शकील अख़्तर,इंदौर स्टुडियो डॉट कॉम। ‘मेरे लिये खुशनसीबी की बात है कि इस बार बीसवां भारत रंग महोत्सव का शुभारंभ और समापन मेरे ही संगीत से हुआ।‘ इंदौर स्टुडियो से एक वीडियो इंटरव्यू में यह बात देश में नाटकों के वरिष्ठ गायक और संगीतकार आमोद भट्ट ने कही। आमोद ने बताया, ‘1 फरवरी को भारत रंग महोत्सव के उदघाटन समारोह में गुरू ब.व.कारंत के नाट्य संगीत पर मुझे कार्यक्रम प्रस्तुत करने का मौका मिला। संयोग से महोत्सव के समापन से एक दिन पहले 20 फरवरी को नाटक ‘हारूस-मारूस’ का मंचन हुआ, उसमें भी मेरा ही लाइव संगीत था। इस तरह मेरे लिये बीसवां भारत रंग महोत्सव भाग्यशाली साबित हुआ।‘
रंगमंच पर बिखरा है कारंत के संगीत का जादू: आमोद ने कहा, ब.व. कारंत के संगीत का जादू भारतीय रंगमंच पर बिखरा पड़ा है। आज भी उनके नाट्य संगीत से हम सभी प्रेरणा ले रहे हैं। भारंगम के शुभारंभ समारोह के लिये मैंने कारंत जी के श्रेष्ठ नाटकों में से संगीत का चुनाव किया था। इनमें हयवदन,घासीराम कोतवाल,महानिर्वाण,अंधायुग जैसे नाटक शामिल हैं। करीब पचास मिनट के इस संगीत कार्यक्रम को बेहद सराहा गया। इसी तरह समापन से पहले खेले गये ड्रामा ‘हारूस-मारूस’ के संगीत को भी दर्शकों ने बेहद पसंद किया। दर्शकों ने इसके संगीत में नयापन और मौलिकता महसूस की। चूंकि इस नाटक में चूहों का समाज है, उनकी इंसानों के साथ बातचीत है। इसलिये नाटक का संगीत देना आसान नहीं था। मगर निर्देशक और लेखक के साथ गानों पर धीरे-धीरे काम हुआ। गाने लिखे गये और काम हुआ। नाटक में कई अच्छी सिचुएशन हैं। जिनके लिये अच्छे गाने बन पड़े हैं। जैसे- चूहे हैं हम, हम चूहे हैं।..नाटक में चूहे इंसानों की मदद करते हैं। यह एकदम नया प्रयोग है।‘

