जावेद अहमद शाह खान ‘अल-हिंदी’, इंदौर स्टूडियो डॉट कॉम। फ़िल्मों में बेहतरीन फिल्मीं गायकों की दुसरी पीढ़ी वो नाम या काम नही कर पायी है | मुकेश की आवाज़ बने नितिन मुकेश हों .किशोर कुमार की आवाज़ बने अमित कुमार हो या महेंद्र कपूर की आवाज़ बने रोहन कपूर | उनके चाहने वालों ने उन्हें शुरुआती मौके दिए लेकिन वो अपने दम ख़म पर इंडस्ट्री में वो मक़ाम नही बना पाए | इन सबका जब भी ज़िक्र होता है मो.रफ़ी के परिवार में भी उनके असर का गायक ढूंढा जाता है | उनके सबसे छोटे बेटे शाहिद रफ़ी ने अपने पिता के गाये गीतों को महफ़िलों में गुनगुनाने तक महदूद रखा है | इस वर्सेटाइल सिंगर के परिवार का उनकी सिंगिंग स्टाइल का शौकिनो को इंतज़ार रहा धीरे धीरे लोग ये समझ कि उनका कोई बदल नहीं हो सकता इस सपने को भुला बैठे |
पिछले कई रविवारों से उनके पोते फुजैल रफ़ी उनसे जुड़े किस्से और अपने परिवार के लोगो के इंडस्ट्री के कलाकारों की बातें फेसबुक और इंस्टाग्राम पर साझा कर रहे थे | उन्होंने अपने दादा के लिए उनके जन्मदिन पर कुछ नया करने का कहा था |
इस साल रफ़ी साहब के 96 वें जन्मदिन पर उन्होंने मोहम्मद रफ़ी संगीत अकेडमी की स्थापना की बात कही जिसमें गायकों को रफ़ी साहब की ख़ास सिंगिंग स्टाइल पढाई और सिखाई जायेगी | जिसमें उनका अलग अलग हीरो और कैरक्टर आर्टिस्टों के लिए गाने के खास अंदाज़ अपनाने को तवज्जो के साथ संगीत की तालीम दी जायेगी | उभरते गायक गायिकाओं के अलावा वादन भी सिखाया जाएगा | यही नहीं हर महीने उन्हें संगीत से जुडी एक सेलेब्रिटी से भी मिलने का मौका मिलेगा | इसमें रजिस्ट्रेशन आनलाइन होगा | इस मौके पर गायक महेंद्र कपूर के बेटे रोहन कपूर भी मोजूद थे | वो भी इस प्रोजेक्ट से जुड़े हुए हैं | उन्होंने बताया मात्र १२ साल की उम्र में कैसे रफ़ी साहब ने महेंद्र कपूर को सही राह दिखाई | मालूम हो सिर्फ महेंद्र कपूर ही उनके गंडाबंद शागिर्द रहें हैं | लंबे इंतज़ार के बाद इस तरह की किसी भी कोशिश पर उनके चाहने यही सोचते होंगें …जब तसव्वुर मेरा चुपके से तुझे छु आये /अपनी हर साँस से मुझको तेरी खुशबू आये ..
(लेखक स्व.रफी साहब के परिवार से मोहम्मद रफ़ी की गायिकी को लेकर लम्बा इंटरव्यू ले चुके हैं। रफी साहब के बेटे शाहिद रफी के संगीत कार्यक्रम का संचालन कर चुके हैं। गायक रफ़ी की लीगेसी और जॉनर को कायम रखने की कोशिशों में रफ़ी परिवार के साथ है।)

