Wednesday, May 13, 2026
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मैथिली रंग महोत्सव में जीवंत हुईं दो वीरांगनाओं की दास्तां

कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। एनएसडी, दिल्ली के सम्मुख सभागार में दो दिवसीय ‘मैथिली रंग महोत्सव’ का आयोजन किया गया। इसमें झांसी की रानी और राजनर्तकी मनकी जैसी बलिदानी वीरांगनाओं की दास्तानों ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। पहला दिन हिन्दी और दूसरा मैथिली रंगमंच को समर्पित रहा। शुभारंभ ‘गणेश-अष्टकम्’ से हुआ। इसमें सुश्री मंजूषा एवं सुश्री ईशिका ने नृत्य प्रस्तुति दी। बतौर अतिथि एनएसडी के स्नातक और ख्यात लेखक अमिताभ श्रीवास्तव, हिंदी अकादमी दिल्ली के उप-सचिव ऋषि कुमार शर्मा और एनसीआरटी भोपाल केंद्र के डॉ. अरुणाभ सौरभ शामिल हुए। ‘दास्तान-ए-झांसी’ की सशक्त प्रस्तुति: महोत्सव के पहले दिन रमन कुमार के निर्देशन में नाटक ‘दास्तान-ए-झांसी’ का मंचन हुआ। यह नाटक रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर केंद्रित है। इस सशक्त नाटक के संगीत ने भी दर्शकों को बेहद प्रभावित किया। दूसरे दिन मैथिली कथा सम्राट स्व. हरिमोहन झा लिखित सुप्रसिद्ध कथा ‘ललका पाग’ का मंचन सुश्री ज्योति झा के निर्देशन में जय जोहार नाट्य संस्था ने किया। यह नाटक टूटते दाम्पत्य जीवन पर प्रहार करता है। नाटक को महिला रंगकर्मियों ने ही अभिनीत किया, यह इसकी विशेष बात रही। मंच पर दुर्लभ युद्ध कथा ‘मीनाक्षी’: आयोजन की अंतिम प्रस्तुति प्रकाश झा के निर्देशन में ‘मीनाक्षी’ (राजनर्तकी मनकी) की रही। यह कथा 1070 ई. में मिथिला के राजा नान्यदेव तथा बंगाल के राजा बल्लाल सेन के मध्य हुई लड़ाई पर आधारित है। इसका लेखन स्व. मन मोहन झा ने किया है। आयोजन में उनके पुत्र एनएन झा बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। यह ऐसी विरल ऐतिहासिक लड़ाई है जो सिर्फ दुर्लभ ग्रंथों को लूटने के लिये लड़ी गई थी। राजा नान्यदेव की राजनर्तकी ‘मीनाक्षी’ अपनी कौशल और बुद्धिमत्ता से मिथिला की दुर्लभ पाण्डुलिपियों को न सिर्फ बचाती है। अपितु राजा नान्यदेव का जीवन एवं मिथिला राज्य को अपनी जिंदगी की आहूति देकर भी सुरक्षित रख लेती है। सभी अभिनेताओं ने अपने पात्रों के साथ सुंदर समायोजन किया। मुख्य अभिनेता रमण कुमार एवं सुरभि झा ने दर्शकों को प्रभावित किया।16 साल से निरंतर आयोजन: आपको बता दें दिल्ली की मैथिली लोक रंग नाट्य संस्था (मैलोरंग) मैथिली रंगमंच का एक स्थापित नाम है जो बीते 16 वर्षों से ‘मिथिला रंग महोत्सव’ का आयोजन कर रहा है। आयोजन में दिल्ली की मैलोरंग, अष्ट दल कला अकादमी, जय जोहार फाउंडेशन, अभिनंदन, धनार्या प्रॉडक्शन आदि नाट्य संस्थाओं ने हिस्सा लिया। इस महोत्सव के लिए संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के साथ-साथ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, संगीत नाटक अकादमी ने सहयोग प्रदान किया। आगे पढ़िये –

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