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शकील अख़्तर, इंदौर स्टूडियो। मेटा 2026 में नाटक ‘मिथ्यासुर’ को इस साल का सर्वश्रेष्ठ नाटक घोषित किया गया है। इसने बेस्ट प्रॉडक्शन, बेस्ट ओरिजनल स्क्रिप्ट और बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार जीता है। हालांकि बंगाली नाटक ‘जे जनलगुलोर आकाश छिलो’ ने अपनी प्रस्तुति के लिये सबसे अधिक अवॉर्ड हासिल कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुक़ाबला इतना कड़ा था कि बेस्ट ओरिजिनल स्क्रिप्ट और फीमेल लीड रोल की श्रेणियों में ‘टाई’ की दिलचस्प स्थिति बन गई और जूरी को पुरस्कार साझा करने पड़े।
इस वर्ष अमोल पालेकर को उनके रंगमंच और सिनेमा असाधारण योगदान के लिये लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट और कल्चरल आउटरीच के हेड जय शाह और टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और फ़ेस्टिवल प्रोड्यूसर संजॉय के. रॉय ने प्रदान किया। आप उपर दी गई तस्वीर में अमोल पालेकर उनकी पत्नी संध्या गोखले और वरिष्ठ रंग निर्देशक अमाल अल्लाना के साथ देख रहे हैं।
इस बार महिला कलाकारों ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया है। वे निर्देशन, अभिनय और लेखन में अपनी एक ख़ास मौजूदगी के साथ दमकती-चमकती नज़र आईं। इस बारे में टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर संजॉय के. रॉय और दिग्गज नाट्य निर्देशक, लेखक व जूरी सदस्य अमल अल्लाना ने भी ख़ास तौर पर ध्यान खींचा। दोनों ने ही महिला कलाकारों की कलागत निपुणता को भारतीय रंगमंच के लिये एक अच्छा शगुन बताया।
दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में अवॉर्ड का ये नयनाभिराम समारोह हुआ। समारोह में इस बार लाइफटाइम अवॉर्ड से सम्मानित अमोल पालेकर के साथ ही जूरी में शामिल दिग्गज रंग हस्तियां मौजूद थीं। ये पुरस्कार शास्त्रीय और लोक परंपरा में निबद्ध ‘ताल फ्राय’ की सुरीली धुनों के बीच प्रदान किये गये।
इस आयोजन का मज़ेदार संचालन एक्टर,जॉकी मंत्र मुग्ध ने किया। दिलचस्प ये है कि वे ख़ुद भी अवॉर्ड की दौड़ में ‘चाँदनी रातें’ जैसी प्रस्तुति के माध्यम से शामिल थे। इस बारे में उन्होंने अपनी भावनाएं प्रकट भी कीं, इसके लिये वे ख़ुद भी हँसे और दर्शकों को भी हँसाया। मंत्र मुग्धा ने मंच से तीन बार निर्देशक अतुल कुमार का नाम भी पुकारा। हालांकि वे वहां मौजूद नहीं थे और उनके चर्चित नाटक ‘अम्बा’ को एक भी अवॉर्ड नहीं मिल सका।
अगर इन पुरस्कारों का बारीकी से विश्लेषण करें, तो साफ़ पता चलता है कि बंगाली नाटक ‘जे जनलगुलोर आकाश छिलो’ इस साल का सबसे बड़ा विजेता बनकर उभरा है। सर्वश्रेष्ठ नाटक (बेस्ट प्रोडक्शन) की दौड़ में भले ही यह ‘मिथ्यासुर’ से पीछे रह गया हो, लेकिन इसे सबसे अधिक 5 पुरस्कार मिले हैं। इस नाटक ने निर्देशन (सौरव पलोधी), मुख्य अभिनेत्री (टुर्ना दास), स्टेज डिजाइन, बेस्ट एंसेंबल और जूरी स्पेशल मेंशन में अपनी मजबूत धाक जमाई है।
वहीं, ‘बेस्ट प्रोडक्शन‘ का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाला नाटक ‘मिथ्यासुर’ कुल पुरस्कारों की गिनती में दूसरे स्थान पर रहा। इसे कुल 3 पुरस्कार मिले हैं। इसके अलावा, तीसरे नंबर पर ‘धोमी किथा किथा धोमी’ और ‘द ओल्ड मैन एंड द सी – कथकली ऑफ मॉरो’ रहे, जिन्होंने 2-2 पुरस्कार अपने नाम किए।
बाकी बचे नाटकों में मुक़ाबला काफी बंटा हुआ रहा। ‘समथिंग लाइक ट्रुथ’, ‘कादंबरी’, ‘वाई – व्हाट रिफ्यूज़ेस टू फेड’, ‘चांदनी रातें’ और ‘करुणाष्टके‘ ने अपनी-अपनी खूबियों के आधार पर एक-एक पुरस्कार जीता।
महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट और कल्चरल आउटरीच के हेड जय शाह ने कहा- ‘मेटा 2026 ने एक बार फिर भारतीय थिएटर की प्रतिभा और रचनात्मक साहस को सामने रखा है। इस वर्ष के फ़ेस्टिवल में देशभर से आई कहानियों और आवाज़ों की विविधता देखने को मिली, जिसने यह दिखाया कि थिएटर कैसे सोच को प्रेरित करता है, संवेदनशीलता बढ़ाता है और सार्थक संवाद शुरू करता है। अमोल पालेकर के जीवनभर के योगदान को सम्मानित करना हम सभी के लिए बेहद प्रेरणादायक रहा’।
टीमवर्क आर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और फ़ेस्टिवल प्रोड्यूसर संजॉय के. रॉय ने कहा- ‘मेटा 2026 ने भारतीय थिएटर की असाधारण विविधता और मज़बूती का जश्न मनाया। सात दिनों के दौरान, फ़ेस्टिवल दस बेहतरीन प्रस्तुतियों को एक साथ लाया, जिन्होंने हमारी भाषाओं, परंपराओं और समकालीन चिंताओं को दर्शाया। अवॉर्ड्स नाइट सिर्फ फ़ेस्टिवल का समापन नहीं था, बल्कि उन कलाकारों-रंगकर्मियों, डिजाइनरों, लेखकों और निर्देशकों का उत्सव भी था, जिनका काम भारत में कहानी कहने और प्रस्तुति की सीमाओं को लगातार आगे बढ़ा रहा है’।
मेटा फ़ेस्टिवल प्रोड्यूसर टीमवर्क आर्ट्स के सीनियर वाइस प्रसीडेंट सूरज ढींगरा ने कहा- ‘मेटा 2026 एक बेहद संतोषजनक यात्रा रही, जिसमें देशभर से रंगकर्मी इकट्ठे हुए। हर साल जो बात सबसे खास होती है, वह सिर्फ कहानियों और शैली की विविधता नहीं, बल्कि उस अनुशासन, सहयोग और समर्पण भी है, जो इस तरह के काम को संभव बनाता है। यह फ़ेस्टिवल जितना पहचान का मंच है, उतना ही कलाकारों, दर्शकों और पेशेवरों के बीच संवाद का भी मंच है, और इस बार का संस्करण इस भावना को पूरी तरह दर्शाता है। हम सभी प्रतिभागी टीमों के आभारी हैं, जिन्होंने इसे भारतीय थिएटर का एक जीवंत और यादगार उत्सव बनाया’।
मेटा 2026: विजेताओं की पूरी सूची –
बेस्ट प्रोडक्शन: उजागर ड्रामेटिक एसोसिएशन और वेद सत्पथी – ‘मिथ्यासुर’
बेस्ट डायरेक्टर: सौरव पलोधी – ‘जे जनलगुलोर आकाश छिलो’
बेस्ट ओरिजिनल स्क्रिप्ट: ओ.टी. शाजहान (‘धोमी किथा किथा धोमी’) और प्रणय पांडेय (‘मिथ्यासुर’)
बेस्ट एक्टर इन ए लीड रोल (फीमेल): टुर्ना दास (‘जे जनलगुलोर आकाश छिलो’) और दुशा (‘समथिंग लाइक ट्रुथ’)
बेस्ट एक्टर इन ए लीड रोल (मेल): मारियो बारज़ाघी – ‘द ओल्ड मैन एंड द सी – कथकली ऑफ मॉरो’
बेस्ट एक्टर इन ए सपोर्टिंग रोल (फीमेल): इप्शिता चक्रवर्ती सिंह – ‘कादंबरी’
बेस्ट एक्टर इन ए सपोर्टिंग रोल (मेल): साहिल आहूजा – ‘मिथ्यासुर’
बेस्ट स्टेज डिजाइन: सौरव पलोधी – ‘जे जनलगुलोर आकाश छिलो’
बेस्ट लाइट डिजाइन: संदीप यादव – ‘वाई – व्हाट रिफ्यूज़ेस टू फेड’
बेस्ट साउंड और म्यूज़िक डिजाइन: कैज़ाद घेरडा – ‘चांदनी रातें’
बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइन: आशीष देशपांडे – ‘करुणाष्टके’
बेस्ट एंसेंबल: ‘जे जनलगुलोर आकाश छिलो
‘बेस्ट कोरियोग्राफी: ओ.टी. शाजहान – ‘धोमी किथा किथा धोमी’
ज्यूरी स्पेशल मेंशन: अभिजीत के. आर. (‘द ओल्ड मैन एंड द सी…’) और वृद्धियान दासगुप्ता (‘जे जनलगुलोर आकाश छिलो’) आगे पढ़िये – सर्वश्रेष्ठ नाटक ‘मिथ्यासुर’ पर शकील अख़्तर की विशेष रिपोर्ट।-https://indorestudio.com/meta-2026-natak-mithyasur/

