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कला प्रतिनिधि, इंदौर स्टूडियो। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के कलानिधि प्रभाग द्वारा ‘मैपिंग ऑफ द आर्काइव्स इन इंडिया’ पुस्तक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर ‘आगम-तंत्र-मंत्र-यंत्र, खंड-3, भाग-1-5’ की वर्णनात्मक ई-कैटलॉग भी लॉन्च की गई। पुस्तक प्रोफेसर रमेश चंद्र गौड़ और विस्मय बसु द्वारा लिखी गई है। इसका आईजीएनसीए और यूनेस्को द्वारा प्रकाशन किया गया है।
राम बहादुर राय ने की अध्यक्षता: पुस्तक विमोचन सत्र की अध्यक्षता आईजीएनसीए ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय ने की। कार्यक्रम के सम्मानित अतिथि भारत के मुख्य सूचना आयुक्त श्री सत्यानंद मिश्रा और दक्षिण एशिया यूनेस्को, नई दिल्ली कार्यालय के सलाहकार संचार और सूचना श्री हेजेकील दलामिनी थे। कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता डॉ. सच्चिदानंद जोशी, सदस्य सचिव, आईजीएनसीए, प्रोफेसर डॉ. रमेश चंद्र गौड़, निदेशक (एलएंडआई) और कलानिधि प्रभाग, आईजीएनसीए और डॉ. संजय गर्ग, उप निदेशक, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार थे।
आईजीएनसीए में आना ख़ुशी की बात: श्री हेजेकील दलामिनी ने अपने भाषण में कहा कि आईजीएनसीए में आना यूनेस्को के लिए हमेशा खुशी की बात है क्योंकि यूनेस्को और आईजीएनसीए दोनों उनके सामूहिक प्रयास में भागीदार हैं। उन्होंने कहा, सदियों से अभिलेखागार ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इतिहास ज्ञान संस्कृति पर आधारित है। श्री डलामिनी ने टिप्पणी की, “संस्कृति के एक गतिशील और जीवंत मिश्रण के रूप में भारत दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करता है।” उन्होंने कहा, “दुनिया संस्कृति की विविधता में रुचि रखती है और यह देश की लंबाई और चौड़ाई में मौजूद है और यही कारण है कि यूनेस्को भारत में रुचि रखता है।”
डॉ.रमेश चंद्र गौड़ को बधाई: अपने उदबोधन में राम बहादुर राय ने (डॉ.) रमेश गौड़ को बधाई। उन्होंने कहा कि यह काम बेहद सराहनीय और महत्वपूर्ण है। शुरुआत तो अच्छी है, इसे आंदोलन भी बनाया जा सकता है। प्रोफेसर रमेश चंद्र गौड़ ने सभी अतिथियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने आईजीएनसीए और यूनेस्को द्वारा ‘मैपिंग ऑफ द आर्काइव्स इन इंडिया’ पुस्तक और ‘आगम-तंत्र-मंत्र- के वर्णनात्मक ई-कैटलॉग’ के प्रकाशन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुस्तक में भारत के अभिलेखागार की 424 निर्देशिकाएँ शामिल हैं। पुस्तक में पुस्तक में निहित अभिलेखों की पूरी प्रोफ़ाइल शामिल है। पुस्तक संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण के दृष्टिकोण से भी अवगत कराती है। आगे पढ़िये –

