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शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। ‘एक कलाकार के रूप में हमें अपनी ज़िम्मेदारी को समझना चाहिये। हमारी कला सबके हित में, सभी की उन्नति के लिये होना चाहिये। मानव की उन्नति से ही देश की उन्नति होगी’। भारत रंग महोत्सव 2024 के समापन समारोह में यह बात प्रख्यात कथक डांसर शोभना नारायण ने कही। समारोह में वे मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। समारोह दिल्ली के कामानी सभागार में आयोजित हुआ। इसमें आसिफ़ अली लिखित और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी निर्देशित नाटक ‘समुद्रमंथन’ का मंचन हुआ। यहां पढ़िये समारोह में विदूषी अतिथियों के साथ ही एनएसडी के प्रमुखों की कहीं ख़ास बातें।
मंच पर सुशोभित हुई नारी शक्ति: आपको बता दें कि समारोह में अपने-अपने क्षेत्रों में विशिष्ट स्थान बनाने वाली छह विदूषी महिला अतिथियों को आमंत्रित किया गया था। इनमें उनके साथ लोक गायिका मालिनी अवस्थी,अभिनेत्री हिमांशी शिवपुरी, श्रीमती उमा नंदूरी, नमिता जोशी और रश्मी सलूजा शामिल हुईं। उमा जी संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव हैं जबकि रश्मी सलूजा, रेलियगेयर के निदेशक मंडल की अध्यक्ष और नमिता जोशी नवभारत टाइम्स की इंटरटेनमेंट एडिटर हैं। मंच पर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) सोसायटी के अध्यक्ष परेश रावल और निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी मौजूद थे।
मुंबई में होना चाहिये एनएसडी: राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय सोसायटी के अध्यक्ष और चहेते अभिनेता परेश रावल ने कहा – ‘एनएसडी दिल्ली में है, देश की राजधानी में है। थियेटर की राजधानी में नहीं। थियेटर की राजधानी मुंबई है। एनएसडी मुंबई में भी होना चाहिये। मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि एनएसडी का विकेंद्रीकरण होना चाहिये जिस तरह एम्स अस्पताल हर राज्य में हैं या होने चाहिये, उसी तरह से राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय भी हर राज्य में होना चाहिये। उन्होंने कहा – ’25वें भारत रंग महोत्सव के दौरान एक साथ 1500 से जगहों पर 1500 से अधिक नाटकों के प्रदर्शन का जो रिकॉर्ड बनाया गया है, वह अद्वितीय घटना है। यह सभी का उत्सव है, इसको लेकर सभी को अपनी ख़ुशी ज़ाहिर करना चाहिये’।
1 लाख थियेटर फेमिलीज़ को जोड़ने का काम: संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव उमा नंबूरी ने कहा – ‘पूरे देश में एक साथ 1500 परफॉरमेंस के लिये मंत्रालय ने सभी को एकजुट करने में बड़ी भूमिका अदा की है। इसके माध्यम से एक लाख से अधिक थियेटर फेमिलीज़ को जोड़ने का काम हुआ है। इस परफॉरमेंस के माध्ययम से यह दर्शाने की कोशिश की गई है कि हम अपनी कला और संस्कृति के माध्यम से क्या आशा करते हैं। उन्होंने बताया कि संस्कृति मंत्रालय बीते दो सालों से सभी कला विधाओं के क्षेत्र में बेहतर काम के लिये बड़े जोर और शोर से काम कर रहा है। परंतु यह केवल संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से ही संभव नहीं है। इसके लिये सभी को मिलकर काम करना होगा। इसके विकास के लिये हमें देश के इंडस्ट्रलियस्ट के सहयोग की भी ज़ररूत होगी। तभी हम एक कलाकार के जीवन स्तर को ऊंचा उठा सकते हैं। उन्होंने दर्शकों से अपील की कि हमें टिकट लेकर कार्यक्रमों को देखने की आदत डालना चाहिये’।
‘भारंगम’ के गौरवशाली 25 साल: राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने कहा –‘भारत रंग महोत्सव का राष्ट्रीय उत्सव 1999 में प्रारंभ हुआ था। यह इसका 25 वां उपलब्धि वर्ष है। आज यह दुनिया का सबसे बड़ा नाट्य उत्सव बन गया है। मैं इसे महाकुंभ कहना चाहूंगा। 15 शहरों में इस उत्सव में, हर रंग के 200 से अधिक नाटक प्रदर्शित हुए ॉहैं। 1500 से अधिक जगहों एकसाथ नाट्य प्रस्तुति का विश्व रिकॉर्ड बना है। यह एक सुनहरा पल है। इसमें आप सभी की सद्इच्छा शामिल है। इस काम में हमें संस्कृति मंत्रालय पूरा सहयोग मिल रहा है। इसके लिये हम संयुक्त सचिव उमा नंबूरी जी के आभारी है। अब हमारा उद्देश्य नाटक को घर-घर पहुंचाना है’।
कॉरपोरेट वर्ल्ड को थियेटर से जोड़ने की ज़रूरत: रेलियगेयर के निदेशक मंडल की अध्यक्ष रश्मि सलूजा ने कहा – ‘रंगकर्म के विकास के लिये हमें इस बात विचार करना चाहिये कि हम कैसे कॉरपोरेट वर्ल्ड को रंगमंच के साथ जोड़ सकते हैं। चाहे वित्तीय सहयोग की या राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय जैसी आर्गनाइजेशन को मज़बूत बनाने की बात हो। हमें मिलकर इस विषय में सोचना और आगे बढ़ना चाहिये। विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप दिये जाने जैसे साझा प्रयासों को आगे बढ़ावे का प्रयास करना चाहिये’।
मैं एनएसडी आने का मौका ढूंढती हूँ: ख्यात अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी ने कहा, एनएसडी आने का मैं मौका ढूंढती हूं। चाहे एक दिन पहले ही मुझे क्यों ना बुलाया जाये। जैसे हैरी पॉटर में एक स्कूल ऑफ मैजिक था, हमारे लिये वैसा ही कुछ एनएसडी है। यहां की हवा में ही जैसे जादू है। यहीं पर हमने चाय पीते और पकौड़ियां खाते हुए दुनिया के थियेटर को जाना और समझा है। एनएसडी में रहते हुए विदूषी रीता जी के साथ ही बीवी कारंत, मोहन महर्षि, बीएम शाह और इब्राहिम अलकाजी जैसे दिग्गज निर्देशकों के साथ सीखा है। मैं ख़ुशनसीब हूँ कि मुझे यहां से इतना कुछ मिला। कामानी सभागार से जुड़ी मेरी बहुत-सी खूबसूरत स्मृतियां है। यहां पर हमारे बहुत से नाटकों का मंचन हुआ । पिछले साल मैंने यहीं पर अभिनेता राजेंद्र गुप्त के साथ नाटक ‘जीना इसी का नाम है’ का मंचन किया था’।
एक अर्थ में नाटक हैं मेरे गीत: विदूषी लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने कहा – ‘मैंने नाटक तो कभी किये नहीं, पर जो भी गीत गाती हूं, वो नाटक ही हैं – क्योंकि हर गीत में हम प्रवेश करते हैं, उस पुरखिन की आत्मा में। उदाहरण के लिये बुलौआ में दादी का स्वाभाविक गायन’। मालिनी ने मंच पर इसे गाकर भी सुनाया। उन्होंने कहा, ‘एक कार्यक्रम में मैं जब 10-12 गीत प्रस्तुत करती हूं तो उन गीतों के कई किरदारों को मंच पर जीती हूं। किसी में 16 साल की लड़की बनती हूं किसी में 50 साल की बुजुर्ग। मनुष्य की सबसे स्वाभाविक जो नैसर्गिक प्रतिक्रिया है वह अभिनय है। आप किसी भी चीज़ को देखकर हर्षित होते हैं। विस्मित और दुखी होते हैं। आपकी जो भी प्रतिक्रिया है – वही अभिनय हैं। आज आप सोचकर अपने को ढालते हैं। मैं भी इन गीतों को गाती हूं, वो सदियों से अभिनय में भिगोये हुए शब्दों के गीत हैं’।
धरती को खूबसूरत बनाने का शुक्रिया: नवभारत टाइम्स की इंटरटेनमेंट एडिटर नमिता जोशी ने कहा-‘कला और संस्कृति के माध्यम से आप धरती को ख़ूबसूरत बना रहे हैं। आपसी दायरों को तोड़कर जब हम जुड़ते हैं। जुड़कर सृजन करते हैं तो यह हमें ज़िंदा होने का अहसास का कराता है। ख़ासकर तब, जब आज हम एक मोबाइल के स्क्रीन तक सीमित रह गये हैं। ऐसे में एनएसडी के भारत रंग महोत्सव जैसे आयोजन का बहुत ही अहम रोल हो जाता है। यह हम सभी को एक उम्मीद के धागे से जोड़ता है। ख़ास कर उन लोगों के बीच जो मोबाइल की भूल-भुलैया में खो चुके हैं’।
ढाई हज़ार रंगकर्मियों ने हिस्सा लिया: नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के रजिस्ट्रार प्रदीप के. मोहन्ती ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा -‘भारत रंग महोत्सव में इस बार करीब ढाई हज़ार थियेटर आर्टिस्ट ने हिस्सा लिया। जन भारत से जुड़े आयोजन में यह भागीदारी 30 हज़ार से अधिक रही। आयोजन को सफल बनाने के लिये एनएसडी के अधिकारियों, कर्मचारियों और संकाय के सदस्यों ने रात और दिन मेहनत की। यह महोत्सव इस बार देश के पश्चिम में भुज, पूर्व में भुवनेश्वर, उत्तर-पूर्व के डिब्रूगढ़, उत्तर में श्रीनगर से लेकर दक्षिण में हैदराबाद तक 15 शहरों में आयोजित हुआ। इसकी सफलता के लिये नाट्य विद्यालय के समस्त कर्मचारियों के प्रति आभार जताता हूं। कुछ लोगों के नामों का विशेष तौर पर उल्लेख करना चाहूंगा। इनमें स्टूडेंट यूनियन के शेखर कर्णावत की टीम, शांतनु बोस और उनकी टीम, तकनीकी टीम के पराग शर्मा और उनकी टीम, सुमन वैद्य, लेखा विभाग के राम विलास जी, टीआई और रंगमंडल के प्रमुख राजेश सिंह और उनकी टीम और पीआर विभाग शामिल है’।

