुड में फिल्म बनाने के सवाल पर करण जौहर ने साफ कहा कि यह उनके वश की बात नहीं है। वे केवल हिन्दी में ही फिल्में बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि मेरा दिल, मेरे देश भारत मे बसता है। मैं हिंदी में ही फिल्म बना सकता हूं। उसी को लेकर सारी दुनिया में जाऊंगा। उन्होंने कहा कि जब मैंने ‘माय नेम इज खान ‘ (2010) बनाई थी तो लास एंजिल्स की यात्रा की थी। फाक्स स्टार स्टूडियो के साथ कई बिजनेस मीटिंग हुई,पर बात नहीं बनी। उन्होंने कहा कि वे एक घंटे के लिए हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री मेरिल स्ट्रीप (उम्र 74 साल) से मिले थे और उनके साथ भोजन किया था और वे उनके दीवाने हो गए थे। हो सकता है कि मेरिल स्ट्रीप को वह मुलाकात अब याद न हों पर मैं आज तक उनसे आब्सेस्ड हूं। वे हमारी दुनिया में बेस्ट अभिनेत्री हैं।कंटेट से भरपूर हैं हमारी फ़िल्में: यह पूछे जाने पर कि भारतीय सिनेमा के बारे में दुनिया भर में क्या गलतफहमी है? उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि हमारी फिल्मों में केवल नाच-गाना ही होता है और कंटेंट बहुत कम होता है। यह धारणा सही नहीं है। यदि आप भाषाई सिनेमा में जाएं तो बांग्ला, मलयालम, मराठी, कन्नड़ यहां तक कि ओड़िया, पंजाबी और असमी सिनेमा में भी कंटेंट की भरमार है। हमें कहानी कहना आता है। फिल्मों में अभिनय करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा उन्होंने कई बार कोशिश की, पर बात नहीं बनी। आखिरी कोशिश ‘बांबे वेलवेट ‘(2015) में की। फिल्म एक बड़ी डिजास्टर रही।राज कपूर और यश चोपड़ा मेरे आदर्श: करण जौहर ने कहा, राज कपूर और यश चोपड़ा उनके आदर्श हैं। इनसे उन्होंने बहुत कुछ सीखा। मगर आज फिल्म निर्माण पूरी तरह बदल गया है। पच्चीस साल पहले जब मैंने शुरुआत की थी तो यह उतना जटिल नहीं था। आज कैमरे और एडिटिंग की नई तकनीक आ गई है। सिनेमा में डिजिटल क्रांति आ गई है जिससे सिनेमा का जादुई अनुभव बदल गया है। अब एक और नई चीज सोशल मीडिया आ गया है। ‘काफी विद करण’ टाक शो के बारे में उन्होंने कहा कि मुझसे पहले सिमी ग्रेवाल (रेंडेवू विद सिमी ग्रेवाल) और तबस्सुम (फूल खिले हैं गुलशन-गुलशन) काफी चर्चित टाक शो करती रहीं हैं। जब मैंने 2004 में अपना टाक शो ‘काफी विद करण’ शुरू किया तो मेरे सभी दोस्तों ने पसंद किया और मुझे प्रोत्साहित किया। लोग 19 साल बाद आज भी उसको याद करते हैं।अक्सर बातबेबात होती हैं ट्रोलिंग: अक्सर विवादों में रहने के बारे में उन्होंने कहा कि वे ‘ट्रोल फेवरिट’ हैं। उन्हें अक्सर बात-बेबात ट्रोल किया जाता है क्योंकि उनका एक नाम है और ट्रोलर्स बेनामी लोग हैं। मैं इसका भी मजा लेता हूँ लेकिन मैं आलोचनाओं से नहीं घबराता। मैं हमेशा अपने आलोचकों, समीक्षकों से मिलना पसंद करता हूं। मैं अपनी फिल्मों की समीक्षाएं ध्यान से पढ़ता हूं। आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बहुत चर्चा हो रही है। मुझे लगता है कि कोई भी चीज ओरिजनल की जगह नहीं ले सकती। कला में मौलिकता की जगह हमेशा बनी रहेगी। इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सिनेमा को कोई खतरा नहीं है। (अजित राय प्रख्यात कला और फिल्म समीक्षक हैं। दुनिया के प्रमुख फिल्म उत्सवों की हिन्दी में रिपोर्ट्स के वे अग्रणी पत्रकार हैं।)   आगे पढ़िये –https://indorestudio.com/rsiff-deepika-padukone-meri-teacher/

 

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