मैं निर्देशकों के लिये अभिनय करता हूँ, दर्शकों के लिये नहीं: राहुल भट्ट

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अजित राय, अल गूना, मिस्र (इजिप्ट) से। ‘मैं अपने निर्देशकों के लिये अभिनय करता हूँ, दर्शकों के लिये नहीं। मैं केवल अपने डायरेक्टर की परवाह करता हूं और किसी की नहीं’। पूरी दुनिया में फ़िल्म कैनेडी में अपने अभिनय के लिये प्रशंसा पाने वाले अभिनेता राहुल भट्ट ने यह बात कही। राहुल भट्ट इजिप्ट के अल गूना में आयोजित छठवें अल गूना फिल्म फेस्टिवल (El Gouna Film Festival) में अपनी फिल्म ‘कैनेडी’ के प्रदर्शन के लिए आए हुए हैं। अनुराग एक जीनियस डायरेक्टर: राहुल भट्ट ने ‘कैनेडी’ में अपने बेहतरीन अभिनय के लिये निर्देशक अनुराग कश्यप को श्रेय दिया। उन्होंने कहा, ‘अनुराग एक जीनियस डायरेक्टर हैं। वे अपने अभिनेताओं को बिना सिखाये ही सबकुछ सिखा देते है। मेरी ख़ुशनसीबी है कि मुझे उनके जैसा निर्देशक मिला। वे सचमुच एक मास्टर डायरेक्टर हैं और अपनी तरह के अकेले फिल्मकार हैं’।1998 से सिनेमा-टीवी में सक्रिय: राहुल भट्ट ने एक ख़ास बातचीत में कहा कि वैसे तो वे 1998 से ही सिनेमा और टेलीविजन में सक्रिय है लेकिन सच्चे अर्थों में अनुराग कश्यप ने हीं उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपनी फिल्म ‘अगली’ (2013) में ब्रेक दिया। इस फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर 67 वें कान फिल्म समारोह (2013) के डायरेक्टर्स फोर्टनाईट में हुआ जहां उन्हें बेहिसाब लोकप्रियता मिली। इस फिल्म में उन्होंने एक स्ट्रगलर ऐक्टर का रोल निभाया है जिसकी बेटी का अपहरण हो जाता है। बाद में अनुराग कश्यप ने ‘अपनी थ्रिलर फिल्म ‘दोबारा’ (2022) में मुझे तापसी पन्नू के साथ लीड रोल में कास्ट किया। जीवन की सबसे अहम फ़िल्म ‘कैनेडी’: राहुल भट्ट ने कहा कि ‘कैनेडी’ उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण फिल्म साबित हुई है जिसका वर्ल्ड प्रीमियर इस साल 76 वें कान फिल्म फेस्टिवल की मिडनाइट स्क्रीनिंग में ग्रैंड थियेटर लूमिएर में हुआ था और साढ़े तीन हजार दर्शक दस मिनट तक खड़े होकर ताली बजाते रहे। दरअसल 1994 के बाद कैनेडी पहली भारतीय फिल्म थी जो कान फिल्म फेस्टिवल के मुख्य सभागार ग्रैंड थियेटर लूमिएर में दिखाई गई थी। इस समय कैनेडी भारत की अकेली ऐसी फिल्म बन गई है जिसे दुनिया के हर हिस्से में कहीं न कहीं दिखाया जा रहा है और दर्शक इसे पसंद कर रहे हैं।मेरे गुरूजी, अनुराग के भी गुरू: उन्होंने मशहूर फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्रा की तारीफ करते हुए कहा कि वे तो मेरे गुरु अनुराग कश्यप के भी गुरु है, इसीलिए हमारी फिल्म ‘ कैनेडी’ उन्ही को समर्पित है। उन्होंने मुझे अपनी फिल्म ‘दास देव’ (2018) में लीड रोल दिया था जो एक पॉलिटिकल थ्रिलर थी। यह भी एक संयोग है कि इस फिल्म में अनुराग कश्यप ने उनके पिता की भूमिका निभाई थी। यह फिल्म शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘देवदास’ से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि अब वे सुधीर मिश्रा की एक वेब सीरीज ‘क्राइम बीट’ कर रहे हैं जो एक पत्रकार और अंडरवर्ल्ड के रिश्तों पर है।दो नई फिल्मों में भी अभिनय: राहुल भट्ट ने कहा कि वे इन दिनों दो फिल्मों पर काम कर रहे हैं। पहली है विक्रमादित्य मोटवाने की ‘ब्लैक वारंट’ जो पत्रकार सुनेत्रा चौधरी और तिहाड़ के जेलर रहे सुनील गुप्ता की किताब ‘ ब्लैक वारंट: कंफेशंस आफ ए तिहाड़ जेलर’ पर आधारित है। इसमें दिल्ली के अपराध जगत और जेलों की व्यवस्था के साथ-साथ अफ़ज़ल गुरु जैसे ऐसे कई मुजरिमों का वृत्तांत है जिन्हें सुनील गुप्ता के जेलर रहते फांसी दी गई थी। राहुल भट्ट इसमें तिहाड़ के जेलर सुनील गुप्ता का किरदार निभा रहे हैं। ‘मेड इन कश्मीर’ एक डार्क कॉमेडी: उन्होंने कहा कि वे दूसरी फिल्म संजीव कौल के निर्देशन में करने जा रहे हैं जिसका नाम है ‘मेड इन कश्मीर।’ यह एक डार्क कामेडी है जिसमें हालीवुड के भी कुछ कलाकारों को लाया जा रहा है। यह सच्चे अर्थों में कश्मीरी फिल्म होगी। राहुल भट्ट ने कहा कि वे कश्मीरी पंडित है और अपने ही देश में रिफ्यूजी है। उन्हें 1991 में हीं कश्मीर छोड़ना पड़ा। मुंबई आकर वे माडलिंग करने लगे। 1998 तक वे सुपर मॉडल बन चुके थे। तभी उन्हें सोनी टीवी पर जावेद सय्यद के निर्देशन में एक सीरियल मिला ‘हिना’ जो पांच साल तक (1998-2003) सुपर हिट रहा। इसके बाद अभिनय का सिलसिला आगे बढ़ता रहा।मानवता के लिये अन गूना फेस्टिवल: राहुल भट्ट ने अल गूना फिल्म फेस्टिवल के बारे में कहा कि इजरायल हमास युद्ध के साये में यह फेस्टिवल मानवता के लिए हो रहा है। हम कलाकारों के लिए सबसे पहले मानवता है। मशहूर रूसी रंग चिंतक स्तानिस्लावस्की ने अपनी किताब ‘ऐन ऐक्टर प्रिपेयर्स’ में लिखा है कि एक अभिनेता को सबसे पहले एक अच्छा इंसान होना चाहिए। मैं खुद ऐसा मानता हूं कि मानवता से बड़ा न तो कोई धर्म हैं न कोई ईश्वर। आगे पढ़िये –

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